हेल्थ डेस्क। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन ने एक बार फिर सीने के संक्रमण (चेस्ट इंफेक्शन) के खतरे को सामने ला दिया है। शुरुआती तौर पर मामूली लगने वाला यह संक्रमण कई बार फेफड़ों तक पहुंचकर गंभीर रूप ले लेता है और सांस लेने में दिक्कत के साथ जानलेवा भी बन सकता है। आमतौर पर सीने का संक्रमण एक सामान्य सर्दी-खांसी जैसा लगता है, जिसे लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि इसे समय रहते समझना बेहद जरूरी है।
सीने का इंफेक्शन एक ऐसी स्थिति है जिसमें फेफड़े या सांस की नलियां संक्रमित हो जाती हैं। यह इंफेक्शन वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण हो सकता है। आमतौर पर यह शुरुआत में सर्दी-खांसी जैसा महसूस होता है, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर रूप ले सकता है।
इसमें मुख्य रूप से दो तरह की समस्याएं शामिल होती हैं-
इनमें से निमोनिया ज्यादा गंभीर माना जाता है।
निमोनिया (Pneumonia) एक गंभीर प्रकार का चेस्ट इंफेक्शन है, जिसमें फेफड़ों में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या पस भर सकता है। इससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और सांस लेने में दिक्कत बढ़ जाती है। हेल्थ संस्था के अनुसार, यह संक्रमण एक या दोनों फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। जब दोनों फेफड़े संक्रमित होते हैं तो स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। खासकर बैक्टीरियल निमोनिया तेजी से बिगड़ सकता है और कई बार मरीज को ICU या वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।
सीने का संक्रमण अक्सर हल्के लक्षणों से शुरू होता है, लेकिन अगर इसे नजरअंदाज किया जाए तो यह तेजी से गंभीर रूप ले सकता है। शुरुआत में खांसी और बुखार जैसे लक्षण होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे फेफड़ों में सूजन बढ़ने लगती है। इससे ऑक्सीजन का स्तर गिरता है और सांस लेने में कठिनाई बढ़ जाती है।
स्थिति और बिगड़ने पर संक्रमण खून में फैल सकता है, जिसे सेप्सिस कहा जाता है। यह शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित करता है और अंत में मल्टी-ऑर्गन फेलियर की स्थिति पैदा हो सकती है, जो जानलेवा साबित होती है।
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सीने का इंफेक्शन अलग-अलग परिस्थितियों में हो सकते हैं और उनकी गंभीरता भी उसी पर निर्भर करती है।
कम्युनिटी-एक्वायर्ड इंफेक्शन आमतौर पर बाहर से होने वाला संक्रमण होता है, जो सामान्य से मध्यम स्तर का होता है।
हॉस्पिटल-एक्वायर्ड इंफेक्शन अस्पताल में रहने के दौरान होता है और यह ज्यादा खतरनाक होता है क्योंकि इसमें एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट बैक्टीरिया शामिल हो सकते हैं।
वेंटिलेटर से जुड़ा संक्रमण उन मरीजों में होता है जो ICU में वेंटिलेटर पर होते हैं और यह सबसे गंभीर श्रेणी में आता है।
सीने का संक्रमण किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में यह तेजी से गंभीर हो सकता है। खासतौर पर 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, छोटे बच्चे, और वे लोग जो पहले से दिल, फेफड़ों या डायबिटीज जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं, अधिक जोखिम में रहते हैं।
इसके अलावा स्मोकिंग करने वाले और कीमोथेरेपी जैसे इलाज से गुजर रहे मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल सकता है और स्थिति जल्दी बिगड़ सकती है।
सीने के संक्रमण के लक्षण शुरुआत में सामान्य लग सकते हैं, लेकिन अगर ये लंबे समय तक बने रहें तो सतर्क हो जाना जरूरी है। लगातार खांसी, खासकर बलगम के साथ, सांस फूलना, सीने में दर्द या जकड़न, तेज बुखार, कंपकंपी और अत्यधिक थकान इसके प्रमुख संकेत हैं। अगर ये लक्षण समय के साथ बढ़ते जाएं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है, क्योंकि देरी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है।
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बुजुर्गों में सीने का संक्रमण ज्यादा गंभीर इसलिए होता है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है। इसके अलावा, कई बुजुर्ग पहले से ही दिल, फेफड़ों या अन्य बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिससे संक्रमण का असर और बढ़ जाता है।
शारीरिक गतिविधि कम होने, पोषण की कमी और शरीर की धीमी रिकवरी क्षमता भी इस समस्या को गंभीर बना देती है। यही वजह है कि बुजुर्गों में यह संक्रमण जल्दी जानलेवा रूप ले सकता है।
जब सीने का संक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो बैक्टीरिया फेफड़ों से खून में पहुंच सकते हैं और पूरे शरीर में फैल सकते हैं। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे दिल, किडनी और लिवर प्रभावित होने लगते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले, तो ये अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर सकते हैं। इस स्थिति को मल्टी-ऑर्गन फेलियर कहा जाता है, जो अक्सर मौत का कारण बनता है।
सीने के संक्रमण से बचाव के लिए रोजमर्रा की सावधानियां बेहद जरूरी हैं। सर्दी-खांसी को हल्के में न लें और समय पर इलाज कराएं। धूम्रपान से दूर रहें, क्योंकि यह फेफड़ों को कमजोर करता है। साफ-सफाई का ध्यान रखें और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए संतुलित आहार लें। खासतौर पर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों की देखभाल ज्यादा जरूरी होती है। उन्हें नियमित चेकअप और सही दवाएं मिलना बेहद जरूरी है।
कुछ स्थितियों में देरी करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए-