Manisha Dhanwani
23 Jan 2026
Hemant Nagle
23 Jan 2026
Manisha Dhanwani
23 Jan 2026
इंदौर - भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित और सीवेजयुक्त पानी से फैल रहे संक्रमण ने एक बार फिर दो परिवारों के घर उजाड़ दिए। शुक्रवार को इलाज के दौरान 82 वर्षीय विद्या बाई यादव और 63 वर्षीय बद्रीप्रसाद की मौत हो गई, जिससे यह साफ हो गया है कि हालात अब भी पूरी तरह बेकाबू हैं। क्षेत्र से रोजाना उल्टी-दस्त की शिकायत लेकर मरीज सामने आ रहे हैं, वहीं अस्पतालों में हालात इतने गंभीर हैं कि 10 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं, जिनमें से दो वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
विद्या बाई यादव पूरी तरह स्वस्थ थीं और अपने दैनिक काम खुद करती थीं, लेकिन 10 जनवरी से अचानक उल्टी-दस्त शुरू हुए, कमजोरी बढ़ी और बार-बार शौचालय जाने के दौरान गिरने से कूल्हे की हड्डी टूट गई। एमवाय अस्पताल में उम्र अधिक होने के कारण सर्जरी नहीं हो सकी, हालत बिगड़ने पर अरबिंदो अस्पताल ले जाया गया, जहां महज दो घंटे के इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। इसी तरह बद्रीप्रसाद को भी चार जनवरी को उल्टी-दस्त के बाद एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया था, चार दिन बाद छुट्टी मिलने के बावजूद हालत संभली नहीं और 17 जनवरी को दोबारा अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां शुक्रवार को इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिजन का आरोप है कि बीमारी से पहले दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे, मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे थे, लेकिन दूषित पानी ने उनकी जान ले ली। बद्रीप्रसाद के स्वजनों ने प्रशासन से अब तक कोई मदद नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है और शनिवार को भागीरथपुरा चौकी के सामने शव रखकर चक्काजाम करने की चेतावनी दी है। इन मौतों ने एक बार फिर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोल दी है, जहां लापरवाही की कीमत आम नागरिक अपनी जान देकर चुका रहे हैं।