Mohammad Rafi :बेगमगंज में मोहम्मद रफी को सुरों से श्रद्धांजलि, देर रात तक गूंजते रहे सदाबहार गीत

बेगमगंज में स्वर संगीत एवं स्वास्थ्य सेवा समिति की ओर से महान गायक स्वर्गीय मोहम्मद रफी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में शहर के कलाकारों ने रफी साहब के सदाबहार गीतों की शानदार प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं का मन मोह लिया।
दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी भगवान सिंह ठाकुर और अध्यक्षता कर रहे पार्षद बृजेश लोधी ने मोहम्मद रफी के चित्र पर माल्यार्पण और तिलक लगाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे जादूगर विक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि रफी साहब केवल एक गायक नहीं थे, बल्कि सुरों की ऐसी दुनिया थे, जिसमें प्रेम, दर्द, भक्ति, देशभक्ति और इंसानियत की खूबसूरत भावनाएं समाहित थीं।
दर्द भरे गीतों ने नम कर दीं आंखें
समिति के गायक पवन दुबे ने रफी साहब का मशहूर गीत "आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रे, ओ मेरे मितवा" प्रस्तुत किया। इस गीत ने श्रोताओं को भावुक कर दिया और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
सदाबहार गीतों पर झूम उठे श्रोता
डॉ. जितेंद्र सिंह तोमर ने "तुम मुझे यूं भुला न पाओगे" और "ये चांद सा रोशन चेहरा, जुल्फों का रंग सुनहरा" जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। उनकी आवाज सुनकर दर्शक तालियां बजाने पर मजबूर हो गए। वहीं, पूर्व सैनिक मनमोहन सिंह तोमर ने "बदन पे सितारे लपेटे हुए" गीत गाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। इस प्रस्तुति ने लोगों को अभिनेता शम्मी कपूर की याद दिला दी।
युवा कलाकारों ने भी बिखेरा सुरों का जादू
युवा गायक सुनील सोनी ने "वो जब याद आए, बहुत याद आए" गीत गाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। इसके अलावा, गायक निलेश मिश्रा ने "मुझे इश्क है तुझी से, मेरी जान-ए-जिंदगी" गीत प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
गीत-संगीत का यह कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा। अंत में सुनील सोनी ने सभी अतिथियों, कलाकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी मौजूद रहे।












