सीहोर में किसानों का विद्युत मंडल पर हल्लाबोल, अधिकारियों के घमंड का 10 सिरों वाला रावण जलाया

सीहोर। बिजली व्यवस्था में कथित लापरवाही और शिकायतों के बावजूद समस्याओं का निराकरण नहीं होने से नाराज किसानों का आक्रोश अब सड़कों पर खुलकर सामने आने लगा है। सीहोर जिले के 25 गांवों के किसानों ने किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में विद्युत मंडल अधिकारियों के कथित घमंड के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने 10 सिरों वाला रावण बनाकर उसका दहन किया। रावण के प्रत्येक सिर पर किसानों की एक प्रमुख मांग और विद्युत व्यवस्था से जुड़े सवाल लिखे गए। ढोल-नगाड़ों और हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि उनकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खेतों में झूलते बिजली के तारों पर उठाए गंभीर सवाल
किसानों की सबसे प्रमुख मांग ग्राम बरबेली निवासी किसान सतीश मेवाड़ा को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की है। किसानों के अनुसार, खेतों में झूलते 11 केवी और एलटी बिजली के तारों से करंट लगने के कारण सतीश मेवाड़ा गंभीर रूप से घायल हो गए। किसानों का आरोप है कि बिजली के खतरनाक तारों और खंभों की समस्या को लेकर समय रहते शिकायतें की गई थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कथित तौर पर गंभीरता नहीं दिखाई। किसानों ने इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कठोर कार्रवाई करने की मांग उठाई।
करंट से महिला की मौत का मामला भी उठाया
किसानों ने ग्राम मोरिया की किसान महिला सुकनबाई मेवाड़ा की करंट लगने से हुई मौत का मामला भी प्रमुखता से उठाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिजली व्यवस्था में लापरवाही के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। किसानों ने सवाल उठाया कि आखिर खेतों में झूलते बिजली के तारों और खतरनाक विद्युत व्यवस्था को लेकर शिकायतों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं होती और हादसों के बाद पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकने को क्यों मजबूर होते हैं।
चार माह से आंदोलन, कई स्तरों पर दे चुके ज्ञापन
एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में किसान पिछले चार माह से सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में आंदोलन कर रहे हैं। किसानों के मुताबिक, वे मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, प्रभारी मंत्री, मानव अधिकार आयोग, महिला आयोग, पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन तक अपनी मांगें पहुंचा चुके हैं। ज्ञापन सौंपने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए किसानों ने इस बार रावण दहन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया। दस सिरों पर लिखी मांगों के जरिए उन्होंने बिजली व्यवस्था की समस्याओं और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया।
एफआईआर और न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि केवल आश्वासन देकर आंदोलन को समाप्त नहीं कराया जा सकता। उनकी मांग है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो, मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिले। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को भोपाल तक ले जाया जाएगा। प्रदर्शन में प्रहलाद सिंह मेवाड़ा, लक्ष्मण सिंह मेवाड़ा सहित अनेक लोग मौजूद रहे। किसानों के इस विरोध प्रदर्शन ने विद्युत व्यवस्था की जवाबदेही और कथित लापरवाही पर कार्रवाई का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।




















