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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला :रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 30 करोड़ कमीशन लेने का आरोप

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS निरंजन दास को जमानत दे दी है। EOW के मुताबिक वह शराब सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे और आबकारी नीति से लेकर शराब सप्लाई तक पूरे सिस्टम को नियंत्रित करते थे। उन पर 30 करोड़ रुपए से ज्यादा कमीशन लेने का आरोप है।
रिटायर्ड IAS निरंजन दास को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 30 करोड़ कमीशन लेने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के मुताबिक, निरंजन दास शराब सिंडिकेट के अहम सदस्यों में शामिल थे और आबकारी नीति से लेकर शराब सप्लाई तक पूरे सिस्टम को नियंत्रित करने में उनकी बड़ी भूमिका थी। सुप्रीम कोर्ट ने निरंजन दास को राज्य से बाहर रहने की शर्त पर जमानत दी है। उन्हें केवल जांच और कोर्ट में पेशी के लिए ही छत्तीसगढ़ आने की अनुमति होगी।

कोर्ट में क्या कहा गया?

सोमवार 25 मई को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट में बताया गया कि निरंजन दास ने राज्य की आबकारी नीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी और उस नीति से कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, इस मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में अभी लंबा समय लग सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने निरंजन दास को भी राहत दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि, भविष्य में वह जमानत की शर्तों में ढील के लिए आवेदन कर सकते हैं।

8 महीने पहले हुई थी गिरफ्तारी

निरंजन दास को 18 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने शराब सिंडिकेट के साथ मिलकर अवैध तरीके से शराब कारोबार को नियंत्रित किया और करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की। EOW के अनुसार निरंजन दास और आईटीएस अधिकारी एपी त्रिपाठी ने मिलकर करीब तीन साल तक पूरे सिस्टम को संचालित किया। 

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कौन सी शराब बिकेगी… सब तय करता था सिंडिकेट

जांच एजेंसियों के मुताबिक सिंडिकेट यह तय करता था कि किस जिले में कौन अधिकारी तैनात रहेगा, किस ब्रांड की शराब बिकेगी और किस कंपनी को सप्लाई का फायदा मिलेगा। EOW का दावा है कि निरंजन दास इसी नेटवर्क का मुख्य हिस्सा थे। जांच में यह भी सामने आया कि उन्हें 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला।

घोटाले के 10 आरोपी जमानत पर बाहर

छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले, कोल लेवी, DMF और अन्य आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में अब तक कई बड़े आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

जमानत पाने वालों में शामिल हैं-

  • रिटायर्ड IAS अनिल टुटेजा
  • निलंबित IAS रानू साहू
  • निलंबित IAS समीर विश्नोई
  • सौम्या चौरसिया
  • एपी त्रिपाठी
  • पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा
  • कारोबारी सूर्यकांत तिवारी
  • केके श्रीवास्तव
  • रिटायर्ड IAS निरंजन दास

इन सभी को राज्य से बाहर रहने की शर्त पर राहत दी गई है ताकि जांच और गवाह प्रभावित न हों।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला?

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच ED और EOW कर रही हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह घोटाला करीब 3200 करोड़ रुपए का बताया जा रहा है। ED की जांच में सामने आया कि तत्कालीन सरकार के दौरान एक सिंडिकेट बनाकर शराब कारोबार को नियंत्रित किया गया। इसमें अफसरों, कारोबारियों और शराब कारोबार से जुड़े लोगों की मिलीभगत बताई गई।

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कैसे काम करता था सिंडिकेट?

जांच एजेंसियों के अनुसार सिंडिकेट कई स्तर पर काम करता था:

1. डिस्टलरी से कमीशन वसूली
डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 से 100 रुपए तक कमीशन लिया जाता था।

2. शराब की कीमत बढ़ाई गई
कमीशन का बोझ कंपनियों पर न पड़े, इसके लिए नई टेंडर प्रक्रिया में शराब की कीमतें बढ़ा दी गईं।

3. नकली होलोग्राम वाली शराब बेची गई
आरोप है कि नकली होलोग्राम लगाकर शराब सरकारी दुकानों में बेची गई।

4. 40 लाख पेटी अवैध शराब बिक्री
जांच एजेंसियों के मुताबिक सिंडिकेट ने 40 लाख पेटी से ज्यादा अवैध शराब बाजार में खपाई।

सिंडिकेट के कोर ग्रुप में कौन-कौन?

अनिल टुटेजा
तत्कालीन संयुक्त सचिव, जिन्हें सिंडिकेट का संरक्षक बताया गया।

अनवर ढेबर
कारोबारी, जिस पर पूरे नेटवर्क की प्लानिंग और पैसों के बंटवारे का आरोप है।

एपी त्रिपाठी
CSMCL के तत्कालीन MD, जिन पर शराब सप्लाई और होलोग्राम नेटवर्क संभालने का आरोप है।

विकास अग्रवाल
नकली होलोग्राम वाली शराब से पैसे वसूलने और नेटवर्क तक पहुंचाने का आरोप।

अरविंद सिंह
खाली बोतल और नकली होलोग्राम सप्लाई कराने का आरोप।

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15 जिलों में खपाई गई अवैध शराब

जांच में सामने आया कि प्रदेश के 15 जिलों को शराब खपाने के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। दुकानदारों को निर्देश दिए गए थे कि अवैध शराब की बिक्री का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में दर्ज न किया जाए। नकली होलोग्राम वाली शराब बिना टैक्स दिए दुकानों तक पहुंचाई गई।

करोड़ों रुपए की उगाही का आरोप

EOW चार्जशीट के मुताबिक कई आबकारी अधिकारियों को करोड़ों रुपए दिए गए। आरोप है कि, सप्लाई एरिया कम-ज्यादा कर डिस्टलरी मालिकों से अवैध उगाही की जाती थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि सिर्फ सप्लाई जोन तय करने के बदले तीन वित्तीय वर्षों में करीब 52 करोड़ रुपए वसूले गए।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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