WPI Inflation:अप्रैल में थोक महंगाई 8.30% पर पहुंची, 42 महीने का सबसे ऊंचा स्तर

देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर दोगुने से ज्यादा बढ़कर 8.30% पर पहुंच गई है। मार्च में यह 3.88% थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए। यह अक्टूबर 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। तब थोक महंगाई 8.39% पर पहुंची थी। महंगाई में इस तेज बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह रोजमर्रा की जरूरत की चीजों और ईंधन की कीमतों में उछाल है। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं जिसका असर अब भारतीय बाजार पर भी साफ दिखने लगा है।
फ्यूल और पावर सेक्टर में सबसे ज्यादा बढ़ी महंगाई
अप्रैल में फ्यूल और पावर कैटेगरी की थोक महंगाई दर 1.05% से बढ़कर 24.71% पर पहुंच गई। पेट्रोल-डीजल और ऊर्जा लागत बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन और उत्पादन खर्च भी तेजी से बढ़ा है। वहीं रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों यानी प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई 6.36% से बढ़कर 9.17% हो गई। इसमें अनाज, सब्जियां, गेहूं और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं।
खाने-पीने की चीजें भी हुईं महंगी
फूड इंडेक्स यानी खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर अप्रैल में 1.85% से बढ़कर 1.98% हो गई। दूसरी ओर मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई 3.39% से बढ़कर 4.62% दर्ज की गई। WPI में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की होती है जिसका वेटेज 64.23% है। इसके बाद प्राइमरी आर्टिकल्स का वेटेज 22.62% और फ्यूल एंड पावर का 13.15% है।
रिटेल महंगाई भी बढ़ी
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई (CPI) में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अप्रैल में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई जबकि मार्च में यह 3.40% थी। फूड इन्फ्लेशन अप्रैल में 4.20% रही जो मार्च में 3.87% थी।
लंबे समय तक महंगाई बढ़ी तो बढ़ेगा बोझ
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर थोक महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है तो कंपनियां उत्पादन लागत का बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर देती हैं। इससे बाजार में सामान और महंगे हो सकते हैं। सरकार टैक्स और एक्साइज ड्यूटी में बदलाव करके कुछ राहत देने की कोशिश कर सकती है। पहले भी कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटा चुकी है। हालांकि इसकी भी एक सीमा होती है।
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कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी नजर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। अगर यह तनाव लंबा चलता है तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है।












