संडे पॉजिटिव:भोपाल में बारिश के दौरान करंट से बचाव की बड़ी पहल, ट्रांसफॉर्मर और डीपी पर लगाए जा रहे वायर मेश

भोपाल में बारिश के दौरान करंट से होने वाले हादसों को रोकने के लिए बिजली कंपनी ने ट्रांसफॉर्मर और डीपी पर वायर मेश लगाने का अभियान शुरू किया है। शहर के 10 हजार से अधिक ट्रांसफॉर्मरों में संवेदनशील स्थानों को प्राथमिकता देकर सुरक्षा कवर लगाए जा रहे हैं।
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भोपाल में बारिश के दौरान करंट से बचाव की बड़ी पहल, ट्रांसफॉर्मर और डीपी पर लगाए जा रहे वायर मेश
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शाहिद खान, भोपाल। शहर में मानसून की शुरुआत के साथ ही बिजली से होने वाले हादसों को रोकने के लिए बिजली कंपनी ने बड़ा अभियान शुरू किया है। शहर में खुले ट्रांसफॉर्मर, डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट (डीपी) और फ्यूज बॉक्स बारिश के दौरान करंट लीकेज का बड़ा कारण बनते हैं। इन्हें सुरक्षित बनाने के लिए अब ट्रांसफॉर्मरों के आसपास लोहे की वायर मेश (जाली) और सुरक्षा बॉक्स लगाए जा रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य बारिश के मौसम में करंट फैलने से होने वाले हादसों को रोकना और लोगों के साथ-साथ मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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शहर में 10 हजार से ज्यादा ट्रांसफॉर्मर

बिजली कंपनी के अनुसार भोपाल में बिजली आपूर्ति के लिए 10 हजार से अधिक वितरण ट्रांसफॉर्मर (डीपी) लगाए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे ट्रांसफॉर्मरों की है जो सड़क किनारे, रिहायशी कॉलोनियों, बाजारों और घनी आबादी वाले इलाकों में स्थित हैं। विभागीय अधिकारियों ने ऐसे सैकड़ों ट्रांसफॉर्मरों की पहचान की है जहां फ्यूज बॉक्स खुले हैं या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित किया जा रहा है।

बारिश में बढ़ जाता है खतरा

बरसात के दौरान खुले फ्यूज बॉक्स में पानी पहुंचने से करंट लीकेज होने की आशंका बढ़ जाती है। इससे सड़क पर गुजरने वाले लोग, बच्चे और आवारा मवेशी करंट की चपेट में आ सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में शहर में कई बार मवेशियों की करंट लगने से मौत के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं कई कॉलोनियों से बच्चों के ट्रांसफॉर्मर के पास खेलने की शिकायतें भी लगातार मिलती रही हैं।

पहले चरण में संवेदनशील इलाकों पर फोकस

बिजली कंपनी ने उन सभी स्थानों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है जहां ट्रांसफॉर्मर खुले हैं या उन पर सुरक्षा कवर नहीं लगे हैं। पहले चरण में घनी आबादी, सार्वजनिक स्थानों और ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में लगे ट्रांसफॉर्मरों को वायर मेश और सुरक्षा बॉक्स से कवर किया जा रहा है।

खुले ट्रांसफॉर्मर और फ्यूज बॉक्स बने चिंता का कारण

बिजली कंपनी के अनुसार शहर के कई इलाकों में खुले ट्रांसफॉर्मर और फ्यूज बॉक्स सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय बने हुए हैं। इनमें शामिल हैं:

  • करोंद - मुख्य सड़क और सब्जी मंडी के आसपास कई खुले ट्रांसफॉर्मर।
  • अशोका गार्डन - घनी आबादी वाली कॉलोनियों में खंभों पर खुले बिजली पैनल।
  • शाहजहांनाबाद -  पुराने शहर में कई पुराने बिजली ढांचे सुरक्षा मानकों से बाहर।
  • बैरागढ़ - बाजार और रिहायशी क्षेत्रों में खुले डिस्ट्रीब्यूशन पॉइंट।
  • कोलार रोड - नई कॉलोनियों में अस्थायी बिजली कनेक्शन और खुले पैनल।
  • गोविंदपुरा - औद्योगिक और रिहायशी क्षेत्रों में पुराने ट्रांसफॉर्मरों की शिकायत।
  • अयोध्या नगर -  बच्चों की पहुंच वाले स्थानों पर खुले फ्यूज बॉक्स।
  • पिपलानी - फैक्ट्री और आवासीय क्षेत्र के बीच खुले विद्युत पैनल।
  • छोला रोड - सड़क किनारे बिना सुरक्षा कवर वाले ट्रांसफॉर्मर।
  • ऐशबाग - रेलवे क्षेत्र और घनी बस्तियों के पास पुराने बिजली ढांचे।
  • बाग मुगालिया - नई कॉलोनियों में खुले वितरण बॉक्स।
  • टीटी नगर - सार्वजनिक स्थलों के पास खुले क्षेत्र में लगे ट्रांसफॉर्मर।

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ऐसे दर्ज कराएं शिकायत

यदि आपके इलाके में ट्रांसफॉर्मर का फ्यूज बॉक्स खुला है, वायरिंग असुरक्षित है या बिजली से जुड़ा कोई खतरा दिखाई देता है, तो तुरंत बिजली कंपनी को सूचना दें।

हेल्पलाइन नंबर: 1912

व्हाट्सएप शिकायत: +91-755-2551222

क्यों जरूरी है यह अभियान?

बिजली कंपनी का मानना है कि यह अभियान कई कारणों से बेहद जरूरी है।

  • बारिश में करंट लीकेज का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • खुले फ्यूज बॉक्स की वजह से पहले भी मवेशियों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं।
  • कॉलोनियों में बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है।
  • सड़क किनारे लगे ट्रांसफॉर्मर आम लोगों की पहुंच में होने से हादसे की आशंका बनी रहती है।

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अधिकांश क्षेत्रों में पूरा हो चुका है काम

सिटी सर्किल के जीएम प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि शहरभर में ट्रांसफॉर्मर और डीपी के चारों ओर वायर मेश लगाकर उन्हें सुरक्षित करने का काम तेजी से किया जा रहा है। अधिकांश क्षेत्रों में यह कार्य पूरा भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस पहल से बारिश के दौरान डीपी और ट्रांसफॉर्मर से करंट लगने की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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