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दोबारा देखने का नहीं करेगा मन:एक बार में उतर जाएगा फिल्म 'एक दिन' का नशा, फीकी रही जुनैद-साई की केमिस्ट्री

आमिर खान के बेटे जूनैद खान और साई पल्लवी की फिल्म एक दिन 1 मई को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है, जो एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसमें जूनैद खान लिड रोल में नजर आ रहे हैं, और उनके साथ साउथ की जानी मानी एक्ट्रेस साई पल्लवी नजर आ रही हैं, एक्ट्रेस इस फिल्म से हिंदी सीनेमा में अपना डेब्यू कर रही हैं। तो आईए जानते है फिल्म कहानी सुनने में जितनी प्यारी और प्रेम से भरी नजर आती है।
एक बार में उतर जाएगा फिल्म 'एक दिन' का नशा, फीकी रही जुनैद-साई की केमिस्ट्री

जूनैद और साई की फिल्म की कहानी शर्मीले लड़के के इर्द गिर्द घूमती है, फिल्म में दिनेश (जूनैद खान) आईटी कंपनी में काम करने वाला एक सीधा और शर्मीला लड़का है, फिल्म में दिनेश के कैरेक्टर को ऐसे दर्शाया गया है जैसे उसे कोई नोटिस नहीं करता है। 

धीमी कहानी और फीका रोमांस

दिनेश बस अपनी खामोश दुनिया में खोया रहता है, और उसकी जिंदगी ऐसे ही साधारण तरह से चलती रहती है, इसी बीच उसकी जिंदगी में ट्विस्ट तब आता है जब उसे ऑफिस में अपनी सहकर्मी मीरा (साई पल्लवी) से प्यार हो जाता है, लेकिन उसके अरमान जल्द ठंडे हो जाते हैं, जब उसे पता चलता है कि मीरा पहले ही अपने बॉस को डेट कर रही है।

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कहानी में ट्विस्ट, लेकिन खोया असर 

इसी दौरान कहानी में एक ट्विस्ट आता है, जब ऑफिस की ट्रिप जापान जाती है, वहां मीरा को पता चल जाता है कि उसका बॉयफ्रेंड पहले से शादीशुदा है, जिसके बाद मीरा बहुत टूट जाती है और मायूस होकर तूफानी रात अकेली निकल जाती है, जहां दिनेश उसको ढूंढ लेता है, चोट लगने के कारण मीरा 'टेम्पररी ग्लोबल एम्नेसिया' (TGA) का शिकार हो जाती है,  जिससे उसकी 24 घंटों की याददाश्त खो देती है, इसके बाद फिल्म की कहानी अलग मोड़ पर चली जाती है।

प्यार की कहानी में नहीं दिखा जादू

अगर एक्टिंग की बात करें, तो जुनैद खान पूरी फिल्म में कमजोर लगते हैं। उनके चेहरे के भाव और एक्स्प्रेशन दोनों कम दिखते हैं, जिससे लगता है कि उनका इस काम में ज्यादा मन नहीं है। वहीं साई पल्लवी अपनी सादगी और नेचुरल एक्टिंग से फिल्म को संभालने की कोशिश करती हैं। उनका किरदार चेन्नई का है, इसलिए उनकी थोड़ी टूटी हिंदी भी ठीक लगती है और रोल पर फिट बैठती है। लेकिन जुनैद की धीमी एक्टिंग के कारण साई पल्लवी का अच्छा काम भी फिल्म को पूरी तरह बचा नहीं पाता।

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अच्छी शुरुआत के बाद भी फिल्म नहीं पकड़ पाई रफ्तार

निर्देशक सुनील पांडे ने थाई फिल्म से आइडिया तो लिया, लेकिन उसे हिंदी में अच्छे से दिखा नहीं पाए। उनका डायरेक्शन कमजोर लगता है और कहानी में वो गहराई नहीं है जो एक अच्छी रोमांटिक फिल्म में होनी चाहिए। फिल्म के सीन और कहानी बताने का तरीका इतना साधारण है कि दर्शक किरदारों के दुख-सुख से जुड़ नहीं पाते। कुछ अच्छे रोमांटिक पल होने चाहिए थे, लेकिन पूरी फिल्म एक जैसी और बोरिंग लगती है, जो दिल को छू नहीं पाती। यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है, लेकिन इससे ज्यादा उम्मीदें नहीं रखी जा सकती।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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