अब पानी से भी उड़ान:भारत में शुरू होगी सीप्लेन सेवा, दूरदराज इलाकों की बदलेगी कनेक्टिविटी

नई दिल्ली। भारत में हवाई यात्रा का स्वरूप अब तेजी से बदलने वाला है। अब तक लोग सिर्फ रनवे से उड़ान भरने वाले विमानों से सफर करते थे लेकिन आने वाले समय में पानी से भी उड़ान भरना संभव होगा। देश में पहली बार कमर्शियल सीप्लेन सेवा शुरू होने जा रही है, जिसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस दिशा में बड़ा कदम तब उठा जब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने स्काईहॉप एविएशन को एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट (AOC) जारी कर दिया। इसके साथ ही कंपनी अब देश में सीप्लेन सेवा शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार हो गई है।
लक्षद्वीप से होगी शुरुआत
इस नई सेवा की शुरुआत पहले चरण में लक्षद्वीप से की जाएगी। यहां के पांच प्रमुख द्वीपों को आपस में जोड़ा जाएगा और साथ ही उन्हें भारत की मुख्य भूमि से भी कनेक्ट करने की योजना है। इससे वहां रहने वाले लोगों और पर्यटकों दोनों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इस सेवा के लिए 19 सीटों वाले छोटे विमान इस्तेमाल किए जाएंगे, जो कम दूरी के सफर के लिए उपयुक्त होते हैं। कंपनी का लक्ष्य है कि ऐसे इलाकों तक भी तेज और आसान यात्रा उपलब्ध कराई जाए, जहां पहुंचना अभी मुश्किल है।
क्या है सीप्लेन और कैसे करता है काम
सीप्लेन एक खास तरह का विमान होता है, जिसे जमीन के रनवे की जरूरत नहीं होती। यह पानी से ही उड़ान भरता है और पानी पर ही उतरता है। इसके नीचे फ्लोट या नाव जैसी संरचना होती है, जिससे यह झील, नदी या समुद्र की सतह पर आसानी से चल सकता है। यही वजह है कि ऐसे स्थानों पर, जहां एयरपोर्ट बनाना कठिन या महंगा होता है, वहां सीप्लेन एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आता है।

दूरदराज इलाकों को मिलेगा फायदा
भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पहुंचना आज भी चुनौती भरा है। छोटे द्वीप, तटीय इलाके, पहाड़ी क्षेत्र और झीलों के आसपास बसे स्थानों तक पहुंचने में काफी समय लगता है। कई बार लोगों को नाव या सड़क के जरिए लंबा सफर तय करना पड़ता है। सीप्लेन सेवा शुरू होने के बाद इन इलाकों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। यात्रा का समय कम होगा और लोगों को तेज व सुविधाजनक विकल्प मिलेगा। इससे स्थानीय लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
ये भी पढ़ें: राहुल गांधी को हाईकोर्ट से राहत : FIR की मांग वाली याचिका खारिज, ‘इंडियन स्टेट’ बयान पर विवाद
पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा
इस नई सेवा का सबसे बड़ा फायदा पर्यटन क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर लक्षद्वीप जैसे खूबसूरत द्वीपों के लिए यह सेवा काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यहां के समुद्र तट, साफ पानी और प्राकृतिक सुंदरता पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। जब यहां तक पहुंचना आसान होगा, तो पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
अन्य क्षेत्रों में भी हो सकता है विस्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी इसका विस्तार किया जा सकता है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, केरल के बैकवॉटर और उत्तर-पूर्व के जल क्षेत्र इसके लिए उपयुक्त माने जाते हैं। हर जगह सेवा शुरू करने से पहले पर्यावरण से जुड़ी मंजूरी, सुरक्षा मानकों और सरकारी नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
एक साल की मेहनत के बाद मिली मंजूरी
स्काईहॉप एविएशन पिछले करीब एक साल से इस मंजूरी के लिए प्रयास कर रही थी। कंपनी ने हाल ही में ऋषिकेश में सफल परीक्षण भी किया था, जिसमें सीप्लेन ने पानी से टेकऑफ और लैंडिंग दोनों सफलतापूर्वक किए थे।











