Heavy Rain : दार्जिलिंग में भारी बारिश के कारण बालासन नदी पर बना पुल टूटा, कई क्षेत्रों का संपर्क कटा

दार्जिलिंग। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बालासन नदी पर बना अस्थायी पुल ढह जाने से क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो गई है। तेज बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे नदी पर बनाया गया अस्थायी ढांचा बह गया। पुल गिरने के बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। घटना के बाद इलाके में रहने वाले लोगों और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सिलीगुड़ी और मिरिक के बीच आवागमन हुआ बाधित
पुल के क्षतिग्रस्त होने का सबसे अधिक असर सिलीगुड़ी और मिरिक सब-डिविजन के बीच आने-जाने वाले लोगों पर पड़ा है। यह मार्ग दोनों क्षेत्रों के बीच महत्वपूर्ण संपर्क का साधन माना जाता है। पुल टूटने के बाद यातायात पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए यातायात को दूसरे मार्गों पर डायवर्ट कर दिया है।
पुराना पुल के गिरने के बाद बनाई थी अस्थायी व्यवस्था
अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में दूधिया क्षेत्र का लोहे का पुल अचानक आई बाढ़ में बह गया था। इसके बाद लोगों की सुविधा के लिए अस्थायी रूप से ह्यूम पाइप आधारित पुल तैयार किया गया था। यह ढांचा स्थायी समाधान नहीं था, लेकिन आवागमन बहाल करने के लिए इसे बनाया गया था। हालांकि इस वर्ष मॉनसून की तीव्रता और नदी के बढ़ते जलस्तर के सामने यह अस्थायी व्यवस्था टिक नहीं सकी और पुल का एक हिस्सा ढह गया।
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वैकल्पिक मार्गों से भेजे जा रहे वाहन
पुल गिरने के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए यातायात को पंखाबाड़ी और कर्सियांग मार्गों की ओर मोड़ दिया है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक वैकल्पिक मार्गों का उपयोग जारी रहेगा। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक सेवाओं को बनाए रखने का प्रयास कर रहा है।
सांसद राजू बिस्टा ने सरकार पर साधा निशाना
घटना के बाद दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्टा ने मौके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इस समस्या के लिए राज्य की तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। बिस्टा ने कहा कि पुराने पुल के ढहने के बाद सरकार कोई मजबूत और स्थायी व्यवस्था नहीं कर पाई। उनके अनुसार, यदि समय रहते सेना या सीमा सड़क संगठन (BRO) की मदद से बेली ब्रिज बनाया जाता, तो क्षेत्र को बार-बार इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
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स्थायी समाधान के लिए चल रहा निर्माण कार्य
सांसद ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से क्षेत्र में एक स्थायी पुल के निर्माण की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए अप्रोच रोड और अन्य जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदी पर बांध निर्माण की भी योजना है। बांध परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर तकनीकी समीक्षा के लिए जाधवपुर विश्वविद्यालय भेजी जा चुकी है और मॉनसून समाप्त होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
स्थानीय लोगों की बढ़ी चिंता
इस बीच केंद्रीय जल आयोग ने भी चेतावनी दी है कि नदी में तेज बहाव और लगातार हो रहे कटाव के कारण निर्माणाधीन नए पुल पर भी खतरा बना हुआ है। राज्य सरकार पहले ही बालासन नदी पर दो-लेन के स्थायी पुल के लिए 51 करोड़ रुपए से अधिक की मंजूरी दे चुकी है और निर्माण कार्य जारी है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक आपातकालीन मरम्मत और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक रोजमर्रा की जिंदगी, व्यापार और जरूरी सामानों की आपूर्ति प्रभावित होती रहेगी। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा।
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