PlayBreaking News

सीवेज फार्मिंग पर प्रतिबंध, लेकिन राजधानी में 2700 एकड़ में नाले के जहरीले पानी से खेती

सब्जियों के साथ गेहूं, चना व सोयाबीन में मिल रहे खतरनाक रसायन
Follow on Google News
सीवेज फार्मिंग पर प्रतिबंध, लेकिन राजधानी में 2700 एकड़ में नाले के जहरीले पानी से खेती

भोपाल। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 9 साल पहले सीवेज फार्मिंग पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रशासन ने राजधानी के इस्लामनगर, लांबाखेड़ा और उसके आसपास 200 हेक्टेयर जमीन पर सीवेज फार्मिंग से उगाई जा रही सब्जियों की फसल को नष्ट कर दिया था। लेकिन, न केवल इस जमीन पर, बल्कि आसपास करीब 1500 एकड़ में सीवेज फॉर्मिंग से गेहूं, चना और सोयाबीन की खेती होती है। इन फसलों की सिंचाई पातरा नाले (सीवेज) से की जाती है। इसी तरह लहारपुरा डैम और शाहपुरा झील से भी निकलने वाले सीवेज से 1200 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फसलों की सिंचाई होती है। इससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा रहता है।

पातरा नाले में आता है फैक्ट्रियों का केमिकल

राजधानी के पातरा नाले के पानी में सीवेज के साथ खतरनाक केमिकल और पेस्टिसाइड की मात्रा बहुत ज्यादा है। दरअसल, यह नाला गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया से होकर गुजरता है। इस नाले में छोटी-बड़ी 1100 से ज्यादा फैक्ट्रियों का वेस्ट वॉटर मिलता है। इसकी वजह से पातरा नाले में बहने वाला सीवेज इतना जहरीला है कि यह ग्राउंड वॉटर को भी प्रदूषित करता है। इस नाले से चांदबड़, हिनोतिया, सेमरा, करारिया, कोलुआ, खेजड़ा, रासलाखेड़ी, मालीखेड़ी, पिपलिया, इमलिया, श्यामपुर, इस्लाम नगर से हलाली नदी तक पड़ने वाले खेतों की सिंचाई की जाती है। इस तरह एनजीटी के आदेश का पालन नहीं हो पा रहा है।

पानी का कोई जरिया नहीं, नाला ही एकमात्र साधन

रेल कोच फैक्ट्री के पास द्वारिका नगर से होकर गुजरने वाले पातरा नाले से सब्जियों और अनाज की खेती होती है। यहां किसानों ने नाले में मोटर पंप लगा रखा है। इधर, लहारपुर डैम से निकलने वाले सीवेज का उपयोग भी सिंचाई में किया जाता है। बगरोदा, बर्रई, कटारा गांव और आसपास के किसान बड़ी तादाद में प्याज, लहसुन, धनिया, टमाटर के अलावा गेहूं की खेती करते हैं। यहां भी सिंचाई का साधन सिर्फ नाले का पानी ही है।

डायरिया, पीलिया और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा

एन्वायर्नमेंट एक्टीविस्ट डॉ. सुभाषचंद्र पांडे के अनुसार, सीवेज फार्मिंग कर उगाई गई सब्जियां और अनाज स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदेह हैं। नाले के पानी में लेड, आयरन, एंटिमोनी, बिस्मथ, कैडमियम, मरक्यूरी, कोबाल्ट, निकल और मैग्नीज जैसे खतरनाक रसायन होते हैं। इसके खाने से पेचिस, डायरिया, एमीबायसिस, पीलिया, एलर्जी के अलावा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी होने का खतरा रहता है।

सीवेज के पानी में मर्करी और लैड, कैडमियम जैसे जहरीले पदार्थ होते हैं। इसके पानी से तैयार अनाज के सेवन से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि सीवेज के पानी से फसल का उत्पादन बढ़ जाता है। - डॉ. शैलेंद्र कुशवाह, वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र , ग्वालियर

आपने मेरे संज्ञान में यह मामला लाया है। हम जानकारी बुलाकर तकनीकी परीक्षण कराएंगे, केवल भानपुर ही नहीं, बल्कि पूरे शहर में यदि कहीं भी इस तरह की सीवेज फॉर्मिंग हो रही होगी, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। - कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर,भोपाल

People's Reporter
By People's Reporter
नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts