अयोध्या स्थित राम मंदिर में गुरुवार को सबसे अहम और ऐतिहासिक क्षण रहा जब देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पूरे विधि-विधान के साथ श्रीराम यंत्र की स्थापना की। मंदिर के दूसरे तल पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच यह प्रक्रिया संपन्न हुई। इस स्थापना को मंदिर निर्माण यात्रा का एक महत्वपूर्ण और निर्णायक चरण माना जा रहा है, जिसने पूरे आयोजन को विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया।
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महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रपति का स्वागत पारंपरिक अंदाज में किया और कार्यक्रम को गरिमामय बनाया।
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राष्ट्रपति के आगमन को खास बनाने के लिए अयोध्या शहर को सांस्कृतिक रूप से सजाया गया था। जगह-जगह मंच बनाकर लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। जैसे ही राष्ट्रपति शहर में प्रवेश कर रही थीं, उन्हें पूर्वांचल की लोक संस्कृति की झलक दिखाई दी। ढोल-नगाड़ों की गूंज और पारंपरिक नृत्य ने माहौल को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया।
एयरपोर्ट से राष्ट्रपति सड़क मार्ग से सीधे राम मंदिर के लिए रवाना हुईं। पूरे रास्ते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। शहर को विशेष रूप से सजाया गया था और जगह-जगह श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भीड़ राष्ट्रपति के स्वागत के लिए मौजूद थी।
राष्ट्रपति मुर्मू ने राम मंदिर में शंकराचार्य द्वार से प्रवेश किया। मंदिर परिसर में उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों की धुन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह प्रवेश अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया।
राम मंदिर के दूसरे तल पर राष्ट्रपति ने पूरे विधि-विधान के साथ श्रीराम यंत्र की स्थापना की। यह कार्यक्रम धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रों के बीच इस प्रक्रिया को संपन्न किया, जिसे मंदिर निर्माण यात्रा का एक अहम पड़ाव बताया जा रहा है।
निपेंद्र मिश्रा, जो श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं, उन्होंने बताया कि यह दिन मंदिर निर्माण के दृष्टिकोण से बेहद खास है। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम के साथ मंदिर निर्माण कार्य को एक महत्वपूर्ण चरण में पूर्ण माना जाएगा। उन्होंने इसे भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण बताया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने राम मंदिर परिसर में रामलला और राम परिवार के दर्शन भी किए। वह करीब 5 घंटे तक अयोध्या में मौजूद रहेंगी और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगी। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना गया है।
राम यंत्र केवल धातु की आकृति नहीं है, बल्कि इसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा का गणितीय और आध्यात्मिक स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, यंत्र विशेष ऊर्जा केंद्र होते हैं जो सकारात्मक ऊर्जा को केंद्रित करते हैं।
जिस प्रकार श्री यंत्र को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार श्रीराम यंत्र को भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्रीराम की मर्यादा, विजय और आदर्शों का प्रतीक माना जाता है। यह यंत्र आस्था, संतुलन और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है।