
अगरतला। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि शासन, धर्म और विज्ञान के अलग-अलग प्रयोगों के बावजूद दुनिया आज भी भटक रही है और अब समाधान के लिए भारत के ज्ञान की ओर देख रही है। उन्होंने यह बात त्रिपुरा के मोहनपुर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में कही, जहां वे मां सौंदर्य चिन्मयी मंदिर के प्रतिष्ठा और कुंभाभिषेक समारोह को संबोधित कर रहे थे।
भागवत ने अपने संबोधन में मानव सभ्यता के लंबे अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले करीब 2000 वर्षों में दुनिया ने अलग-अलग व्यवस्थाओं को अपनाया, लेकिन किसी से भी स्थायी शांति और संतोष नहीं मिला। उन्होंने कहा कि शुरुआत में शासन व्यवस्था राजाओं के हाथ में थी, लेकिन समय के साथ कई जगहों पर राजा ही जनता के शोषण का कारण बन गए।
इसके बाद समाज ने भगवान को सर्वोच्च मानते हुए धर्मों की स्थापना की। लोगों को उम्मीद थी कि धर्म के माध्यम से शांति और व्यवस्था कायम होगी, लेकिन इसके बावजूद दुनिया में संघर्ष और हिंसा खत्म नहीं हुई। भागवत के अनुसार, धर्म के नाम पर भी खून-खराबा जारी रहा और मानवता को स्थायी समाधान नहीं मिल पाया।
RSS प्नेरमुख ने आगे कहा कि इसके बाद विज्ञान का दौर आया, जिसमें तर्क, प्रयोग और प्रमाण को प्राथमिकता दी गई। कई लोगों ने यह मान लिया कि जब तक भगवान को प्रयोगशाला में सिद्ध नहीं किया जाएगा, तब तक उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। विज्ञान के विकास से जीवन में सुविधाएं और आराम जरूर बढ़े, लेकिन मानसिक शांति और संतोष आज भी दूर है।
भागवत ने वर्तमान वैश्विक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भी दुनिया में दुख और असंतोष बना हुआ है। परिवार टूट रहे हैं, अपराध बढ़ रहे हैं और युद्ध शुरू होने के बाद लंबे समय तक चलते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विकास की रफ्तार जितनी तेज हो रही है, पर्यावरण का नुकसान भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है।
इतना ही नहीं भागवत का कहना है कि इन सभी अनुभवों के बाद अब दुनिया एक तरह से दिशाहीन हो गई है और समाधान के लिए भारत की ओर उम्मीद से देख रही है। उनके अनुसार, भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा में वह संतुलन और दृष्टि है, जो मानवता को सही मार्ग दिखा सकती है।
भागवत ने इसे भारत का कर्तव्य बताते हुए कहा कि देश को अपने मूल्यों और ज्ञान के आधार पर विश्व को दिशा देने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यही भारत के जीवन का उद्देश्य भी है और इसी दिशा में आगे बढ़ना समय की मांग है।