पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता को लेकर पूरी दुनिया की नजरें यहां टिकी हैं। लेकिन इस अहम घटनाक्रम के बीच एक अलग ही पहलू चर्चा का विषय बन गया-पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ‘ड्रेस डिप्लोमेसी’। एक ही दिन में अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्होंने दो बिल्कुल अलग अंदाज अपनाए-ईरानी प्रतिनिधिमंडल से कॉम्बैट यूनिफॉर्म में और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से औपचारिक सूट में। इस बदलाव ने कूटनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटनाक्रम के अनुसार जब ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा तो आसिम मुनीर ने उनसे मुलाकात सैन्य वर्दी यानी कॉम्बैट गियर में की। यह सामान्य प्रोटोकॉल से थोड़ा अलग था क्योंकि आमतौर पर इस तरह की बैठकों में औपचारिक पोशाक अपनाई जाती है। इसके कुछ ही घंटों बाद जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान पहुंचे, तो मुनीर का अंदाज पूरी तरह बदल चुका था। इस बार वे काले रंग के औपचारिक सूट में नजर आए और पूरी तरह एक राजनयिक नेता की तरह व्यवहार करते दिखे।
कूटनीति में केवल शब्द ही नहीं बल्कि हावभाव, मंच और यहां तक कि पहनावा भी संदेश देता है। इसे ही ‘ड्रेस डिप्लोमेसी’ कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आसिम मुनीर ने जानबूझकर यह रणनीति अपनाई ताकि अलग-अलग देशों को अलग-अलग संकेत दिए जा सकें। ईरान के साथ रिश्तों में हाल के वर्षों में तनाव रहा है। ऐसे में वर्दी में मुलाकात करना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अपनी सुरक्षा और सैन्य ताकत को लेकर सतर्क और गंभीर है।
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विशेषज्ञों के अनुसार ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सामने कॉम्बैट ड्रेस में आना एक सख्त संदेश हो सकता है। यह संकेत देता है कि पाकिस्तान अपनी सीमाओं और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पिछले समय में दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव और सैन्य घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में यह कदम ईरान को यह बताने की कोशिश हो सकती है कि पाकिस्तान की सेना पूरी तरह सतर्क है और हर स्थिति के लिए तैयार है।
वहीं दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के सामने सूट पहनकर आना एक अलग ही संदेश देता है। यह दिखाता है कि आसिम मुनीर केवल एक सैन्य अधिकारी नहीं बल्कि एक कूटनीतिक और राजनीतिक समझ रखने वाले नेता भी हैं। अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंध हमेशा रणनीतिक रहे हैं। ऐसे में औपचारिक सूट पहनकर मुलाकात करना यह दर्शाता है कि वे इस रिश्ते को गंभीरता से लेते हैं और खुद को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार प्रतिनिधि के रूप में पेश करना चाहते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को पाकिस्तान के आंतरिक सत्ता समीकरण से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आमतौर पर किसी भी देश में विदेशी प्रतिनिधियों का स्वागत प्रधानमंत्री या सरकार के वरिष्ठ मंत्री करते हैं। लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ नहीं बल्कि सेना प्रमुख आसिम मुनीर रहे। यह स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि पाकिस्तान की राजनीति में सेना का प्रभाव अब भी काफी मजबूत है। मुनीर की सक्रिय भूमिका यह दर्शाती है कि विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े बड़े फैसलों में उनकी अहम भूमिका है।
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जेडी वेंस के स्वागत के दौरान रेड कार्पेट पर आसिम मुनीर की मौजूदगी और उनकी बॉडी लैंग्वेज भी चर्चा में रही। वे आत्मविश्वास के साथ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ चलते और बातचीत करते नजर आए। विशेषज्ञ इसे पावर प्रोजेक्शन यानी ताकत के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि यह केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी बल्कि इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि पाकिस्तान में असली निर्णय लेने की शक्ति कहां केंद्रित है।
हालांकि अमेरिकी पक्ष ने भी संतुलन बनाए रखने की कोशिश की। जेडी वेंस ने पाकिस्तान के नागरिक प्रशासन के साथ भी मुलाकात कर यह संदेश दिया कि वे केवल सेना ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का भी सम्मान करते हैं।