ढाका। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव ने देश की राजनीति में नया अध्याय जोड़ दिया। लंबे समय से सत्ता में रही अवामी लीग इस चुनाव में भाग नहीं ले सकी, जबकि BNP ने बड़ी सफलता हासिल की। चुनाव अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस की देखरेख में संपन्न हुआ और इसमें मतदाताओं ने दो तरह से वोट डाला। नई संसद चुनने और संविधान में प्रस्तावित बदलावों (जुलाई चार्टर) पर राय देने के लिए।
देश की सियासत में यह चुनाव इसलिए भी अहम था क्योंकि पिछले साल हुए बड़े छात्र आंदोलनों और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद जनता ने अपनी राय दी।
BNP के चेयरपर्सन तारिक रहमान (पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे) ने इस चुनाव में दो सीटों से भाग लिया, ढाका-17 और बोगुरा-6। दोनों सीटों पर उन्हें जीत मिली। अनौपचारिक नतीजों के मुताबिक, BNP और उसके गठबंधन ने 299 सदस्यीय संसदीय सदन में 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया।
तारिक रहमान ने अपने समर्थकों से अपील की है कि, वे जुलूस या उत्सव न मनाएं और जीत की खुशी में नमाज पढ़ें। पार्टी ने इस संदेश को संयम और राजनीतिक शिष्टाचार का प्रतीक बताया।
बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। रहमान के सलाहकार सैयद मोअज्जम हुसैन अलाला ने कहा कि, BNP को 13वें संसदीय चुनाव में पूर्ण बहुमत मिला है। उनके गठबंधन और जमात-ए-इस्लामी ने भी अच्छी संख्या में सीटें हासिल की हैं। अधिकार सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह 14 फरवरी को हो सकता है।
देश के 36,000 मतदान केंद्रों पर मतदान हुआ। चुनाव आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद के अनुसार, दोपहर 2 बजे तक 47.91% मतदान हुआ। कई मतदान केंद्रों पर हिंसक झड़पें भी देखने को मिली। खुलना में BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की वोटिंग सेंटर में मौत हो गई, जबकि गोपालगंज और मुंशीगंज में देसी बम फटने से तीन लोग घायल हुए।
कई दलों ने मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए। NCP ने दावा किया कि कुछ सीटों पर BNP को विजेता बनाने के लिए वोटों की हेरफेर की जा रही थी। इसी तरह, इस्लामी आंदोलन ने भी कई केंद्रों पर फर्जी वोटिंग और पार्टी एजेंटों पर हमले की शिकायत दर्ज कराई।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, जो इस समय भारत में हैं, ने चुनाव को पूरी तरह फर्जी और असंवैधानिक बताया। उनका आरोप है कि चुनाव में लोगों के वोट देने के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं किया गया। हसीना ने कहा कि कई मतदान केंद्रों पर कब्जा, गोलीबारी, पैसे बांटना, बैलेट पेपर पर जबरन मुहर लगाना और एजेंटों से नतीजे पर हस्ताक्षर करवाने जैसी घटनाएं हुईं।
नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) - छात्र नेतृत्व वाली पार्टी ने 30 सीटों में से सिर्फ 5 पर जीत हासिल की। उनकी सड़क पर लोकप्रियता वोटों में नहीं बदल सकी।
जमात-ए-इस्लामी -11 दलों के गठबंधन ने कुल 70 सीटें जीतें। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट पर जीत दर्ज की।
अन्य निर्दलीय और छोटे दल - कुल मिलाकर 5-6 सीटों पर जीत हासिल की।
कई सीटों पर गड़बड़ी के आरोप लगे, जैसे ढाका-13 और ढाका-15 में मतगणना के दौरान अनियमितताओं की शिकायतें हुईं।
तारिक रहमान 25 जनवरी 2025 को ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे। उनके देश लौटने के पांच दिन बाद उनकी मां खालिदा जिया का निधन हुआ। इससे BNP की कमान पूरी तरह उनके हाथों में आ गई।
राजनीतिक इतिहास में उनके ऊपर 2001-2006 के BNP शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और 2007 में उन्हें अंतरिम सरकार के दौरान 18 महीने जेल में रहना पड़ा। 2008 में इलाज के लिए उन्होंने लंदन का रुख किया और अब 2025 में देश लौटकर प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे बड़े दावेदार बन चुके हैं।
BNP ने चुनाव से पहले कई महत्वपूर्ण वादे किए थे, जिनका असर देश की सामाजिक और आर्थिक दिशा पर होगा:
महिला सशक्तिकरण: महिलाओं के लिए ‘फैमिली कार्ड’, पोस्ट ग्रेजुएशन तक मुफ्त पढ़ाई।
बुलेट ट्रेन परियोजना: ढाका को अन्य बड़े शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों की जान, संपत्ति और पूजा स्थलों की सुरक्षा।
अर्थव्यवस्था: छोटे उद्योगों को टैक्स में छूट, विदेशों में काम करने वाले मजदूरों के लिए कल्याण फंड।
प्रशासनिक सुधार: न्यायपालिका को मजबूत और स्वतंत्र बनाना, भ्रष्टाचार कम करना।
विदेश नीति: संतुलित विदेश नीति, किसी भी देश के दबाव या प्रॉक्सी बनने से बचना।
भारत: भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि चुनाव परिणाम का इंतजार किया जाएगा। भारत स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी चुनाव के पक्ष में है।
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक: पूर्व अमेरिकी सांसद डेविड ड्रेयर ने चुनाव को फ्री, फेयर और उत्सव जैसा बताया। उन्होंने मतदान केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थित माहौल और लोगों के उत्साह की सराहना की।
पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी के अनुसार, तारिक रहमान भारत-बांग्लादेश संबंधों को संतुलित करने और पूर्व समझौतों को जारी रखने में बेहतर भूमिका निभा सकते हैं।
बांग्लादेश में 1988 के बाद पहली बार पुरुष प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री थे। 1991-2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। अब BNP की जीत के साथ तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने के करीब हैं।