भोपाल। राजधानी के लखेरापुरा क्षेत्र स्थित श्रीजी मंदिर में 40 दिनों से चल रहा होली महोत्सव आज विराम हुआ। पुष्टिमार्ग में प्रभु की सेवा बाल रूप से की जाती है इसलिए बालक सामान प्रभु को कभी भी भूख लग सकती है और वेद काल में भी प्रभु का सेवा कम नहीं रुकता है इसी क्रम में आज प्रभु का डोल उत्सव यानी रंगोत्सव सम्पन्न हुआ। जैसे प्रभु का औपचारिक रूप से होली का समापन होता है जिसमें प्रभु को प्रभु को पत्तों से बने डोल झूले में विराजमान किया अबीर गुलाल चोवा चंदन एवं टेसू के फूल से बने गीले रंग से प्रभु को होली खिलवाई गई। इस दौरान आज बिरज में होली रे रसिया, कान्हा धरो रे मुकुट खेले होली यह कीर्तन हुए। वैष्णव जनों के एक दूसरे को गुलाल लगाई एवं नित्य किया आरती के बाद मेवे एवं फल का प्रसाद वितरण किया गया।

श्रीजी मंदिर के मुखिया श्रीकांत वर्मा ने बताया कि चंद्र ग्रहण होने के कारण सभी मंदिर बंद रहते हैं लेकिन पुष्टिमार्ग में सभी हवेली में दर्शन खोले जाते हैं, क्योंकि ऐसा बताया गया है ग्रहण का कल संकट का होता है और पुष्टिमार्ग में प्रभु की सेवा की जाती है तो संकट काल में ना तो प्रभु को अकेले छोड़ जाता है और ना ही दर्शन बंद होता है। उन्होंने बताया कि ग्रहण काल में सिर्फ प्रभु का स्पर्श नहीं किया जाता, प्रभु के समीप बैठकर कीर्तन किए जाते हैं क्योंकि ग्रहण में नाम संकीर्तन के महत्व है।
वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण 3.20 बजे से शुरू हो चुका है। भारत में यह उदित होते चंद्र के साथ नजर आएगा। चंद्रग्रहण का मोक्ष 6.47 के बाद बताया गया है। इसके बाद स्नान के बाद भगवान का पूजन होगा और दान किया जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजन होंगे और अगले दिन धुलेंडी पर रंग खेला जाएगा।