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बांग्लादेश :8 साल की मासूम से रेप के बाद किए टुकड़े, कोर्ट ने 5 दिन की सुनवाई में पति-पत्नी को सुनाई मौत की सजा

बांग्लादेश में आठ साल की बच्ची के साथ रेप और हत्या के केस में अदालत ने पांच दिन में फैसला सुना दिया। मामले में एक दंपति को कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है। यह बांग्लादेश में किसी भी हत्या के मुकदमे का सबसे तेजी से होने वाला निपटारा है।
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8 साल की मासूम से रेप के बाद किए टुकड़े, कोर्ट ने 5 दिन की सुनवाई में पति-पत्नी को सुनाई मौत की सजा

इंटरनेशनल डेस्क। बांग्लादेश में 8 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ढाका की एक विशेष अदालत ने आरोपी दंपति को मौत की सजा सुनाते हुए यह संदेश दिया कि बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराधों पर कानून सख्त रुख अपनाएगा। इस मामले में केवल पांच दिनों की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया गया, जिसे अभियोजन पक्ष ने देश के इतिहास में हत्या के किसी मामले के सबसे तेज निपटारों में से एक बताया है।

पूरे देश में जनाक्रोश

ढाका मेट्रोपॉलिटन बाल उत्पीड़न रोकथाम न्यायाधिकरण ने घटना के महज 19 दिन के भीतर दोषियों को सजा सुनाकर एक नया उदाहरण पेश किया है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे बांग्लादेश में जनाक्रोश पैदा कर दिया था। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर पहले से उठ रही चिंताओं के बीच यह मामला राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया था। समाज के विभिन्न वर्गों ने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की थी।

मौत की सजा के साथ जुर्माना भी

मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश मसरूर सालेकिन ने मुख्य आरोपी सोहेल राणा और उसकी पत्नी स्वप्ना खातून को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। फैसले के साथ अदालत ने दोनों दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया। सोहेल राणा पर 5 लाख टका और स्वप्ना खातून पर 2 लाख टका का जुर्माना लगाया गया।

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पीड़ित परिवार को मिलेगी जुर्माने की राशि 

अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने से प्राप्त पूरी राशि पीड़ित बच्ची के परिवार को दी जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि दोषी निर्धारित राशि जमा नहीं करते हैं तो उनकी चल और अचल संपत्तियों को जब्त कर नीलाम किया जाएगा। अदालत का मानना है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना भी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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बचाव के लिए कोई निजी वकील आगे नहीं आया 

मामले की गंभीरता और जनभावनाओं को देखते हुए कोई भी निजी वकील आरोपी दंपति की ओर से अदालत में पैरवी करने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सरकारी वकील नियुक्त किया। सरकारी पक्ष के बचाव वकील ने सोहेल राणा के लिए मृत्युदंड की जगह उम्रकैद और स्वप्ना खातून के लिए कम सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने अपराध की क्रूरता को देखते हुए यह दलील खारिज कर दी।

पिता ने फैसले का किया स्वागत 

फैसले के बाद पीड़ित बच्ची के पिता ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने उम्मीद जताई कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोषियों को जल्द से जल्द सजा दी जाएगी। बांग्लादेशी कानून के तहत निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को लागू करने से पहले हाईकोर्ट की मंजूरी आवश्यक होती है। अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने भी संकेत दिया है कि मामले की जल्द सुनवाई के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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अपार्टमेंट से मिला था क्षत-विक्षत शव 

पुलिस जांच के अनुसार, 19 मई को ढाका के पल्लबी इलाके स्थित एक अपार्टमेंट से बच्ची का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया था। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद आरोपी सोहेल राणा ने शव के कई टुकड़े कर दिए थे और फरार हो गया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्वप्ना खातून को मौके से गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य आरोपी को बाद में नारायणगंज के फतुल्लाह क्षेत्र से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद सोहेल राणा ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ी।

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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