उप-शास्त्रीय संगीतः नवरात्र की सुबह गुरुवन में आस्था शुक्ला की ठुमरी, दादरा और कजरी से सजे सुर

भोपाल के नीलबड़ स्थित गुरुवन में आयोजित मासिक संगीत बैठक में अमेरिका के न्यू जर्सी से आईं शास्त्रीय एवं उप शास्त्रीय गायिका आस्था शुक्ला ने ठुमरी, दादरा, कजरी, झूला गायन और गजलों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। पंडित किरण देशपांडे के आयोजन में सारंगी, तबले और हारमोनियम की संगत ने कार्यक्रम को यादगार बनाया।
उप-शास्त्रीय संगीतः नवरात्र की सुबह गुरुवन में आस्था शुक्ला की ठुमरी, दादरा और कजरी से सजे सुर
भोपाल। नीलबड़ स्थित गुरुवन में मासिक संगीत बैठक में शास्त्रीय और उप शास्त्रीय गायिका आस्था शुक्ला ने प्रस्तुतियां दीं।

भोपाल। भारतीय शास्त्रीय संगीत की रागात्मक गरिमा, उपशास्त्रीय गायन की भाव-संपन्नता और लोक-संस्कृति की सहज मिठास से सजी नवरात्र की सुबह कई संगीत प्रेमियों के लिए विशेष बन गई। नीलबड़ स्थित गुरुवन में जाने-माने तबला वादक व संगीत मर्मज्ञ पंडित किरण देशपांडे द्वारा आयोजित संगीतमय सुबह में सुरों का अनुपम संसार साकार हुआ। इस मासिक संगीत बैठक में अमेरिका के न्यू जर्सी में भारतीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ा रहीं शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय गायिका आस्था शुक्ला ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ठुमरी की नजाकत, दादरा की चपलता, कजरी की माटी-सुगंध, झूला गायन की सावनी उमंग और ग़ज़लों की दिलकश अभिव्यक्ति ने सभा को यादगार बना दिया।आस्था शुक्ला की गायकी में रागदारी की परिपक्वता, शब्दों की भावानुकूल अभिव्यक्ति और उपशास्त्रीय संगीत की विशिष्ट मिठास का सुंदर समन्वय सुनने को मिला।

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गुरुवन में संगीत प्रस्तुतियों के दौरान मौजूद श्रोतागण

कारे मतवारे मन हर लीना श्याम…से शुभारंभ

गायिका आस्था शुक्ला ने बैठक का शुभारंभ राग मिश्र खमाज़ में निबद्ध ठुमरी ‘कारे मतवारे मन हर लीनो श्याम, मद से भरे तोरे नैन..’ से किया। ठुमरी की भावप्रधान प्रकृति में शृंगार, अनुराग और कृष्ण-प्रेम की कोमल अनुभूतियां सहज रूप से अभिव्यक्त होती हैं। इस प्रस्तुति ने उपशास्त्रीय संगीत के उस सौंदर्य को सामने रखा, जहां राग की मर्यादा के साथ शब्दों की नजाकत और भावों की सहजता श्रोताओं के मन को स्पर्श करती है। अपनी विशिष्ट प्रस्तुतियों में एक कजरी ‘सावन की ऋतु आई रे..’ प्रस्तुत की तथा झूला गायन के अंतर्गत ‘धमकि झुकि आई बदरिया कारी, झूला झूले नंद किशोर..’ सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इसके पश्चात राग मिश्र गारा में एक दादरा ‘सावरिया नजरिया काहे मारे...’ को विस्तार दिया।  कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं के विशेष आग्रह पर प्रस्तुत की गईं उनकी चुनिंदा ग़ज़लों ने महफ़िल में ऐसा समां बांधा कि देर तक तालियां गूंजती रहीं।

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सारंगी और तबले की संगत ने संवारे सुर 

कार्यक्रम में शास्त्रीय गायिका डॉ. संगीता गोस्वामी ने सुमधुर सरस्वती वंदना की। गायन को सशक्त संगत प्रदान की युवा कलाकार एवं अजराड़ा घराने के प्रतिष्ठित तबला वादक रामेन्द्र सिंह सोलंकी ने। सारंगी पर ग्वालियर से आए अब्दुल हमीद खां ने संगत की। वहीं हारमोनियम पर युवा कलाकार अमय पाठक ने संगत की। तीनों ही वादकों ने अपनी जुगलबंदी से श्रोताओं की दाद हासिल की।गुरुवन की यह बैठक यादगार बन गई।

गुरु-परंपरा से वैश्विक मंच तक संगीत की यात्रा

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गायिका आस्था शुक्ला

ग्वालियर घराने की प्रतिनिधि गायिका आस्था शुक्ला ने बताया कि उन्हें संगीत के प्रारंभिक संस्कार माता डॉ. वीणापाणि शुक्ला से प्राप्त हुए। इसके बाद पंडित काशीनाथ शंकर बोडस तथा ग्वालियर घराने की प्रख्यात विदुषी स्व. वीणा सहस्रबुद्धे से विधिवत संगीत-शिक्षा हासिल की। वे ख्याल, ठुमरी, दादरा, गज़ल और भजन जैसी विविध विधाओं में दक्ष श्रीमती शुक्ला वर्ष 2002 से अमेरिका में ‘स्वरवीणा स्कूल ऑफ म्यूजिक’ के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संगीत और संस्कृति से जोड़ रही हैं। उनकी संगीत-साधना भारतीय परंपरा की वैश्विक उपस्थिति और सांस्कृतिक निरंतरता का सुंदर उदाहरण है। 

अब से कला रसिकों के लिए हर माह होगा आयोजन

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संगीतज्ञ पं. किरण देशपांडे

संगीतज्ञ पं. किरण देशपांडे ने कहा कि ‘संगीत ईश्वर की देन है और सातों स्वरों में समाज को जोड़ने की शक्ति है’। इसी भावभूमि पर आयोजित इस बैठक में संगीत केवल कला नहीं, बल्कि संवेदनाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाली साधना के रूप में सामने आया। भोपाल में कला-संगीत का गढ़ है और उसे और सिंचित करने के लिए अब से गुरुवन में हर माह बैठकों का आयोजन होगा, जिसमें कला रसिक कलाकारों को सुन सकेंगे। गुरुवन की यह बैठक भारतीय शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा की निरंतरता और संगीत की वैश्विक एकात्मता का यादगार उत्सव बन गई। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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