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महंगाई ने तोड़ी परंपरा, चंदेरी में लगभग बंद हुआ सोने-चांदी की जरी साड़ियां बनाने का काम

साड़ी 8 लाख की पड़ती है सोने से बनी एक साड़ी, इस लिए घट गई है मांग, फैशन ट्रेंड्स भी बदले
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महंगाई ने तोड़ी परंपरा, चंदेरी में लगभग बंद हुआ सोने-चांदी की जरी साड़ियां बनाने का काम

अखिल सोनी

इंदौर। बदलते दौर और सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर परंपरागत जरी वाली साड़ियों पर साफ दिखने लगा है। एक समय वह भी था जब शादियों और त्योहारों में सोने-चांदी की जरी वाली साड़ियां हर महिला की पहली पसंद हुआ करती थीं, पर अब यह ट्रेंड बदल गया है। बीते पांच सालों में सोने-चांदी के दाम पांच गुना तक बढ़ गए हैं, इसी अनुपात में सोने-चांदी से बनी जरी वाली साड़ियों की मांग में तेज गिरावट आई है। बिक्री में गिरावट का असर वैसे तो देशभर-में देखने को मिलता है, लेकिन इससे सबसे ज्यादा प्रभावित मध्य प्रदेश का चंदेरी हुआ है। यहां शुद्ध सोने से बनी जरी साड़ी की मांग अब लगभग पूरी तरह से खत्म हो गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सोने की बढ़ती कीमतों और बदलते ट्रेंड ने शुद्ध सोने से बनी साड़ियों की मांग खत्म कर दी है। अब चंदेरी में कुछ ही कारीकर इसे आर्डर पर बनाते हैं। यह अब सिर्फ ऑर्डर पर ही बनाई शुद्ध सोने की जरी वाली साड़ी के र न , ने में का यजाती हैं।

बिक्री में गिरावट के तीन बड़े कारण

-मूल्य वृद्धिः सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों से साड़ी बनाने की लागत कई गुना बढ़ चुकी।

-सस्ते विकल्प: कॉपर-ब्रास और यार्न जरी 2500 से 300 रु. प्रति किलो में उपलब्ध।

-फैशन ट्रेंड्सः डेस्टिनेशन वेडिंग और हल्के डिजाइनर आउटफिट्स की डिमांड बढ़ी है।

चंदेरी में कब कितनी थी मांग

-40% मांग थी 1970-1980 के दशक में

-25% मांग बची 1980-1990 के दशक तक

-10% मांग रह गई 1990 से 2000 के दशक में

-05% मांग बची 2000-2010 के दशक के बीच

-00% मांग रह गई 2010 से 2025 के बीच में

-6500 बुनकर हैं चंदेरी में, कुछ ही आर्डर पर करते हैं काम

(सोर्सः वंदेरी के व्याधारी, मांग प्रतिशत में)

12-15 लाख कारीगर प्रभावित 

-बिक्री घटने से देश भर में जरी कारोबार से जुड़े करीब 12-15 लाख कारीगर प्रभावित हुए हैं। इसका सबसे बड़ा केंद्र सूरत रहा है। सिर्फ सूरत में ही करीब 3 लाख परिवारों की आजीविका दांव पर लग गई है। पिछले 5 सालों में उत्पादन घटने से इंडस्ट्री का आकार 50% तक सिकुड़ गया है। इमिटेशन और यार्न जरी के चलते पारंपरिक कारीगरों की आमदनी 40-50 फीसदी तक घट गई है।

कहां कितनी घटी मांग

-20% तक कांचीपुरम में मांग घटी

-60% तक गिरावट महाराष्ट्र में दिखी

-65% तक गिरावट आंध्रप्रदेश हुई

70% तक गिरावट वाराणसी में आई

70% तक गिरावट कोलकाता में आई

100% तक गिरावट में चंदेरी में आई

महंगाई नेबदला माइंडसेट

फेडरेशन ऑफ सूरत ट्रेंड एंड टेक्सटाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश हाकिम ने कहा फैशन, ट्रेंड और माइंड सेट बदलने के कारण ही शुद्ध सोने-चांदी की जरी का बाजार तेजी से गिरा है। लोग अब ब्रॉड के पीछे भाग रहे हैं। सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों ने भी इस बाजार को खत्म कर दिया है।

सालों पहले खत्म हो गया काम

चंदेरी के साड़ी व्यापारी आलोक जैन ने बताया हमारा परिवार इस व्यापार में 1957 से है। सूरत से ही जरी आती है। सोने की शुद्ध जरी का काम 15 साल पहले ही खत्म हो गया है। सोने की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि वह साड़ी 8 लाख रुपए की हो गई है, जिसे कोई पहनना पसंद नहीं करता। ट्रेंड बदल रहा है सामान्य साड़ी की मांग भी कम होती जा रही है। 

Aniruddh Singh
By Aniruddh Singh

अनिरुद्ध प्रताप सिंह। नवंबर 2024 से पीपुल्स समाचार में मुख्य उप संपादक के रूप में कार्यरत। दैनिक जाग...Read More

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