खबरों के साथ जिम्मेदारी भी...पीपुल्स समाचार की सजगता और पुलिस की तत्परता से बची वृद्धा की जान

पल्लवी वाघेला, भोपाल। पत्रकारिता केवल खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं होती, यह सामाजिक सरोकार और जिम्मेदारी का मिश्रण भी है। पीपुल्स समाचार द्वारा सामाजिक जिम्मेदारी की यही सजगता एक वृद्धा की जान बचाने का जरिया बन गई। दरअसल, बुजुर्ग महिला अकेलेपन के चलते अवसाद से जूझ रही थी और ऐसे में उसने पीपुल्स समाचार को पढ़ते हुए उसमें मौजूद रिपोर्टर के नंबर पर कॉल कर मदद मांगी। पीपुल्स समाचार के रिपोर्टर सतीश उपाध्याय और पल्लवी वाघेला ने तुरंत महिला के बारे में पुलिस को सूचित किया। इसके चलते समय रहते महिला की जान बचाई जा सकी। बता दें, बुजुर्ग महिला ने अपने गले को काटने का प्रयास किया था, लेकिन कट गहरा नहीं था और उन्हें तुरंत उपचार मिलने से खतरा टल गया।
लगातार संपर्क में रही रिपोर्टर
जब बच्चों के लिए पूरी जिंदगी लगाने वाली मां अपने दोनों बेटों को खो दे, उम्र के आखिरी पड़ाव पर घर की खामोशी ही उसका सबसे बड़ा साथी बन जाए और हर दिन किसी पहाड़ की तरह बीतने लगे, तब जिंदगी का बोझ कई बार असहनीय हो जाता है। बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने स्थित नारायण नगर की रहने वाली बुजुर्ग की कहानी भी ऐसी ही है। वृद्धा ने पीपुल्स समाचार की रिपोर्टर को कॉल कर बताया कि एक बेटे की 15 साल और दूसरे करीब 26 साल में मौत हो चुकी है। अब केवल एक बेटी है जो अपनी गृहस्थी में उलझी है। वह मां का खर्च तो उठाती है, लेकिन अकेलापन वृद्धा को खाए जा रहा था। बुजुर्ग महिला ने रिपोर्टर से कहा कि किसी तरह उसे वृंदावन के गौरी-गोपाल आश्रम पहुंचा दिया जाए। बुजुर्ग महिला ने टीवी और अन्य जगह आश्रम को देखा और इसके बारे में सुना था और वह जिद पकड़े बैठी थी कि बिना बेटी को जानकारी दिए उन्हें वहां भेजा जाए वरना वह आत्महत्या जैसा कदम उठा लेंगी।
वृद्धा को किया मोटिवेट
रिपोर्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्हें मोटिवेट किया और प्रयास किया कि वह ऐसा कदम न उठाएं। वह काफी हद तक संतुष्ट भी नजर आईं। इस बीच रिपोर्टर ने तुरंत साथी क्राइम रिपोर्टर से संपर्क कर बाग सेवनिया थाने में महिला की जानकारी दी। मुश्किल यह थी कि महिला केवल नारायण नगर बता रही थीं, इसके अलावा वह कोई जानकारी नहीं दे रही थी।
पुलिस ने मोबाइल नंबर से लोकेशन ट्रेस की
पुलिस ने मोबाइल नंबर और प्राप्त जानकारी के आधार पर लोकेशन ट्रेस की। तुरंत महिला को रेस्क्यू कर उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई और बेटी से भी संपर्क किया गया। फिलहाल वह सुरक्षित हैं। इस संबंध में बेटी का कहना है कि मैं मां का पूरा ख्याल रख रही हूं, उनको आश्रम नहीं जाना चाहिए।
Meta पर सरकार सख्त! Instagram पर आपत्तिजनक विज्ञापनों को लेकर मांगा जवाब
इमोशनल सपोर्ट जरूरी
बढ़ती उम्र की सबसे बड़ी जरूरत केवल दवा नहीं, बल्कि अपनापन, संवाद और भावनात्मक सहारा होता है। परिवार, पड़ोसी और समाज का थोड़ा-सा साथ भी किसी बुजुर्ग के जीवन में उम्मीद लौटा सकता है। जरूरी है कि परिवार यदि समय नहीं दे पा रहा है तो कोई ऐसी व्यवस्था करे कि बुजुर्ग अकेलेपन से उबर पाएं।
डॉ. दीप्ति सिंघल, साइकोलॉजिस्ट
वृद्धा को वृंदावन भेजने के प्रयास जारी
हमें सूचना मिलते ही महिला आरक्षक पार्वती, हेड कांस्टेबल श्रीराम प्रजापति और आरक्षक कुलदीप को मकान ट्रेस करने की जिम्मेदारी सौंपी। यह मकान पर पहुंचे तो खिड़की से देखा कि महिला चाकू गले पर लगाए थी। घर के बाहर से उन्हें समझाया तो आखिर उन्होंने दरवाजा खोल दिया। थाने में मैंने खुद उनकी मनोस्थिति समझी। अब शहर की लक्ष्मी नारायण आनंदम संस्था की मदद से उन्हें वृंदावन भेजने की तैयारी कर रहे हैं, इसके पहले उनके परिवार से बातचीत जारी है।
अमित सोनी, टीआई, बाग सेवनिया थाना
ये भी पढ़ें: भोपाल: एलन समेत 6 कोचिंग संस्थान सील, फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी पर नगर निगम की बड़ी कार्रवाई












