Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Aniruddh Singh
19 Jan 2026
Manisha Dhanwani
18 Jan 2026
जेनेवा। दुनिया के अरबपतियों की कुल संपत्ति एक बार फिर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। इसके साथ ही उनका आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव भी तेजी से बढ़ा है। अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन ऑक्सफैम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अरबपतियों की संपत्ति में जिस रफ्तार से इजाफा हुआ, वह हाल के सालों की तुलना में तीन गुना अधिक है। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं को और गहरा कर रही है, जो लोकतांत्रिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। ऑक्सफैम की यह रिपोर्ट ऐसे समय में जारी की गई है, जब स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक शुरू हो चुकी है।
रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक अरबपतियों की संपत्ति 16 प्रतिशत बढ़कर 18.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। इस राशि में 2020 के बाद से अब तक करीब 81 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब दुनिया की हर चार में से एक व्यक्ति को नियमित रूप से भरपेट भोजन भी नसीब नहीं हो पा रहा है और वैश्विक आबादी का लगभग आधा हिस्सा गरीबी में जीवन बिता रहा है। ऑक्सफैम का कहना है कि संपत्ति का यह असाधारण जमावड़ा केवल आर्थिक असमानता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ राजनीतिक शक्ति का भी खतरनाक केंद्रीकरण हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अरबपतियों के, आम नागरिकों की तुलना में करीब 4,000 गुना अधिक किसी राजनीतिक पद पहुंचने की संभावना होती है।
इस असमानता से नीतियां आम लोगों के बजाय अमीर वर्ग के हितों के अनुरूप बनने का खतरा बढ़ जाता है। रिपोर्ट में संपत्ति वृद्धि को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दूसरी सरकार की नीतियों से भी जोड़ा गया है। ऑक्सफैम के मुताबिक, टैक्स में कटौती, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय दबाव से राहत और एकाधिकारों पर निगरानी में ढील जैसे कदमों से अत्यधिक अमीर वर्ग को बड़ा फायदा मिला है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में आई जबरदस्त तेजी ने पहले से ही अमीर निवेशकों की संपत्ति में और इजाफा किया है। ऑक्सफैम के कार्यकारी निदेशक अमिताभ बेहर ने चेतावनी दी है कि अमीर और बाकी लोगों में अंतर बढ़ रहा है।
लगातार बढ़ रहा अंतर एक गंभीर राजनीतिक संकट को जन्म दे रहा है। संगठन ने सरकारों से मांग की है कि वे राष्ट्रीय स्तर पर असमानता कम करने की योजनाएं अपनाएं, अत्यधिक संपत्ति पर ज्यादा कर लगाएं और धन व राजनीति के बीच मजबूत दीवार खड़ी करें। इसमें लॉबिंग और चुनावी चंदे पर सख्त नियंत्रण जैसे कदम शामिल हैं। फिलहाल नॉर्वे जैसे कुछ ही देशों में संपत्ति कर लागू है, हालांकि ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसे देशों में इस पर बहस चल रही है। ऑक्सफैम के मुताबिक, पिछले साल अरबपतियों की संपत्ति में जो 2.5 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई, वह लगभग दुनिया के सबसे गरीब 4.1 अरब लोगों की कुल संपत्ति के बराबर है। यह आंकड़ा मौजूदा वैश्विक आर्थिक व्यवस्था की गहरी असमानता को साफ तौर पर उजागर करता है।