MP News :18 साल बाद भी भिंड जेल अधूरी, लागत 9 से बढ़कर 33 करोड़ रुपए हुई

विजय एस.गौर, भोपाल। मध्यप्रदेश में जेलों के ओवर क्राउड होने के बाद भी नई जेलों के निर्माण का आलम यह है कि भिंड जिला जेल वर्ष 2007-08 से बन रही है, लेकिन 18 साल बाद भी नहीं बन सकी है। इस बीच पांच बार प्लान रिवाइज्ड होने के नतीजे में लागत 9 करोड़ से बढ़कर 33 करोड़ रुपए हो चुकी है। यही हाल इंदौर सेंट्रल जेल सहित बुरहानपुर और छिंदवाड़ा जेल का है, जिनकी निर्माण अवधि बीत चुकी है। वहीं जेलों की क्षमता वृद्धि के लिए 122 बैरकों का निर्माण होना था, जिनमें से 25 प्रतिशत पूर्णता के बाद भी जेल विभाग को हैंडओवर नहीं हो सकी हैं। वह भी तब, जब जेल विभाग 140 करोड़ रुपए पीडब्ल्यूडी को एडवांस में दे चुका है। दूसरी ओर, मप्र में जेलों की क्षमता 31 हजार है, जिनमें 43 हजार से ज्यादा कैदी ठूंसे गए हैं।

निर्माणाधीन भिंड जेल का एरियल व्यू
140 करोड़ एडवांस पैंमेंट के बाद भी हेंडओवर नहीं
इसको लेकर मंत्रालय में हुई समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव जेल मुकेशचंद्र गुप्ता ने निर्धारित समय से कई गुना समय बीतने पर भी भिंड जिला जेल सहित बैरकों के निर्माण में देरी पर प्रमुख अभियंता (भवन) शालिगराम बघेल की जमकर क्लास ले ली। बताया गया कि फाइनल पेमेंट नहीं हुआ है, तो जेल अधिकारियों ने बताया कि 140 करोड़ से ज्यादा का पेमेंट एडवांस पीडब्ल्यूडी को किया जा चुका है। इस पर पीएस गुप्ता ने ईएनसी बघेल से दो टूक कहा कि पार्ट नहीं फाइनल पेमेंट करें और दिसंबर तक बैरक हैंडओवर हो जानी चाहिए।

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नई बैरकों का निर्माण जारी
जेलों की क्षमता वृद्धि के लिए 122 नई बैरकों का निर्माण होना है, जिसमें से 12 बैरक बन कर तैयार हैं। वहीं 32 बैरकों का निर्माण अंतिम चरण में है। नई बैरकों की क्षमता 20 कैदियों की है, जिनमें एक बैरक में 5 टायलेट और 5 वॉशरुम होते हैं। मंदसौर और रतलाम में नई जेलें बनेंगी। इनके लिए भूमि आंवटन हो चुका है।
नई बैरकों का काम 80 प्रतिशत पूर्ण
नई जेलों का निर्माण हो रहा है। जेलों की क्षमतावृद्धि के लिए 122 नई बैरकों का निर्माण भी जेलों में हो रहा है, जोकि करीब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी हैं। बाकी का निर्माण भी तेजी से जारी है।
डॉ. वरुण कपूर, महानिदेशक, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं












