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10वीं में फेल हुई तो छोड़ दिया घर!10 दिन बाद वाराणसी में मिली नाबालिग; बेटमा पुलिस ने सुलझाई गुत्थी

बेटमा पुलिस ने नाबालिग बालिका के कथित अपहरण के मामले का 10 दिनों के भीतर सफल खुलासा कर दिया। पुलिस ने किशोरी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सकुशल बरामद कर परिजनों को सौंप दिया। जांच में सामने आया कि किशोरी का अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि वह 10वीं कक्षा की परीक्षा में असफल होने और माता-पिता की डांट से नाराज होकर अपनी मर्जी से घर छोड़कर चली गई थी।
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पुलिस थाना बेटमा

मध्य प्रदेश के बेटमा थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका के कथित अपहरण के मामले का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। पुलिस ने लगातार 10 दिनों तक की गई खोजबीन के बाद किशोरी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सकुशल बरामद कर लिया। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब 1 जुलाई 2026 को किशोरी के परिजन बेटमा थाना पहुंचे और अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। परिजनों ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी 30 जून को सुबह करीब 11:35 बजे महू जाने की बात कहकर घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वह वापस नहीं लौटी।

काफी तलाश करने के बाद भी जब किशोरी का कोई पता नहीं चला तो परिवार ने किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस से मदद मांगी। शिकायत के आधार पर बेटमा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 384/26 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।

पुलिस ने गंभीरता से शुरू की जांच, हर एंगल से की पड़ताल

नाबालिग से जुड़े मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस अधीक्षक राजेंद्र कुमार वर्मा के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी संघ प्रिय सम्राट के मार्गदर्शन में बेटमा थाना पुलिस ने अलग-अलग स्तरों पर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने किशोरी की तलाश के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल माध्यमों से जानकारी जुटाई गई। इसके साथ ही पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया।

जांच के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर किशोरी के उत्तर प्रदेश के वाराणसी में होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वहां पहुंचकर किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया।

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अपहरण नहीं, अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी किशोरी

पुलिस जांच में सामने आई जानकारी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। शुरुआती शिकायत में परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई थी, लेकिन किशोरी के बयान के बाद स्थिति साफ हो गई। पुलिस द्वारा नियमानुसार किशोरी के बयान दर्ज किए गए। इस दौरान उसने बताया कि वह कक्षा 10वीं की परीक्षा में असफल हो गई थी। परीक्षा में फेल होने के बाद माता-पिता की डांट से वह काफी दुखी और परेशान हो गई थी।

किशोरी ने बताया कि इसी नाराजगी के चलते उसने बिना किसी को बताए घर छोड़ने का फैसला किया। वह अकेले ही वाराणसी चली गई थी। जांच में पुलिस को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि उसे किसी व्यक्ति ने बहला-फुसलाकर ले गया या उसका अपहरण किया गया था।

परिवार की चिंता खत्म, पुलिस ने किशोरी को सकुशल सौंपा

किशोरी के सकुशल मिलने के बाद उसके परिवार ने राहत की सांस ली। कई दिनों से बेटी की तलाश में परेशान परिजनों को पुलिस की कार्रवाई से बड़ी राहत मिली। पुलिस ने बताया कि नाबालिग मामलों में हर पहलू की गहन जांच करना बेहद जरूरी होता है। कई बार परिस्थितियों के कारण बच्चे या किशोर बिना बताए घर से चले जाते हैं, लेकिन समय पर पुलिस कार्रवाई से उन्हें सुरक्षित वापस लाया जा सकता है।

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तकनीकी जांच बनी सफलता की कुंजी

इस पूरे मामले में पुलिस की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण साबित हुई। मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल माध्यमों से पुलिस को किशोरी तक पहुंचने में मदद मिली। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से लापता व्यक्तियों की तलाश में काफी मदद मिलती है। इसके साथ ही पुलिस टीम की सक्रियता और लगातार प्रयासों के कारण यह मामला जल्द सुलझाया जा सका। वरिष्ठ अधिकारियों ने बेटमा पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए इसे बेहतर पुलिसिंग और प्रभावी जांच का उदाहरण बताया।

इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका

किशोरी को सुरक्षित वापस लाने में बेटमा थाना पुलिस की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक मीना कर्णावत, विवेचक उपनिरीक्षक मुन्नालाल डोडियार, उपनिरीक्षक अंकिता जाट और आरक्षक नरोत्तम का विशेष योगदान रहा। वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिस टीम के त्वरित प्रयास, तकनीकी दक्षता और सतर्कता की प्रशंसा की।

माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद जरूरी

यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि बच्चों और अभिभावकों के बीच संवाद बेहद जरूरी है। परीक्षा या पढ़ाई से जुड़ी असफलताओं को लेकर बच्चों पर अधिक दबाव डालने के बजाय उन्हें समझने और उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत होती है। कई बार छोटी-सी डांट या तनाव की स्थिति में बच्चे भावनात्मक फैसला ले लेते हैं, जिससे बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई बच्चा या किशोर घर से गायब होता है तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, ताकि समय रहते उसकी तलाश की जा सके।

Rahul Devda
By Rahul Devda

मेरा धर्म सत्ता नहीं, सत्य लिखना है, मेरी जिम्मेदारी जनता के दर्द को आवाज़ देना है ।। 🖋️

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