सीमावर्ती राज्यों में SIR जल्द : CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा-दुनिया का सबसे बड़ा निर्वाचन कार्य भारत में, हमसे सीखने 40 देश आए

विजय एस. गौर, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि जल्द ही सीमावर्ती राज्य उत्तराखंड मेघालय और असम जैसे राज्यों में SIR शुरू होगा, ताकि निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव हो सके। CEC शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत निर्वाचन आयोग में मीडिया कार्यशाला के बाद अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। इसमें देश के 36 राज्यों के 350 मीडियापर्सन ने भागीदारी की। इस दौरान निर्वाचन प्रक्रिया बूथ लेवल से लेकर काउंटिंग तक के बारे में मॉडल के जरिए बताया गया। साथ ही स्पष्ट किया गया कि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी नहीं होती है।
पर्सनल अटैक होते हैं लेकिन इससे फर्क नहीं पड़ता
ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि आयोग के कामकाज को लेकर मीडिया ट्रायल से लेकर राजनीतिक बयानबाजी होती रहती है। उन पर भी पर्सनल अटैक होते हैं, लेकिन इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि जो नियम और संविधान के अंतर्गत है, उसी अनुसार काम होता है और आगे भी होगा। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि जब चुनाव आयोग के हिस्से मीडिया पर अटैक होते हैं तो फिर मैं तो मुखिया हूं तो इन सबको झेलने के लिए मुझ में दिल और जिगर है। ज्ञानेश कुमार ने बताया कि अभी तक 786 मुकदमे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में फेस कर चुके हैं, जिनमें से सिर्फ एक मामले में लूज किया है, बाकी सभी में सीईसी ने जीत हासिल की है।
जिन देशों में वोटिंग मैंडेटरी है वहां से भी ज्यादा भारत में मतदान
ज्ञानेश कुमार ने विभिन्न देशों का हवाला देते हुए बताया कि ऑस्ट्रेलिया सिंगापुर कनाडा जैसे देशों में मतदान करना अनिवार्य है अन्यथा कानूनी एक्शन लिया जाता है। बावजूद भारत में ऑप्शनल होने के मतदान का प्रतिशत इन देशों से कहीं ज्यादा रहता है। इसके लिए चुनाव आयोग के प्रयास और जनता में आ रही जागरूकता का रोल है। हाल ही में बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनाव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल में 93% मतदान हुआ है, जो की विश्व रिकॉर्ड है। सारी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्षता के साथ पूरी हुई है। मतदान बढ़ाने का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत निश्चित तौर पर बढ़ेगा।
BLO और एजेंट बढ़ाने की जरूरत
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि 15 लाख से ज्यादा BLO रात दिन जुटे थे, लेकिन बूथ लेवल एजेंट भी इतने ही हैं जो कि कम है हालांकि इसके लिए राजनीतिक दलों को पहल करनी चाहिए क्योंकि एजेंट उनके द्वारा ही नियुक्त किए जाते हैं। चुनाव आयोग उनसे बार-बार आग्रह करता है अच्छे निर्वाचन के लिए पर्याप्त एजेंट होना जरूरी है, जिसके लिए राजनीतिक दलों को अपनी भूमिका निभानी होगी।
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लोकल बॉडी के चुनाव में किया हस्तक्षेप से इनकार
ज्ञानेश कुमार ने पंजाब तमिलनाडु और पुडुचेरी में स्थानीय चुनाव लंबित रहने के मुद्दे पर कहा कि यह जिम्मेदारी स्टेट इलेक्शन कमीशन की है इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं रहती। इसलिए इस संबंध में जो भी आपत्ति या सुझाव होते हैं वह राज्य निर्वाचन आयोग के सामने पेश किया जाना चाहिए। आखिरकार प्रादेशिक चुनाव के संबंध में मिलने वाले सुझाव या शिकायत को वापस राज्य निर्वाचन आयोग को ही भेज दिया जाता है, क्योंकि उन्हें का क्षेत्राधिकार है।
घुमक्कड़ जातियां भी मतदाता होती हैं भले ही यहां से वहां होती रहे
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि राजस्थान के लोहार या जम्मू कश्मीर के बकरवाल जैसी कम्युनिटी के लोग यहां से वहां माइग्रेट करते रहते हैं। इसी तरह बहुत सारे लोग दिल्ली मुंबई जैसे महानगरों में ओवर ब्रिज के नीचे जिंदगी बिता देते हैं, लेकिन ये भी मतदाता होते हैं, इसलिए उनके नाम मतदाता सूची में जोड़े जाते हैं।
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