5 राज्यों की सत्ता किसके हाथ?कुछ ही घंटों में साफ होगी तस्वीर! कौन बनाएगा सरकार?

देश की राजनीति का आज सबसे बड़ा दिन। कुछ ही घंटों में तस्वीर साफ हो जाएगी किस राज्य में किसकी सरकार बनेगी, किसकी कुर्सी बचेगी और किसकी सियासत फिसलेगी। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी पांचों राज्यों के नतीजे आज यानी 4 मई को सामने आएंगे। सुबह से मतगणना शुरू हो चुकी है और शाम तक पूरा गणित साफ हो जाएगा। इस बार के चुनाव सिर्फ सीटों का खेल नहीं हैं यह पकड़ और भविष्य की राजनीति का बड़ा इम्तिहान है।
आज आएंगे 5 राज्यों के चुनाव नतीजे
आज पूरे देश की नजर इन पांच राज्यों पर टिकी है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी इन सभी जगहों पर हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम आज घोषित होंगे। मतगणना सुबह शुरू हो चुकी है और धीरे-धीरे रुझान आने लगे हैं। शाम तक ये साफ हो जाएगा कि किस राज्य में कौन सरकार बनाएगा। इस बार कई राज्यों में वोटिंग प्रतिशत भी बेहतर रहा है, जिससे मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।
कब-कब हुई थी वोटिंग?
चुनाव अलग-अलग तारीखों पर हुए थे असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हुआ।तमिलनाडु की सभी सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान हुआ पहला 23 अप्रैल को 152 सीटें पर और दूसरा 29 अप्रैल को 142 सीटें पर। अब इन सभी का रिजल्ट आज सामने आएगा।
बंगाल की एक सीट पर फिर होगा चुनाव
पश्चिम बंगाल की फलता सीट पर हुए मतदान को चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया था। यहां बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोप लगे थे और वीडियो भी सामने आए थे। अब इस सीट पर 21 मई को दोबारा वोटिंग होगी और 24 मई को इसका रिजल्ट आएगा। बाकी 293 सीटों के नतीजे आज घोषित होंगे।
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पश्चिम बंगाल- 8 सीटें जो तय करेंगी सियासत
बंगाल की लड़ाई इस बार बेहद हाई-प्रोफाइल रही है। कुछ सीटें ऐसी हैं, जहां पूरा देश नजर टिकाए बैठा है।
- भवानीपुर: सबसे बड़ा मुकाबला- यह सीट सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी आमने-सामने हैं।
- नंदीग्राम: रिश्ते से टकराव तक- यहां मुकाबला है सुवेंदु अधिकारी और पवित्र कर के बीच। पवित्र कर कभी सुवेंदु के करीबी माने जाते थे, अब उनके खिलाफ मैदान में हैं।
- दिनहाटा: यह सीट हमेशा से कांटे की टक्कर के लिए जानी जाती है। पहले यहां जीत-हार का अंतर सिर्फ 57 वोट तक रहा है
- आसनसोल दक्षिण: बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल और टीएमसी के तापस बनर्जी आमने-सामने हैं।
- पानीहाटी: बीजेपी ने आरजी कर मेडिकल यहां पीड़ित परिवार से जुड़े चेहरे को टिकट दिया है। टीएमसी की मजबूत पकड़ को चुनौती मिल रही है।
- भांगर: अल्पसंख्यक वोट का असर। ISF और TMC के बीच सीधी टक्कर। यह सीट समीकरण बदल सकती है।
- बहरामपुर: यहां कांग्रेस, बीजेपी और TMC तीनों आमने-सामने हैं। यहां नतीजा चौंका सकता है।
- शमशेरगंज: हालिया घटनाओं के कारण यह सीट बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। तीनों प्रमुख दलों में कड़ा मुकाबला है।
असम: NDA की वापसी या बदलाव?
असम में इस बार NDA गठबंधन मजबूत नजर आ रहा है। कई एग्जिट पोल में उसकी वापसी की संभावना जताई गई है।
हाई-प्रोफाइल सीटें:
- जालुकबारी: यह सीट राज्य की सबसे वीआईपी सीट मानी जाती है, जहां से हिमंता बिस्वा सरमा चुनाव लड़ रहे हैं। यहां जीत सिर्फ सीट की नहीं, बल्कि नेतृत्व की ताकत का संकेत होगी। बड़ा जीत अंतर NDA के पक्ष में माहौल को मजबूत कर सकता है।
- शिवसागर: इस सीट पर अखिल गोगोई के कारण मुकाबला बेहद खास हो गया है। यह चुनाव सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि जमीनी आंदोलनों और राजनीतिक ताकत के बीच की लड़ाई बन गया है।
- ढेकियाजुली: यहां अशोक सिंघल के चलते सीट हाई-प्रोफाइल बनी हुई है। विकास और संगठन के दम पर बीजेपी यहां अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में है, जबकि विपक्ष इसे चुनौती देने में जुटा है।
- सिसिबोरगांव: इस सीट पर निर्दलीय नंदीगिरी भुयान मुकाबले को दिलचस्प बना रहे हैं। यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है, जो नतीजों में बड़ा उलटफेर कर सकता है।
- गोलाघाट और बोकाखाट भी अहम यहां नतीजे सीधे सत्ता की दिशा तय करेंगे।
पुडुचेरी: छोटा राज्य, बड़ा असर
पुडुचेरी में NDA को बढ़त मिलने का अनुमान है। 16 से 20 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यहां पिछले चुनाव में बहुत कम अंतर से जीत-हार हुई थी, इसलिए हर वोट अहम है।
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अहम सीटें:
- थट्टांचावडी- यह सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है, जहां स्थानीय मुद्दे और संगठन की ताकत दोनों का असर दिखता है। छोटे मार्जिन की वजह से यह सीट रिजल्ट में बड़ा ट्विस्ट ला सकती है।
- यानम- एन. रंगासामी का प्रभाव इस सीट पर हमेशा खास माना जाता है। यानम को उनका पारंपरिक गढ़ भी कहा जाता है, इसलिए यहां का नतीजा सीधे नेतृत्व की साख से जुड़ जाता है। यह सीट अक्सर पूरे राज्य के राजनीतिक मूड का संकेत देती है।
- नेल्लीथोप- नेल्लीथोप पुडुचेरी की उन सीटों में से है जहां हर चुनाव में कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है। यहां वोटिंग पैटर्न तेजी से बदलता है और स्थानीय मुद्दे परिणाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
- कराईकल क्षेत्र- कराईकल क्षेत्र की सभी सीटें मिलकर चुनावी गणित बदलने की क्षमता रखती हैं। यहां ग्रामीण और शहरी वोटरों का मिश्रण देखने को मिलता है, जिससे हर पार्टी को संतुलित रणनीति बनानी पड़ती है। पिछले चुनावों में भी इस क्षेत्र ने सत्ता का पूरा समीकरण पलट दिया था।
तमिलनाडु: सत्ता की असली जंग
तमिलनाडु में इस बार मुकाबला सिर्फ दो पार्टियों के बीच नहीं है। नई एंट्री ने खेल और दिलचस्प बना दिया है।
बड़ी सीटें:
- कोलाथुर: यह सीट मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम. के. स्टालिन की प्रतिष्ठा की सीट है। कोलाथुर सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि DMK की राजनीतिक ताकत का प्रतीक माना जाता है।
- चेपॉक: यह सीट उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की राजनीतिक साख से जुड़ी है। चेपॉक हमेशा से हाई-प्रोफाइल सीट रही है, जहां हर चुनाव में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है।
- एडापडी: यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी का गढ़ मानी जाती है। यह क्षेत्र AIADMK के लिए संगठनात्मक ताकत और वापसी की उम्मीद का केंद्र है।
- मदुरै ईस्ट: इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है अभिनेता से नेता बने थलापति विजय। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) पहली बार चुनावी मैदान में है।
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केरल: बदलती हवा या वही कहानी?
केरल में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। एग्जिट पोल में कांग्रेस गठबंधन की वापसी के संकेत हैं।
प्रमुख सीटें:
- पेरावूर: इस सीट पर मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है। यहां स्थानीय नेतृत्व और संगठन दोनों की असली परीक्षा है। हर वोट नतीजे को पलटने की क्षमता रखता है, इसलिए यह सीट पूरे राज्य में सबसे ज्यादा नजरों में है।
- पूंजार: पूंजार सीट पर बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। यह सीट पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है, जहां जीत उसे राज्य में नई राजनीतिक जगह दिला सकती है।
- त्रिशूर: त्रिशूर को केरल की सबसे अहम और ट्रेंड सेट करने वाली सीटों में गिना जाता है। लोकसभा के बाद यहां राजनीतिक माहौल और भी दिलचस्प हो गया है।
- मट्टन्नूर और पाला भी अहम: मट्टन्नूर पारंपरिक रूप से LDF का मजबूत इलाका माना जाता है, जबकि पाला सीट पर मुकाबला हमेशा अप्रत्याशित रहा है।
आज का दिन सिर्फ नतीजों का नहीं, दिशा का है। इन चुनावों से आने वाले समय की राजनीति तय होगी।











