बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले से एक ऐसा दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया। रामनगर थाना क्षेत्र के जुलाहा टोली में दहेज के लोभियों ने विवाहिता खुशबू खातून को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। महिला करीब 90 प्रतिशत तक झुलस गई थीं और GMCH बेतिया में इलाज के दौरान उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। घटना से जुड़े लोगों का कहना है कि मरने से पहले खुशबू ने अपने परिवार को फोन कर जान बचाने की गुहार लगाई थी। परिजन अब आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
घटना रात के 1:30 बजे हुई, जब खुशबू की दर्दभरी चीखों की आवाज सुन स्थानीय लोग घरों से बाहर आए। उन्होंने तुरंत डायल 112 को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने पाया कि महिला पेट्रोल डालकर जली हुई थीं। पड़ोसियों के अनुसार, ससुराल पक्ष ने यह नृशंसता दहेज और असंतोष के चलते की।
यह भी पढ़ें: सगाई की खुशियां बनीं मातम: मामूली विवाद में लाठियां चलीं, 18 वर्षीय युवक की मौत
स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने खुशबू को रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। डॉक्टरों ने बताया कि महिला गंभीर रूप से झुलस गई थीं। स्थिति को देखते हुए उन्हें GMCH बेतिया रेफर कर दिया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
खुशबू की शादी रामनगर निवासी औरंगजेब से हुई थी। शादी के शुरुआती समय से ही दहेज और संतान न होने को लेकर दोनों परिवारों के बीच विवाद चला आ रहा था। शादी के दो वर्ष बाद भी संतान न होने के कारण खुशबू को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, ससुराल पक्ष ने महिला को अपने पास रखने के लिए टाटा पंच कार की मांग भी की थी। खुशबू ने पहले भी दहेज प्रताड़ना और मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद वह कुछ समय से अपने मायके में रह रही थीं।
खुशबू के परिजन घटना से आहत हैं और आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घटना और अधिक लोगों को भयभीत कर सकती है।
यह भी पढ़ें: इंदौर: मासूम के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान
एक स्थानीय ने कहा, यह सिर्फ खुशबू की मौत नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक चेतना पर हमला है। दहेज के लिए कोई भी इतना निर्दयी नहीं हो सकता।
पुलिस ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की कानूनी ढील नहीं बरती जाएगी।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है और राज्य सरकार से सख्त कदम उठाने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ गांवों में सामाजिक चेतना पैदा करना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी बर्बर घटनाओं को रोका जा सके।