भोपाल : 40 साल बाद हटा 337 टन जहरीला कचरा, डिस्पोजल के लिए पीथमपुर पहुंचा, 250 Km का ग्रीन कॉरिडोर बनाया

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भोपाल : 40 साल बाद हटा 337 टन जहरीला कचरा, डिस्पोजल के लिए पीथमपुर पहुंचा, 250 Km का ग्रीन कॉरिडोर बनाया
भोपाल/पीथमपुर। अंतत... 40 साल बाद शहर के मस्तक पर लगा काला दाग मिट गया। साल का पहला सूरज यूनियन कार्बाइड की जमीन में दफन जहरीले कचरे की कहानी के अंत को लेकर उदय हुआ और रात होते-होते इन अनचाहे श्राप से मुक्ति मिल गई। बुधवार रात 9:05 बजे 337 मीट्रिक टन कचरे को 12 विशेष कंटेनरों के साथ पीथमपुर स्थित रामकी एनवायरनमेंट इंजीनियरिंग लि. भेज दिया गया। 250 किमी का सफर 8 घंटे में तय कर सुबह 5 बजे सभी कंटेनर पीथमपुर के आशापुरा गांव स्थित रामकी एनवायरो फैक्ट्री पहुंचे। वहां इस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से जलाया जाएगा। https://www.youtube.com/watch?v=ZnBr2NPC9Vs

एक कंटेनर में भरा गया 30 टन कचरा

कचरा अपलोड करने का काम बुधवार शाम तक पूरा हो गया था, लेकिन पीथमपुर में हो रहे विरोध प्रदर्शन के चलते पुलिस से अनुमति मिलने में देर हुई। एक कंटेनर में 30 टन कचरा भरा गया है। इसमें 200 से ज्यादा मजदूर लगे, जिन्होंने 30 मिनट की शिफ्ट में काम किया। पूरी प्रॉसेस में 700 से ज्यादा कर्मचारी- अधिकारी शामिल रहे। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 6 जनवरी तक इसे हटाने के निर्देश दिए थे। 3 जनवरी को सरकार को हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश करना है। इसलिए हर हाल में कचरा पीथमपुर भेजना ही था। रामकी कंपनी इसका निष्पादन करेगी। कचरे को ले जाने के दौरान करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात रहे।

यह कचरा भेजा गया

मिट्टी: कचरा इकट्ठा कर परिसर की मिट्टी को भी इकट्ठा किया गया। रिएक्टर अवशेष: कंपनी में बनने वाले कीटनाशक के लिए एक रिएक्टर था। इसमें बचे केमिकल को भी एकत्रित किया गया है। सीवन: यहां सीवन नाम का कीटनाशक बनता था। यह भी कचरे में मौजूद था। नेफ्थॉल अवशेष: जिस एमआईसी गैस के प्लांट से रिसाव हुआ था, वह नेफ्थॉल से बनाई जाती थी। परिसर में बड़ी मात्रा में यह नेफ्थॉल भी था। बचा केमिकल: कीटनाशक बनाने की प्रक्रिया रुकने में बचा हुआ केमिकल। खास पैंकिंग: कचरे को खास जंबो बैग में पैक किया गया है। ये एचडीपीई नॉन रिएक्टिव लाइनर के बने हैं। इनमें मटेरियल में कई रिएक्शन नहीं हो सकता। सिर्फ बैग में कचरा भरने के लिए 50 से अधिक लेबर लगे हैं। ये सभी पीपीई किट पहने थे।

सील किया था कैंपस

  • फैक्ट्री कैंपस के 200 मीटर के दायरे को सील किया गया।
  • कचरे को ले जाने के दौरान करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात रहे।
  • चार जिलों के 500 पुलिसकर्मी तैनात रहे सुरक्षा के लिए।
  • हाईकोर्ट ने 6 जनवरी तक इसे हटाने के निर्देश दिए थे।

1 किमी का ट्रैफिक रोका

बुधवार रात जब कचरे से लदे ट्रकों का काफिला निकला तो डीआईजी बंगला चौराहे से गणेश मंदिर तक का करीब एक किमी के क्षेत्र में ट्रैफिक रोक दिया गया।

यहां बनाया गया ग्रीन कॉरिडोर

रात 9:05 बजे यूनियन कार्बाइड से कचरा बाहर निकला। अयोध्या बायपास डी-मार्ट, करोंद चौराहा, न्यू जेल रोड, एयरपोर्ट रोड, मुबारकपुर बायपास चौराहा, भौंरी रोड, मुबारकपुर जोड़, खजूरी, सीहोर नाका, इंदौर हाइवे से पीथमपुर। ये भी पढ़ें- भोपाल : जिस जहर ने छीनी जिंदगी, उसके कचरे से निजात पाने में लग गए 40 साल, 12 कंटेनर में रवाना हुआ जहरीला कचरा
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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