करूर हादसे के बाद 'खत्म'मान लिए गए थे थलपति विजय,वापसी ऐसी कि बन गए तमिलनाडु के किंगमेकर

तमिलनाडु की राजनीति में जो कहानी आज लिखी जा रही है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। एक ऐसा चेहरा जिसे करूर की दर्दनाक घटना के बाद पूरी तरह खारिज कर दिया गया था। वही आज सत्ता के समीकरण तय करता नजर आ रहा है। यह कहानी है थलपति विजय की- जो कभी सुपरस्टार थे, फिर विवादों में घिरे नेता बने और अब 'किंगमेकर' के तौर पर उभरे हैं। साल 2025 में करूर में हुई भगदड़ ने विजय के राजनीतिक सफर पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया था। विरोधियों ने उन्हें घेरते हुए कहा था कि अब जनता उन्हें स्वीकार नहीं करेगी। लेकिन 2026 के चुनावी नतीजों ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया। विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्ट्री कजगम' यानी टीवीके ने जिस तरह प्रदर्शन किया, उसने तमिलनाडु की राजनीति का गणित ही बदल दिया।
करूर की वो रात, जिसने बदल दी थी तस्वीर
27 सितंबर 2025 का दिन तमिलनाडु के लोगों के लिए एक काला अध्याय बन गया। करूर-इरोड रोड के वेलुसामीपुरम इलाके में आयोजित विजय की रैली में अचानक भगदड़ मच गई। शुरुआत में प्रशासन को उम्मीद थी कि करीब 10 हजार लोग आएंगे, लेकिन मौके पर भीड़ 60 हजार के पार पहुंच गई। लोग अपने पसंदीदा अभिनेता को देखने के लिए घंटों पहले से ही जमा हो गए थे। कई लोग तेज धूप में खड़े-खड़े बेहोश हो गए, लेकिन भीड़ कम नहीं हुई। जैसे ही विजय का काफिला शाम करीब 7 बजे वहां पहुंचा, लोगों में आगे बढ़ने की होड़ मच गई। बैरिकेड्स टूट गए और हालात बेकाबू हो गए। करीब 7:40 बजे भगदड़ ने भयावह रूप ले लिया। मौके पर मौजूद पुलिस और वॉलंटियर्स भीड़ को संभाल नहीं पाए। एम्बुलेंस तक समय पर नहीं पहुंच पाईं। इस हादसे में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जिनमें 10 बच्चे और 17 महिलाएं शामिल थीं, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए।
हादसे के बीच विजय का रिएक्शन और बयान
भगदड़ के बीच थलपति विजय ने अपना भाषण रोक दिया। चश्मदीदों के अनुसार, वह मंच से नीचे उतरकर लोगों की मदद करते नजर आए। उन्होंने खुद पानी की बोतलें बांटी और माइक पर एक खोए हुए बच्चे के लिए बार-बार घोषणा की। हादसे के बाद विजय ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि यह मेरे जीवन का सबसे दर्दनाक पल है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनका दर्द मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। उन्होंने तुरंत मृतकों के परिजनों को 20 लाख रुपए और घायलों को 2 लाख रुपए की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया। लेकिन इस सबके बावजूद आलोचना का दौर थमने वाला नहीं था।
विरोधियों का हमला और 'करियर खत्म' की भविष्यवाणी
करूर हादसे के बाद राजनीतिक विरोधियों ने विजय पर जमकर निशाना साधा। सवाल उठे कि इतनी बड़ी भीड़ को संभालने की तैयारी क्यों नहीं की गई। कई नेताओं ने कहा कि विजय को राजनीति की समझ नहीं है। उस समय यह आम धारणा बन गई थी कि विजय का राजनीतिक करियर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया है। टीवी डिबेट्स से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह यही चर्चा थी कि अब विजय चुनावी मैदान में टिक नहीं पाएंगे।
कैसे बदली पूरी कहानी
लेकिन विजय ने इस नकारात्मक माहौल को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने जमीनी स्तर पर काम जारी रखा और लोगों से सीधा संवाद बनाए रखा। करूर हादसे के बाद भी उनके फैन क्लब और संगठन 'विजय मक्कल इयक्कम' ने लगातार लोगों के बीच सक्रिय भूमिका निभाई। विजय ने अपनी सभाओं में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह उनकी सबसे बड़ी सीख है और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जाएगी। उनके इस स्वीकार करने वाले अंदाज ने लोगों के बीच भरोसा वापस बनाने में अहम भूमिका निभाई। धीरे-धीरे जनता का नजरिया बदलने लगा। जहां पहले आलोचना हो रही थी, वहीं अब लोग उनकी ईमानदारी और संवेदनशीलता की बात करने लगे।
2026 चुनाव: विजय बने गेमचेंजर
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में जब नतीजे सामने आने लगे, तो साफ हो गया कि विजय को जनता ने पूरी तरह नकारा नहीं है। उनकी पार्टी टीवीके ने कई सीटों पर मजबूत प्रदर्शन किया और बड़े दलों के समीकरण बिगाड़ दिए। राज्य की राजनीति, जो अब तक डीएमके और एआईएडीएमके के इर्द-गिर्द घूमती थी, उसमें अब विजय एक निर्णायक फैक्टर बनकर उभरे। कई सीटों पर उनकी पार्टी की मौजूदगी ने जीत-हार का अंतर तय किया। यही वजह है कि अब उन्हें 'किंगमेकर' कहा जा रहा है-ऐसा नेता, जो खुद मुख्यमंत्री बने या नहीं, लेकिन यह तय जरूर कर सकता है कि सरकार किसकी बनेगी।
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फिल्मी हीरो से सियासी ताकत तक का सफर
थलपति विजय का यह सफर किसी फिल्मी कहानी जैसा ही लगता है। एक ओर करूर जैसी त्रासदी, दूसरी ओर जनता का भरोसा जीतने की जंग। इन सबके बीच उन्होंने खुद को एक नए रूप में ढाला। आज वे सिर्फ एक अभिनेता या नेता नहीं, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में एक मजबूत शक्ति के रूप में देखे जा रहे हैं। तमिलनाडु की सियासत में अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे विजय क्या कदम उठाते हैं। क्या वे खुद सत्ता की ओर बढ़ेंगे या पर्दे के पीछे रहकर खेल तय करेंगे-यह आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि करूर हादसे के बाद जिन्हें खत्म माना जा रहा था, वही आज सत्ता के सबसे बड़े खिलाड़ी बन चुके हैं।












