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भारत में CCTV के जरिए जासूसी का बड़ा खुलासा :पाकिस्तान की ISI का ‘चाइनीज EYE’ नेटवर्क बेनकाब, दिल्ली-हरियाणा-पंजाब से जा रही थी लाइव फुटेज

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में सोलर CCTV कैमरों के जरिए जासूसी का बड़ा खुलासा हुआ है। ISI से जुड़े नेटवर्क पर आरोप है कि ये कैमरे संवेदनशील जगहों की लाइव फुटेज पाकिस्तान भेज रहे थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और कैमरे बरामद किए, जांच अभी जारी है।
पाकिस्तान की ISI का ‘चाइनीज EYE’ नेटवर्क बेनकाब, दिल्ली-हरियाणा-पंजाब से जा रही थी लाइव फुटेज
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    देश की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में लगे कुछ CCTV कैमरे अब सिर्फ निगरानी के लिए नहीं, बल्कि जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन कैमरों के जरिए संवेदनशील इलाकों की लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान भेजी जा रही थी। यह मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है। इस खुलासे ने यह साफ कर दिया है कि जासूसी के तरीके अब पहले से कहीं ज्यादा हाईटेक और खतरनाक हो चुके हैं।

    कैसे काम कर रहा था पूरा नेटवर्क

    जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में सोलर पावर से चलने वाले CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन कैमरों में SIM कार्ड लगे हुए थे, जिससे ये बिना किसी लोकल नेटवर्क के भी सीधे डेटा भेज सकते थे। यानी कैमरे जहां लगाए गए, वहीं से इंटरनेट के जरिए वीडियो फुटेज लाइव स्ट्रीम होकर बाहर पहुंच रही थी। बताया जा रहा है कि यह तकनीक इतनी चालाकी से इस्तेमाल की गई थी कि सामान्य लोगों को इसमें कोई शक ही नहीं हुआ।

    ISI की नई चाल और मकसद

    सूत्रों के मुताबिक, ISI का मकसद भारतीय सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाना था। 
    इन कैमरों के जरिए:

    • सेना की मूवमेंट
    • BSF की गतिविधियां
    • संवेदनशील ठिकानों की लोकेशन
    • लॉजिस्टिक सपोर्ट

    जैसी जानकारी जुटाई जा रही थी। बताया जा रहा है कि “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद ISI अपनी ट्रैकिंग क्षमता को फिर से मजबूत करना चाहता था, इसलिए उसने यह नया तरीका अपनाया।

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    कहां-कहां लगाए गए थे कैमरे

    जांच एजेंसियों ने कई शहरों में ऐसे कैमरों का पता लगाया है, जिनमें जालंधर, पटियाला और अंबाला जैसे इलाके शामिल हैं। इसके अलावा कपूरथला, मोगा और अन्य संवेदनशील जगहों पर भी कैमरे लगाए गए थे। ये सभी लोकेशन रणनीतिक रूप से अहम मानी जाती हैं, जहां से सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।

    दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई

    इस मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए स्पेशल सेल के जरिए छापेमारी की।
    इस दौरान:

    • 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया
    • 9 सोलर CCTV कैमरे बरामद किए गए
    • कई हथियार और कारतूस भी मिले

    गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से ज्यादातर पंजाब के हैं, जबकि कुछ दिल्ली के रहने वाले हैं। पुलिस का कहना है कि यह एक सुनियोजित जासूसी मॉड्यूल था, जो लंबे समय से सक्रिय था।

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    कैसे भेजी जा रही थी फुटेज

    जांच में यह भी सामने आया है कि ये कैमरे सिर्फ रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे थे, बल्कि लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे थे। वीडियो फुटेज को व्हाट्सएप और खास मोबाइल ऐप्स के जरिए सीधे पाकिस्तान भेजा जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ कैमरे कई दिनों तक लगातार लाइव फीड भेजते रहे और किसी को भनक तक नहीं लगी।

    रेलवे स्टेशन और सैन्य इलाकों पर नजर

    इस नेटवर्क ने खासतौर पर उन जगहों को निशाना बनाया, जहां सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियां ज्यादा होती हैं। जैसे- दिल्ली कैंटोनमेंट रेलवे स्टेशन और सोनीपत रेलवे स्टेशन। यहां लगाए गए कैमरे 15 दिनों से ज्यादा समय तक एक्टिव रहे और लगातार फुटेज भेजते रहे।

    स्लीपिंग सेल्स का इस्तेमाल

    सूत्रों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में “स्लीपिंग सेल्स” यानी ऐसे लोगों का इस्तेमाल किया गया, जो सामान्य नागरिकों की तरह रहते हैं लेकिन जरूरत पड़ने पर सक्रिय हो जाते हैं। ये लोग कैमरे खरीदते, लगाते और उन्हें ऑपरेट करते थे। इससे यह साफ है कि जासूसी का यह नेटवर्क सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर भी मजबूत था।

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    सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता

    इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। खासतौर पर चिंता इस बात की है कि आम लोग भी ऐसे कैमरे खरीद सकते हैं, इन्हें आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता है और इनकी निगरानी करना मुश्किल है। हालांकि, सरकारी और सैन्य संस्थानों में “मेड इन इंडिया” उपकरणों का इस्तेमाल होने से वहां खतरा कम बताया जा रहा है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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