Aakash Waghmare
21 Jan 2026
दावोस। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि अमेरिका के दबदबे वाली वैश्विक व्यवस्था अब समाप्त हो चुकी है। उन्होंने यह बयान मंगलवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मंच से दिया। कार्नी ने कहा, “दुनिया किसी बदलाव की ओर नहीं, बल्कि टूटन की ओर बढ़ रही है। पुराना वैश्विक सिस्टम अब वापस लौटने वाला नहीं है।”
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों पर आधारित वैश्विक व्यवस्था की धारणा पर भी सवाल उठाए। कार्नी के मुताबिक, नियमों के तहत चलने वाली दुनिया की बात कभी पूरी तरह हकीकत नहीं रही। उनका कहना था कि वैश्विक राजनीति हमेशा से ताकत और राष्ट्रीय हितों से संचालित होती रही है।प्रधानमंत्री कार्नी ने यह भी स्वीकार किया कि पुरानी वैश्विक व्यवस्था से कनाडा को लाभ मिला, लेकिन अब मौजूदा हालात में यह सिस्टम टिकाऊ नहीं रह गया है और इसमें बुनियादी बदलाव की जरूरत है।
दावोस में कार्नी के भाषण के दौरान तालियों की गूंज साफ बताती थी कि उनका संदेश कितनी गहराई तक पहुंचा। इस बीच अमेरिका की असहज चुप्पी भी कई मायनों में बोलती नजर आई। दरअसल, कार्नी ने वह बात खुले मंच से कह दी, जिसे वैश्विक नेता अमेरिका की तथाकथित ‘डायनासोर डिप्लोमेसी’ के उभार के बाद से अब तक बंद कमरों में ही चर्चा का विषय बनाते रहे हैं।
कार्नी का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोस्त और दुश्मन के बीच फर्क किए बिना, लगभग हर देश के साथ कठोर और धमकी भरा रुख अपनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में कार्नी का यह भाषण न सिर्फ अमेरिका की वैश्विक भूमिका पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की दरारों को भी उजागर करता है।
दुनियाभर के देशों पर टैरिफ थोपने के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाज़ी और ज्यादा आक्रामक होती नजर आ रही है। ताज़ा संकेतों में उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जे जैसी बातें तक कह दी हैं और रास्ते में आने वालों को सजा देने की धमकी दी है। इस रुख की आंच अमेरिका के नाटो सहयोगियों तक पहुंच चुकी है, जहां फ्रांस जैसे करीबी साझेदारों को भी चेतावनियों का सामना करना पड़ा है।