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NASA PROJECT:नासा ने बोइंग 777 को बना दिया उड़ती हुई लैब, 34 हजार किलो के उपकरणों से हो सकेगी रिसर्च

नया एयरक्राफ्ट 100 लोगों को एक साथ ले जा सकता है। इस पर 34 हजार किलो तक वैज्ञानिक उपकरण ले जाए जा सकते हैं और यह एक बार में 18 घंटे तक आसमान में रह सकता है।
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नासा ने बोइंग 777 को बना दिया उड़ती हुई लैब, 34 हजार किलो के उपकरणों से हो सकेगी रिसर्च
NASA Photo

न्यूयॉर्क। नासा एक बोइंग 777 प्लेन को उड़ती हुई लैब में बदल दिया है। यह विमान अपने पूरे बदलावों के साथ लैंग्ले रिसर्च सेंटर वर्जीनिया वापस पहुंच गया है। इस एयरक्राफ्ट को वाको, टेक्सास में महीनों रखा गया जहां इंजीनियरों ने इसमें बहुत सारे बदलाव और अपग्रेड किए।

पृथ्वी का अध्ययन ऊंचाइयों से करेंगे

इस प्लेन की वापसी नासा के एयरबोर्न साइंस प्रोग्राम को बल मिलेगा। प्लेन से पृथ्वी का ज्यादा ऊंचाई से अध्ययन करने की नासा की क्षमता में विस्तार होगा। इस प्लेन के आने के पहले से ही वैज्ञानिक नए मिशनों की योजना बना रहे हैं। इनमें मौसम के पैटर्न, जलवायु प्रणालियों और वायुमंडलीय व्यवहार के बारे में गहन जानकारी मिल सकती है।

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मेन बॉडी में किए बड़े बदलाव

प्लेन के मॉडिफिकेशन के दौरान इसमें बड़े-बड़े बदलाव किए गए। इसके फ्यूजलेज (प्लेन की मेन बॉडी) को और मजबूत किया गया। इसके अंदर नए रिसर्च उपकरण लगाए गए हैं, केबिन बनाए गए ताकि उड़ान के दौरान वैज्ञानिक इसमें बैठकर अध्ययन का काम कर सकें।

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प्लेन की विंडो बड़ी की गईं

इस प्लेन में हुए बदलावों में विंडो को बड़ा किया गया। प्लेन की मुख्य बॉडी में नीचे ओपनिंग दी गईं और कई तरह के सेंसर लगाए गए। इससे विमान उड़ती हुई लैब बन गया। आमतौर पर प्लेन की विंडो छोटी होती हैं लेकिन वैज्ञानिक अध्ययनों के लिए इन्हें बड़ा किया गया है।

पुराना प्लेन रिटायर हो चुका है

नासा के पास इससे पहसे डीसी-8 प्लेन था जो उसके रिसर्च मिशन के लिए काम आता था। लेकिन अब यह रिटायर हो चुका है। अब नया एयरक्राफ्ट 100 लोगों को एक साथ ले जा सकता है। इस पर 34 हजार किलो तक वैज्ञानिक उपकरण ले जाए जा सकते हैं और यह एक बार में 18 घंटे तक आसमान में रह सकता है। इन सब खूबियों के कारण प्लेन लंबे समय तक और ज्यादा इक्यूपमेंट्स के साथ वैज्ञानिकों को रिसर्च करने का मौका देता है।

अंदर हुए बडे बदलाव

विमान के अंदर वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए पूरे केबिन में बदलाव किए गए हैं। विमान के अंदर वायरिंग को पहले से बेहतर किया गया है। बदलावों के बाद विमान से जमीन पर मौजूद लोगों से संवाद करते समय विमान में लगे उपकरणों से त्वरित प्रतिक्रिया प्राप्त होती है। विमान को हवा में ही वैज्ञानिकों के काम के दौरान आवश्यक समायोजन करने में सक्षम गया है। 

अगले साल जनवरी में होगा पहला परीक्षण

रिपोर्टों के अनुसार, नासा का यह मिशन जनवरी 2027 में शुरू होगा। नर्चर नाम के इस मिशन का उद्देश्य भारी हिमपात, बर्फ जमना, तेज हवाएं और उबड़-खाबड़ समुद्र जैसी गंभीर मौसम प्रणालियों (वेदर सिस्टम्स) के अध्ययन के लिए समर्पित होगा। बोइंग 777 उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ग्रीनलैंड के साथ-साथ आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्रों से होकर उड़ान भरेगा।



Puneet Pandey
By Puneet Pandey
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