Peoples Update Special :मेट्रोपॉलिटन एरिया सर्वे: चौड़ी सड़कों और विकास क्षमता के आधार पर तय होगा शहरों का विस्तार, 40 विभागों से जुटाया जा रहा डेटा

अशोक गौतम, भोपाल। भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन की सीमाएं तय होने के बाद अब इन क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में बड़ा सर्वेक्षण अभियान शुरू हो गया है। राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां 40 विभागों से डेटा एकत्र कर रही हैं, जिसके आधार पर मेट्रोपॉलिटन एरिया का विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस सर्वे में उद्योग, व्यवसाय, कृषि, जल संसाधन, परिवहन, जनसंख्या और भविष्य की विकास संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। प्रारंभिक सर्वे में यह बात सामने आई है कि जिन क्षेत्रों से प्रमुख और चौड़ी सड़कें गुजर रही हैं, वहां शहरी विस्तार अपेक्षाकृत अधिक तेज़ी से हो रहा है। इसी आधार पर भविष्य के विकास क्षेत्रों, क्लस्टरों और जोनों का निर्धारण किया जाएगा।
एक साल में तैयार हो सकता है जोनिंग का खाका
मेट्रोपॉलिटन एरिया के भीतर विभिन्न गतिविधियों के अनुसार जोन निर्धारित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक वर्ष का समय लग सकता है। सर्वे रिपोर्ट और विभिन्न विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर क्षेत्रवार विकास की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।
सड़क नेटवर्क और ट्रैफिक पर विशेष फोकस
सर्वे के दौरान वर्तमान और भविष्य के यातायात दबाव का भी आकलन किया जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि मौजूदा वाहनों की संख्या और आने वाले वर्षों की जरूरतों को देखते हुए कितनी नई सड़कों की आवश्यकता होगी। जहां सड़क चौड़ीकरण की संभावना सीमित है, वहां फ्लाईओवर और वैकल्पिक यातायात मार्ग विकसित करने की योजना बनाई जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क ही किसी भी शहर के संतुलित विस्तार की आधारशिला होता है।
3 प्रमुख सेक्टर में होगा विकास का विभाजन
मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र को गतिविधियों और जरूरतों के आधार पर तीन प्रमुख सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा-
- प्राइमरी सेक्टर
- कृषि आधारित गतिविधियां
- बागवानी और कृषि प्रसंस्करण
- सेकेंडरी सेक्टर
- औद्योगिक इकाइयां
- व्यापारिक और व्यावसायिक गतिविधियां
- टर्शियरी सेक्टर
- आईटी और टेक्नोलॉजी पार्क
- शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट केंद्र
- सेवा क्षेत्र आधारित संस्थान
इन आंकड़ों का किया जा रहा है विश्लेषण
मास्टर प्लान तैयार करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं-
- क्षेत्र की जनसंख्या और जनसंख्या घनत्व
- प्रवास और आबादी के स्थानांतरण का रुझान
- आयु वर्ग और सामाजिक संरचना
- आय के स्रोत और रोजगार के अवसर
- व्यापारिक एवं आर्थिक गलियारे
- मुख्य शहर में रोजाना आने-जाने वाले लोगों का प्रतिशत
- कुल भौगोलिक क्षेत्रफल और प्रशासनिक सीमाएं
- कृषि भूमि, आवासीय क्षेत्र और भविष्य की टाउनशिप के लिए उपलब्ध भूमि
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28 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में बनेगा संयुक्त विकास मॉडल
भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया का कुल क्षेत्रफल लगभग 28 हजार वर्ग किलोमीटर है। इस विशाल क्षेत्र के लिए सड़क, सीवेज, पेयजल, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का संयुक्त मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल प्रदेश में संतुलित शहरीकरण और क्षेत्रीय विकास की नई दिशा तय कर सकता है। इससे आसपास के कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
विशेषज्ञों की राय
बीपी पटेल, सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर का कहना है कि शहरों के विस्तार और व्यवस्थित विकास के लिए चौड़ी और सुव्यवस्थित सड़कें बेहद जरूरी हैं। सड़क डिजाइन और चौड़ीकरण की योजना वाहनों की संख्या को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। उनके अनुसार वर्तमान परिस्थितियों में बड़े शहरों को कई लंबे फ्लाईओवर की आवश्यकता है। वहीं मनोज मीक, अध्यक्ष, क्रेडाई भोपाल का मानना है कि मेट्रोपॉलिटन एरिया का उद्देश्य केवल शहरों का विस्तार नहीं, बल्कि उद्योग और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना भी होना चाहिए। उनका कहना है कि जहां उद्योग और आर्थिक गतिविधियां विकसित होती हैं वहां स्वतः नए शहर और आवासीय क्षेत्र विकसित होने लगते हैं। पीथमपुर और सिंगरौली इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
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विकास की नई दिशा तय करेगा सर्वे
मेट्रोपॉलिटन एरिया का यह सर्वे केवल सीमाओं के निर्धारण तक सीमित नहीं है बल्कि आने वाले दशकों की शहरी जरूरतों, आर्थिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे की मांग को ध्यान में रखकर भविष्य का रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके आधार पर भोपाल और इंदौर क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास को गति मिलने की उम्मीद है।












