आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 :14 या 15 कब है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? जानें सही तिथि, पूजा विधि और महत्व

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह नौ दिनों का विशेष समय मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की आराधना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान विधि-विधान से की गई पूजा, जप, तप और साधना से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कब से शुरू हो रही है, इसका धार्मिक महत्व, पूजा विधि और इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए।
कब है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है। यह नौ दिनों तक चलती है और नवमी तिथि पर इसका समापन होता है। इन दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की विशेष पूजा और साधना की जाती है। सामान्य नवरात्रि की तरह इसका उत्सव सार्वजनिक रूप से नहीं मनाया जाता, बल्कि इसे गुप्त रूप से साधना और आराधना का पर्व माना जाता है।
घटस्थापना मुहूर्त - 05:33 ए एम से 10:09 ए एम
अवधि - 04 घण्टे 36 मिनट्स
घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि पर है।
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ - जुलाई 14, 2026 को 03:12 पी एम बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त - जुलाई 15, 2026 को 11:50 ए एम बजे
क्या है गुप्त नवरात्रि का महत्व?
नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। साल में कुल चार नवरात्रि आती हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती हैं, जबकि माघ और आषाढ़ की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इन दिनों में मां दुर्गा की दस महाविद्याओं की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा करने पर साधक को आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और विशेष कृपा प्राप्त होती है।
क्यों खास मानी जाती है आषाढ़ गुप्त नवरात्रि?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय तंत्र, मंत्र और साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। जो लोग किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति, बाधाओं से मुक्ति, आत्मबल बढ़ाने या आध्यात्मिक साधना करना चाहते हैं, उनके लिए यह पर्व बेहद शुभ माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि इन दिनों में किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है।
इन दिनों करें ये खास काम
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान रोज सुबह और शाम मां दुर्गा की पूजा करना शुभ माना जाता है। दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करना भी शुभ माना गया है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिन या फिर पहले और आखिरी दिन व्रत भी रखते हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इसके बाद घर के मंदिर में लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसके पास विधि-विधान से कलश स्थापित करें। कलश में साफ पानी और थोड़ा गंगाजल डालें। उसके मुख पर आम के पत्ते रखें और ऊपर लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल स्थापित करें।
इसके बाद फूल, धूप, दीप, कपूर और अगरबत्ती से मां दुर्गा की पंचोपचार पूजा करें। पूजा के अंत में माता की आरती करें और उन्हें फल, मिठाई या अपनी श्रद्धा अनुसार भोग अर्पित करें। पूरे नौ दिनों तक सुबह-शाम मां अंबे की आराधना करें। अंतिम दिन कन्या पूजन और भोजन कराने के बाद पूजा का समापन करें।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
गुप्त नवरात्रि के दौरान घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। पूजा करते समय मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें। सात्विक भोजन करें और क्रोध, झूठ तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहें। यदि किसी विशेष साधना का संकल्प लिया है तो उसे नियमपूर्वक पूरा करें। मान्यता है कि श्रद्धा, संयम और नियम के साथ की गई पूजा से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।











