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Peoples Update Special :स्कूली बच्चे बन रहे 'कानून के दूत', नाटक के जरिए गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को कर रहे जागरूक

भोपाल की नवजीवन पथ फाउंडेशन ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) के सहयोग से अनूठी पहल शुरू की है, जिसमें स्कूली बच्चे 'कानून के दूत' बनकर नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से ग्रामीणों को साइबर अपराध, बाल अधिकार, पॉक्सो, बाल विवाह, बाल श्रम और महिलाओं से जुड़े कानूनों की जानकारी दे रहे हैं। इस अभियान से अब तक करीब 300 बच्चे जुड़ चुके हैं। 
स्कूली बच्चे बन रहे 'कानून के दूत', नाटक के जरिए गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को कर रहे जागरूक
भोपाल। इस तरह नाटकों से कानून संबंधी जागरुकता बढ़ाते हैं छात्र-छात्राएं।

पल्लवी वाघेला, भोपाल। ग्रामीण क्षेत्रों में कानून और अधिकारों की जानकारी अब केवल किताबों या सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रही। स्कूली बच्चे स्वयं 'कानून के दूत' बनकर गांव-गांव जाकर लोगों को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। भोपाल की नवजीवन पथ फाउंडेशन ने इसकी पहल की है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) के सहयोग से संस्था, स्कूली बच्चों को शामिल कर विभिन्न कानूनों पर आधारित नुक्कड़ नाटक तैयार करवा रही है।

शहरी स्लम क्षेत्रों के 300 बच्चे जुड़े 

इससे साइबर अपराध, बाल विवाह, बाल श्रम, हिंसा और बाल अधिकार जैसे विषयों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाई जा रही है। पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई इस पहल में अब तक ग्रामीण और शहरी स्लम क्षेत्रों के करीब 300 बच्चे जुड़ चुके हैं। ये बच्चे स्कूलों और गांवों में कार्यक्रमों की प्रस्तुति देकर अपने साथियों, अभिभावकों और ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं।

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ऐसे होती है तैयारी

फाउंडेशन की निदेशक एडवोकेट मीनाक्षी नारनवरे के नेतृत्व में संस्था द्वारा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में विधिक जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विद्यार्थियों को न्यायालय की कार्यप्रणाली, संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों तथा बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों से बचाव की जानकारी रोचक तरीके से दी जाती है। इसके लिए नाटक तैयार किए जाते हैं और इसमें कानूनों की जानकारी शामिल करते हैं।  संस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र द्विवेदी ने बताया कि नुक्कड़ नाटक को विधिक साक्षरता का प्रभावी माध्यम माना जाता है। डालसा सचिव न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल ने भी इस पहल को सपोर्ट किया। इसमें विधि विशेषज्ञ और फैमिली कोर्ट काउंसलर भी मदद कर रहे हैं। 

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नाटकों से ये जानकारी दे रहे

  •  पॉक्सो अधिनियम
  •  बाल अधिकार
  •  गुड टच-बैड टच
  •  साइबर अपराध
  •  सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग
  •  बुलिंग
  • बाल श्रम
  • बाल विवाह

समाज पर व्यापक और सकारात्मक प्रभाव

बच्चों को कानून की जानकारी देने का सबसे प्रभावी तरीका उन्हें सहभागी बनाना है। जब बच्चे स्वयं संदेशवाहक बनते हैं तो उसका प्रभाव समाज पर अधिक व्यापक और सकारात्मक पड़ता है। इसके साथ ही बच्चों में भी आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता तथा अन्याय के लिए आवाज उठाने का साहस आता है।

मीनाक्षी नारनवरे, निदेशक, नवजीवन पथ फाउंडेशन

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हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ा

मैं कुछ नुक्कड़ नाटक का हिस्सा रही हूं। मीनाक्षी मैम ने जब हमें लॉ के बारे में बताया, उसके बाद से अपने आसपास की चीजों को देखने का नजरिया बदल गया है। अब बेहतर समझ आता है कि गलत क्या? है और सही क्या? साथ ही आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

अनन्या प्रजापति, स्टूडेंट

जरूरी है जानकारी

हमारे यहां बच्चों ने आकर तीन अलग-अलग नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बच्चों से जुड़े अधिकार, महिलाओं के लिए कानून और साइबर ठगी से बचने के तरीके और कानूनी सहायता कैसे लें, इसकी भी जानकारी दी। नाटक देखने के बाद महसूस हुआ कि हमें बहुत सी बातों की केवल ऊपरी जानकारी थी।

रघुवीर प्रसाद सिंगरोले, ग्राम परवलिया

हम सचेत हुए हैं

हमारे यहां बच्चों ने नाटक में दिखाया गया कि कैसे अनजान कॉल, ओटीपी शेयर करने और सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल से लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। बच्चों की इस प्रस्तुति ने हमें भावुक और सचेत दोनों किया है । अब इन बातों का विशेष ध्यान रख रहे हैं।

सीमा कुमारी, ग्राम चंदूखेड़ी

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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