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तरबूज खाने से दर्दनाक हादसा:छत्तीसगढ़ में 3 मासूम बच्चे बीमार, 1 की मौत

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां कई घंटे रखा हुआ कटा तरबूज खाने के बाद तीन बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उल्टी, दस्त और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण सामने आए, जिसके बाद सभी बच्चों को अस्पताल ले जाया गया।
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छत्तीसगढ़ में 3 मासूम बच्चे बीमार, 1 की मौत

जांजगीर-चांपा। गर्मी के मौसम में तरबूज को सबसे सुरक्षित और शरीर के लिए फायदेमंद फल माना जाता है। इसमें पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए यह शरीर को ठंडक देता है और डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी से बचाता है। लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं, खासकर बच्चों को यह बहुत पसंद होता है।

हाल ही में छत्तीसगढ़ से आई एक घटना ने सबको चौंका दिया है। जिस तरबूज को लोग हेल्दी समझकर खाते हैं, वही तरबूज एक परिवार के लिए बड़ी मुसीबत बन गया। तरबूज खाने के बाद तीन बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई और एक 15 साल के किशोर की मौत हो गई।

कहां और कैसे हुई घटना?

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के एक छोटे से गांव घुरकोट का है। रविवार के दिन यहां कुछ बच्चों ने घर में रखा हुआ कटा तरबूज खाया था। जानकारी के मुताबिक, तरबूज सुबह के समय काटकर रखा गया था। वह कई घंटों तक वैसे ही बाहर रखा रहा। शाम के समय बच्चों ने वही तरबूज खा लिया। 

खाने के कुछ घंटे बाद बिगड़ी तबीयत

तरबूज खाने के कुछ घंटों बाद ही बच्चों की हालत खराब होने लगी। शुरुआत में एक बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। धीरे-धीरे उसकी हालत और बिगड़ती गई। इसके बाद सांस लेने में भी परेशानी होने लगी। कुछ ही समय में यही लक्षण बाकी बच्चों में भी दिखने लगे।

बच्चों में अखिलेश धीवर (15 वर्ष), निवासी पोड़ी दलहा गांव, एक 4 साल का बच्चा, धीवर परिवार से अवारिद गांव, पिंटू धीवर (12 वर्ष), खटोला गांव और हितेश धीवर (13 वर्ष), कोटगढ़ गांव से शामिल है। 

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अस्पताल पहुंचने से पहले गई एक जान

जब बच्चों की हालत गंभीर होने लगी तो परिजनों ने उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने का फैसला किया। लेकिन समय बहुत कम था। 15 वर्षीय अखिलेश की हालत सबसे ज्यादा खराब हो चुकी थी। अस्पताल ले जाते समय ही उसकी मौत हो गई। यह परिवार के लिए बहुत बड़ा सदमा था। बाकी तीन बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।

डॉक्टरों की शुरुआती जांच क्या कहती है?

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. एस. कुजूर ने शुरुआती जानकारी साझा की है। उनके अनुसार, बच्चों ने पहले से कटा हुआ तरबूज खाया था जो कई घंटों से रखा हुआ था। डॉक्टरों को आशंका है कि यह मामला फूड पॉइजनिंग का हो सकता है। यानी खाने में किसी तरह का संक्रमण या बैक्टीरिया विकसित हो गया होगा।

कटा हुआ फल अगर लंबे समय तक खुला रखा जाए तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। खासकर गर्मी के मौसम में यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

कैसे बनता है कटा फल खतरनाक?

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक बड़ी सीख भी है। जब कोई फल काटकर लंबे समय तक बाहर रखा रहता है, तो उसमें कई बदलाव हो सकते हैं। हवा और धूल से उसमें बैक्टीरिया आ सकते हैं, गर्मी में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं, फल में संक्रमण फैल सकता है और खाने से फूड पॉइजनिंग हो सकती है। तरबूज जैसा फल, जिसमें पानी ज्यादा होता है, वह बैक्टीरिया के लिए जल्दी अनुकूल वातावरण बना देता है।

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लापरवाही कैसे बन गई बड़ी त्रासदी?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कटा हुआ तरबूज कई घंटों तक क्यों रखा गया। अक्सर घरों में लोग बचे हुए फल को ढककर रख देते हैं और बाद में खा लेते हैं। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। खासकर बच्चों के मामले में यह खतरा और बढ़ जाता है क्योंकि उनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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