भोपाल का दिल कहे जाने वाले बड़े तालाब के किनारे अब सख्ती का दौर शुरू हो गया है। जिला प्रशासन ने 6 अप्रैल से अतिक्रमण हटाने का बड़ा अभियान शुरू किया है, जो 21 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान तालाब के आसपास चिन्हित किए गए 347 अवैध निर्माणों को हटाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि झील के आसपास किसी भी तरह की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं होगी।
अभियान के पहले ही दिन भदभदा इलाके में बुलडोजर की कार्रवाई देखने को मिली। यहां प्रशासन की टीम ने 9 दुकानों को हटाया। सुबह से ही इलाके में हलचल तेज रही और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

हालांकि, स्थानीय दुकानदारों और कुछ लोगों ने इस कार्रवाई का विरोध भी किया। उनका कहना था कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया कि यह कदम पूरी तरह नियमों के तहत उठाया गया है और किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
प्रशासन के अनुसार, बड़े तालाब के फुल टैंक लेवल (FTL) से 50 मीटर के दायरे में बने सभी निर्माण अवैध माने जाएंगे। यह नियम 16 मार्च 2022 को लागू हुए भोज वेटलैंड रूल्स के तहत तय किया गया है। इसके बाद भी जिन लोगों ने इस क्षेत्र में निर्माण किया, उनके खिलाफ अब कार्रवाई की जा रही है।
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पिछले करीब दो महीनों से प्रशासन लगातार सर्वे कर रहा था। इस दौरान तालाब के किनारे बसे कई इलाकों में अतिक्रमण चिन्हित किए गए। इनमें गौरा गांव, बिसनखेड़ी, बैरागढ़ और बहेटा जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कब्जे सामने आए।
एसडीएम अर्चना शर्मा की ओर से अतिक्रमण करने वालों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे। कई लोगों ने नोटिस मिलने के बाद खुद ही अपने निर्माण हटाने शुरू कर दिए थे, लेकिन कुछ लोग अब भी पीछे नहीं हटे। ऐसे में प्रशासन को सख्ती दिखानी पड़ी।
कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस बल को अलर्ट मोड पर रखा गया। प्रशासन का कहना है कि आगे भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई जारी रहेगी।
बड़ा तालाब सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि भोपाल की पहचान है। इसका निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा भोज ने कराया था। यह देश की सबसे पुरानी मानव निर्मित झीलों में से एक है और शहर के पीने के पानी का मुख्य स्रोत भी है।
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साल 2002 में इस झील को ‘रामसर साइट’ का दर्जा मिला, जो इसकी पर्यावरणीय महत्ता को दर्शाता है। यहां का बोट क्लब, सुंदर नजारे और वॉटर स्पोर्ट्स हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह अभियान अब रुकेगा नहीं। अगले 15 दिनों में सभी 347 अतिक्रमण हटाए जाएंगे। नियमों के खिलाफ बने हर निर्माण पर बुलडोजर चलेगा।
अब देखना होगा कि इस सख्ती के बाद भोपाल का यह ऐतिहासिक तालाब कितनी हद तक अतिक्रमण से मुक्त हो पाता है।