नई दिल्ली। मप्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने बुधवार को राज्यसभा में एक तरह से अपना विदाई भाषण दिया। सिंह का कार्यकाल अप्रैल में खत्म होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मैं उस लोकसभा में भी रहा, जिसमें अटलजी, राजीवजी और चंद्रशेखर हुआ करते थे। सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की कविता की वह लाइन भी पढ़ी कि-अभी भी न टायर्ड हूं न रिटायर्ड हूं। खास बात यह रही है कि उन्होंने कहा कि अगर किसी को उनके भाषण से किसी को कटुता आई हो तो उसके लिए वह क्षमाप्रार्थी है।
राज्यसभा में भाषण के दौरान दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनका राजनीति से कोई नाता नहीं था। उन्होंने बताया, लोगों को जानकर आश्चर्य होगा कि छात्र जीवन में राजनीति से मेरा कोई संपर्क नहीं था। लेकिन, परिस्थिति बस 22 साल की उम्र में निर्विरोध नगर पालिका अध्यक्ष बन गया। 30 साल की उम्र में विधायक बन गया और 33 साल की उम्र में राज्य सरकार में मंत्री बन गया। फिर कांग्रेस पार्टी से सांसद बन गया और फिर 40 साल में मुख्यमंत्री बन गया था, लेकिन अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी विचारधारा से समझौता नहीं किया।
उन्होंने कहा कि मैंने अपने अपने राजनीतिक जीवन में किसी के खिलाफ कटुता नहीं पाली। अगर मेरी भाषण में कटुता आई हो तो उसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूं। मेरे संबंध उन लोगों से भी बहुत अच्छे रहे हैं, जिनकी विचारधारा सेवा में न सहमत था ना सहमत हूं। मैं चाहे राज्यसभा में रहा हूं, लोकसभा में रहा हूं या फिर मध्य प्रदेश विधानसभा में रहा हूं। लेकिन, मैंने कभी किसी से कटुता नहीं पाली।
दिग्विजय सिंह का राज्यसभा में दूसरा कार्यकाल अप्रैल में पूरा हो रहा है। हालांकि उन्होंने तीसरी बार राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि पार्टी किसी दूसरे चेहरे को मौका देगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिग्विजय सिंह फिर से मध्यप्रदेश की राजनीति में एक्टिव होने जा रहे हैं। वहीं राज्यसभा से विदाई भाषण में भी उन्होंने एक तरह से अहम संकेत दिए हैं। जिस तरह से उन्होंने कहा कि न टायर्ड हूं न रिटायर्ड हूं, उस हिसाब से दिग्विजय सिंह राजनीति में पूरी तरह से एक्टिव रहने वाले हैं, इतना तय हो गया है।