बांधवगढ़ में रेडियो कॉलर से नर हाथी के गले में हुआ घाव, 10 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद हटाया कॉलर

जबलपुर। चंदिया परिक्षेत्र की मझगवां बीट में हुए इस अभियान में 80 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी और तीन वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी जुटे।
9 सितंबर को हाथी को छोड़ा गया था
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि हाथी को 9 सितंबर 2025 को कान्हा टाइगर रिजर्व में रेडियो कॉलर पहनाने के बाद बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था। करीब एक साल तक विभिन्न परिक्षेत्रों में घूमने के बाद वह 2 अक्टूबर 2026 को चंदिया परिक्षेत्र की मझगवां बीट के कंपार्टमेंट क्रमांक आरएफ-11 में पहुंचा। इस क्षेत्र से ग्रामीण आबादी लगी होने के कारण हाथी के बार-बार गांव की ओर जाने की आशंका थी। इसे देखते हुए विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जो कि सफल रहा।
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कॉलर की कसावट से बना घाव
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट एवं वेटरनरी डॉक्टर अभय सेंगर ने बताया कि क्षेत्र संचालक के निर्देशन में किए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पाया गया कि नर हाथी के लगातार रेडियो कॉलर पहने रहने और हाथी की शारीरिक अवस्था में वृद्धि होने से कॉलर कस गया था। रेस्क्यू के दौरान कॉलर हटाया और घाव की ड्रेसिंग की। पूरी कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के अनुसार की गई।
कल्लवाह रेंज में रखेंगे निगरानी में
रेस्क्यू के बाद हाथी के परिवहन की प्रक्रिया शुरू की गई। उसे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की कल्लवाह रेंज में बनाए गए अस्थायी निगरानी क्षेत्र में रखा जाएगा। अभियान में क्षेत्र संचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, वन संरक्षक शहडोल, वन मंडलाधिकारी उमरिया, उपसंचालक बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और रेस्क्यू टीम शामिल रही।




















