10वीं में फेल हुई तो छोड़ दिया घर!10 दिन बाद वाराणसी में मिली नाबालिग; बेटमा पुलिस ने सुलझाई गुत्थी
मध्य प्रदेश के बेटमा थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका के कथित अपहरण के मामले का पुलिस ने सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। पुलिस ने लगातार 10 दिनों तक की गई खोजबीन के बाद किशोरी को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सकुशल बरामद कर लिया।
काफी तलाश करने के बाद भी जब किशोरी का कोई पता नहीं चला तो परिवार ने किसी अनहोनी की आशंका जताते हुए पुलिस से मदद मांगी। शिकायत के आधार पर बेटमा थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 384/26 दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने गंभीरता से शुरू की जांच, हर एंगल से की पड़ताल
नाबालिग से जुड़े मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस अधीक्षक राजेंद्र कुमार वर्मा के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं एसडीओपी संघ प्रिय सम्राट के मार्गदर्शन में बेटमा थाना पुलिस ने अलग-अलग स्तरों पर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने किशोरी की तलाश के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया। मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल माध्यमों से जानकारी जुटाई गई। इसके साथ ही पुलिस ने अपने मुखबिर तंत्र को भी सक्रिय किया।
जांच के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर किशोरी के उत्तर प्रदेश के वाराणसी में होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वहां पहुंचकर किशोरी को सुरक्षित बरामद कर लिया।
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अपहरण नहीं, अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी किशोरी
पुलिस जांच में सामने आई जानकारी ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। शुरुआती शिकायत में परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई थी, लेकिन किशोरी के बयान के बाद स्थिति साफ हो गई।
किशोरी ने बताया कि इसी नाराजगी के चलते उसने बिना किसी को बताए घर छोड़ने का फैसला किया। वह अकेले ही वाराणसी चली गई थी। जांच में पुलिस को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि उसे किसी व्यक्ति ने बहला-फुसलाकर ले गया या उसका अपहरण किया गया था।
परिवार की चिंता खत्म, पुलिस ने किशोरी को सकुशल सौंपा
किशोरी के सकुशल मिलने के बाद उसके परिवार ने राहत की सांस ली। कई दिनों से बेटी की तलाश में परेशान परिजनों को पुलिस की कार्रवाई से बड़ी राहत मिली।
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तकनीकी जांच बनी सफलता की कुंजी
इस पूरे मामले में पुलिस की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण साबित हुई। मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल माध्यमों से पुलिस को किशोरी तक पहुंचने में मदद मिली।
इन पुलिसकर्मियों की रही अहम भूमिका
किशोरी को सुरक्षित वापस लाने में बेटमा थाना पुलिस की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद जरूरी
यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि बच्चों और अभिभावकों के बीच संवाद बेहद जरूरी है। परीक्षा या पढ़ाई से जुड़ी असफलताओं को लेकर बच्चों पर अधिक दबाव डालने के बजाय उन्हें समझने और उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत होती है। कई बार छोटी-सी डांट या तनाव की स्थिति में बच्चे भावनात्मक फैसला ले लेते हैं, जिससे बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।














