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बेटमा में कन्या विद्यालय की जमीन पर बवाल, करणी सेना ने मशाल यात्रा निकाल प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी

बेटमा में कन्या विद्यालय की जमीन, दीवार और गेट को लेकर विवाद गहराया। करणी सेना ने मशाल यात्रा निकाल जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
बेटमा में कन्या विद्यालय की जमीन पर बवाल, करणी सेना ने मशाल यात्रा निकाल प्रशासन को दी आंदोलन की चेतावनी

बेटमा। इंदौर रोड स्थित शासकीय कन्या विद्यालय की जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। पहले विद्यालय परिसर में बाउंड्री वॉल के अंदर निर्माण कार्य को लेकर छात्र-छात्राओं ने चक्काजाम कर विरोध जताया था, वहीं आक्रोशित विद्यार्थियों ने निर्माणाधीन दीवार भी गिरा दी थी।

अब इसी मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर करणी सेना परिवार ने रविवार शाम शासकीय कन्या विद्यालय परिसर से अंबेडकर चौराहे तक मशाल यात्रा निकालकर प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया। अंबेडकर चौराहे पर करणी सेना जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने बेटमा थाना प्रभारी रणजीत सिंह बघेल को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर कार्रवाई और जमीन के स्वामित्व की निष्पक्ष जांच की मांग की।

चक्काजाम से मशाल यात्रा तक पहुंचा विरोध

दरअसल, कन्या विद्यालय परिसर की बाउंड्री वॉल के अंदर निर्माण कार्य शुरू होने के बाद भूमि के स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आया था। करणी सेना और विद्यार्थियों ने निर्माण को अवैध बताते हुए विरोध दर्ज कराया था। इस दौरान चक्काजाम भी किया गया और निर्माणाधीन दीवार गिरा दी गई। मामले ने उस समय भी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब बाउंड्री वॉल तोड़े जाने और विद्यालय का लोहे का गेट गायब होने के मामले ने आंदोलन को और तेज कर दिया है। शिक्षक गोविंद सिंह दरबार सहित स्थानीय स्तर पर इस मामले को लगातार उठाया जा रहा है।

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 बेटियों के स्कूल की जमीन पर कब्जे के आरोप

मशाल यात्रा के दौरान करणी सेना जिला अध्यक्ष ऋषिराज सिंह सिसोदिया ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटी बढ़ाओ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ बेटियों के विद्यालय की जमीन पर कब्जे के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिल रहा है और पुलिस प्रशासन की कार्रवाई अभी तक संतोषजनक नहीं है।

सिसोदिया ने दावा किया कि संबंधित भूमि के नामांतरण पर तीन बार आपत्ति आई और नामांतरण की प्रक्रिया निरस्त हुई। इसके बावजूद जमीन के हस्तांतरण और निर्माण को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने संबंधित पटवारी और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की।

साथ ही कहा कि आंदोलन को जिला स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं रखता, बल्कि बेटियों और आम जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। कार्यकर्ताओं को मिल रही कथित धमकियों पर उन्होंने कहा कि ऐसी धमकियों से संगठन पीछे हटने वाला नहीं है।

छुट्टी के बाद लौटे तो बदल गई स्थिति: शिक्षक गोविंद सिंह

विद्यालय की जमीन का मुद्दा लगातार उठा रहे शिक्षक गोविंद सिंह दरबार ने बताया कि शनिवार को जब वे विद्यालय पहुंचे थे, तब वहां कोई निर्माण नहीं था, लेकिन दो दिन के अवकाश के बाद वापस लौटने पर पूरा निर्माण हो चुका था।

इसकी सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दी गई, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने करीब 20 मीटर की बाउंड्री वॉल तोड़े जाने, उसका मलबा गायब होने और लोहे का गेट चोरी होने पर सवाल उठाए।

दरबार ने मांग की कि प्रशासन सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि दीवार किसने बनाई, किसके आदेश पर तोड़ी गई, वहां कौन ठेकेदार काम कर रहा था और किसकी जेसीबी का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने कहा कि उनका किसी से व्यक्तिगत विवाद नहीं है, लेकिन सरकारी विद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों का खुलासा होना चाहिए। आखिर सरकारी स्कूल की दीवार और गेट भी सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम जनता की संपत्ति की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?

2020 में भी सामने आया था जमीन का मामला

इस भूमि को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2020 में भी मामला मीडिया और तत्कालीन जनप्रतिनिधियों के संज्ञान में लाया गया था। उस समय भूमि को शासकीय कन्या विद्यालय के लिए पूर्वजों द्वारा दान किए जाने की बात सामने आई थी।

पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष स्वर्गीय रामनिवास दाऊ द्वारा विद्यालय को दान में दी गई भूमि से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। वहीं अब जमीन के स्वामित्व, हस्तांतरण और निजी निर्माण की वैधता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में पुराने दस्तावेजों और वर्तमान राजस्व अभिलेखों का मिलान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

प्रकरण दर्ज, तहसील से मांगी जमीन की जानकारी: थाना प्रभारी

मामले में बेटमा थाना प्रभारी रणजीत सिंह बघेल ने बताया कि चार-पांच दिन पूर्व कन्या विद्यालय की दीवार गिराने और गेट चोरी होने की शिकायत पर प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। करणी सेना की मशाल यात्रा का उद्देश्य भी दीवार तोड़ने और गेट ले जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करना था।

थाना प्रभारी ने बताया कि संबंधित भूमि शासकीय स्कूल की है अथवा किसी निजी व्यक्ति की, इसकी जानकारी के लिए तहसील कार्यालय से पत्राचार किया गया है। राजस्व विभाग से जानकारी प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

एक तरफ करणी सेना ने आंदोलन को जिला स्तर से मुख्यमंत्री तक ले जाने की तैयारी जताई है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू करने और भूमि के स्वामित्व की जानकारी जुटाने की बात कही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्षों से विद्यालय के उपयोग में रही जमीन का वास्तविक स्वामित्व क्या है? बाउंड्री वॉल किसने और किसके आदेश पर तोड़ी तथा विद्यालय का गेट कहां गया? बेटमा की बेटियों के विद्यालय से जुड़ा यह मामला अब केवल स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षण संस्थानों की जमीन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल बन गया है।

Rahul Devda
By Rahul Devda

मेरा धर्म सत्ता नहीं, सत्य लिखना है, मेरी जिम्मेदारी जनता के दर्द को आवाज़ देना है ।। 🖋️

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