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भोपाल में NSG की दमदार मॉक ड्रिल :'आतंकियों' को किया ढेर, बंधकों को सुरक्षित निकाला, हाई अलर्ट पर शहर

भोपाल में NSG ने हाई-इंटेंसिटी मॉक ड्रिल कर आतंकी हमले जैसी स्थिति में ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। रानी कमलापति स्टेशन के पास बिल्डिंग में घुसे 'आतंकियों' को ढेर कर बंधकों को सुरक्षित निकाला गया। एक महीने की ट्रेनिंग के बाद हुई इस एक्सरसाइज में पुलिस, बम स्क्वॉड और फायर टीम भी शामिल रही। 
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'आतंकियों' को किया ढेर, बंधकों को सुरक्षित निकाला, हाई अलर्ट पर शहर

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों का एक बड़ा और प्रभावशाली नजारा देखने को मिला। शहर के व्यस्त इलाके में अचानक ही हलचल बढ़ गई, सायरन गूंजे और भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हो गए। दरअसल, यह कोई असली खतरा नहीं था बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड द्वारा की गई हाई- इंटेंसिटी मॉक ड्रिल थी, जिसमें आतंकवादी हमले जैसी स्थिति को बिल्कुल असली मान कर दिखाया गया।

बिल्डिंग में घुसे 'आतंकी', कमांडो ने संभाला मोर्चा

मॉक ड्रिल का मुख्य सीन रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के पास स्थित बंसल वन बिल्डिंग में तैयार किया गया। परिकल्पना के मुताबिक, कुछ आतंकी बिल्डिंग में घुस गए थे और अंदर लोगों को बंधक बना लिया था। जैसे ही सूचना मिली, एनएसजी कमांडो ने तेजी से मोर्चा संभाला। कमांडो ने बिल्डिंग को चारों ओर से घेर लिया और सोची-समझी रणनीति के साथ अंदर घुसे फिर एक-एक कर आतंकियों को काबू कर लिया। इसके साथ ही अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

बम स्क्वॉड से लेकर फायर ब्रिगेड तक, सब अलर्ट मोड में

इस मॉक ड्रिल को सिर्फ एनएसजी तक सीमित नहीं रखा गया। इसमें कई अन्य एजेंसियों को भी शामिल किया गया, ताकि रियल टाइम कोऑर्डिनेशन की जांच हो सके। मौके पर मध्यप्रदेश पुलिस की बम डिस्पोजल एंड डिटेक्शन स्क्वॉड (BDDS) टीम भी तैनात रही। इसके अलावा फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया। पूरा इलाका सुरक्षा घेरे में लिया गया और आम लोगों की आवाजाही को सीमित कर दिया गया, ताकि ऑपरेशन बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके।

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एक महीने की ट्रेनिंग का फाइनल टेस्ट

इस मॉक ड्रिल के पीछे सिर्फ एक दिन की तैयारी नहीं, बल्कि पूरे एक महीने की गहन ट्रेनिंग रही है। एनएसजी के ग्रुप कमांडर कर्नल अभिषेक सिंह ने बताया कि पिछले एक महीने से हमारी टीम राज्य पुलिस की काउंटर टेररिस्ट यूनिट्स के साथ संयुक्त प्रशिक्षण कर रही है। इसमें बिल्डिंग इंटरवेंशन, बम निष्क्रिय करना, टैक्टिकल ड्राइविंग और वीआईपी सुरक्षा जैसे अहम पहलुओं को शामिल किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल ट्रेनिंग का अंतिम चरण होती है, जिसमें सभी सीखी गई तकनीकों और टीम के तालमेल की परीक्षा होती है।

बिना जानकारी के कराया गया अभ्यास

इस एक्सरसाइज को और ज्यादा चुनौतीपूर्ण बनाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने दो संभावित टारगेट तय किए थे। पहला टारगेट बंसल वन टावर था। वहीं दूसरा टारगेट राजा भोज एयरपोर्ट को रखा गया। दिलचस्प बात यह रही कि टीमों को पहले से यह नहीं बताया गया कि असली टारगेट कौन सा होगा। इससे उनकी प्रतिक्रिया क्षमता और वास्तविक हालात में निर्णय लेने की क्षमता का सही आकलन किया जा सका।

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क्यों जरूरी होती हैं ऐसी मॉक ड्रिल

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इस तरह की मॉक ड्रिल का मकसद सिर्फ अभ्यास करना नहीं होता, बल्कि आपात स्थिति में रिस्पांस टाइम को कम करना और एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर बनाना होता है। जब अलग-अलग टीमें-जैसे एनएसजी, पुलिस, बम स्क्वॉड और फायर ब्रिगेड एक साथ काम करती हैं, तो उनके बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है। ऐसी ड्रिल्स के जरिए यही सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी असली खतरे की स्थिति में कोई चूक न हो और आम नागरिकों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सके।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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