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भक्ति के साथ प्रकृति की सेवा! राजीव गांधी कॉलोनी में जीरो वेस्ट भंडारा, 3 डस्टबिन से हुआ कचरा प्रबंधन

भोपाल के जोन 15, वार्ड 64 स्थित राजीव गांधी कॉलोनी, आनंद नगर बायपास रोड में युवोदय संस्कृति श्री गणेश उत्सव समिति की ओर से सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करते हुए जीरो वेस्ट भंडारे का आयोजन किया गया। इस आयोजन में भोपाल महापौर मालती राय भी शामिल हुईं। उन्होंने श्रद्धालुओं को भोजन परोसा और खुद भी प्रसाद ग्रहण किया।
भक्ति के साथ प्रकृति की सेवा! राजीव गांधी कॉलोनी में जीरो वेस्ट भंडारा, 3 डस्टबिन से हुआ कचरा प्रबंधन
भोपाल के जोन 15, वार्ड 64 स्थित राजीव गांधी कॉलोनी, आनंद नगर बायपास रोड में युवोदय संस्कृति श्री गणेश उत्सव समिति की ओर से सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार किया गया।

भोपाल। गणेश उत्सव में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देखने को मिला। जोन 15, वार्ड 64 के अंतर्गत राजीव गांधी कॉलोनी, आनंद नगर बायपास रोड में युवोदय संस्कृति श्री गणेश उत्सव समिति की ओर से सिंगल यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करते हुए जीरो वेस्ट भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ प्रसाद वितरण नहीं हुआ, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। आयोजन में भोपाल महापौर मालती राय भी शामिल हुईं। उन्होंने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया और श्रद्धालुओं को खाना भी परोसा। इस दौरान उन्होंने जीरो वेस्ट भंडारे की पहल की सराहना करते हुए लोगों से ऐसे आयोजनों में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने और साफ-सफाई बनाए रखने की अपील की।

भंडारा सिर्फ भोजन नहीं, सेवा और जिम्मेदारी का संदेश

आयोजन समिति की ओर से लोगों को बताया गया कि भंडारा केवल पेट भरने का नाम नहीं है, बल्कि यह सेवा और पुण्य बांटने का अवसर भी है। लेकिन इस सेवा के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी जुड़ी है। समिति ने इसी सोच के साथ इस बार ‘जीरो वेस्ट भंडारा’ आयोजित करने का संकल्प लिया। इसका उद्देश्य था कि भंडारे के बाद बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य ऐसा कचरा न निकले, जिससे पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ पड़े। समिति की ओर से लोगों से अपील की गई कि धार्मिक आयोजनों को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की शुरुआत अपने स्तर से करनी चाहिए।

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प्लास्टिक की जगह पत्तल और मिट्टी के कुल्हड़

जीरो वेस्ट भंडारे के लिए प्लास्टिक और थर्माकोल की प्लेट और गिलास का इस्तेमाल नहीं किया गया। इनकी जगह पत्तल, केले के पत्ते और मिट्टी के कुल्हड़ का उपयोग किया गया। आयोजन समिति ने बताया कि प्राकृतिक और आसानी से नष्ट होने वाली चीजों के इस्तेमाल से सिंगल यूज प्लास्टिक को कम करने में मदद मिलती है। लोगों को भी इस पहल के जरिए यह समझाने की कोशिश की गई कि छोटे-छोटे बदलाव करके धार्मिक आयोजनों को ज्यादा पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है।

3 डस्टबिन से कचरे की अलग-अलग व्यवस्था

भंडारे में कचरा प्रबंधन के लिए तीन अलग-अलग डस्टबिन लगाए गए। इनमें एक डस्टबिन खाने की जूठन के लिए, दूसरा इस्तेमाल की गई पत्तलों के लिए और तीसरा मिट्टी के कुल्हड़ों के लिए रखा गया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद लोगों से अपील की गई कि वे अपना इस्तेमाल किया हुआ पात्र इधर-उधर न फेंकें और निर्धारित डस्टबिन में ही डालें। समिति की ओर से कहा गया कि सफाई भी एक सेवा है। जिस तरह लोग मंदिर और भगवान के स्थान को साफ रखना चाहते हैं, उसी तरह धार्मिक आयोजनों के बाद आसपास की जगह को स्वच्छ रखना भी सभी की जिम्मेदारी है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...

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