मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। कोतमा बस स्टैंड के पास स्थित अग्रवाल लॉज की तीन मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। लोग समझ ही नहीं पाए कि कुछ सेकंड में खड़ी इमारत कैसे मलबे में तब्दील हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और हर तरफ चीख-पुकार गूंज उठी।
इस हादसे में अब तक हनुमान दीन यादव (55) और उनके साले राम कृपाल यादव (40) की मौत की पुष्टि हो चुकी थी। लेकिन रविवार सुबह करीब 11 बजे मलबे से एक महिला का शव भी बरामद किया गया, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अभी भी कुछ लोग दबे हो सकते हैं। यही वजह है कि राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है।
हादसे के करीब 18 घंटे बीत जाने के बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन थमा नहीं है। मौके पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, लोकल समेत 100 से ज्यादा लोग इस अभियान में शामिल हैं। इसके अलावा सर्चिंग ऑपरेशन को तेज करने के लिए भिलाई और बनारस से भी विशेषज्ञ टीमों को बुलाया गया है। रातभर चलाए गए ऑपरेशन के दौरान मलबा हटाने में काफी सावधानी बरती जा रही है, ताकि नीचे दबे लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
भिलाई और बनारस से भी बचाव टीमों को मौके पर बुलाया गया है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इमारत एक तरफ झुककर गिरी। बताया जा रहा है कि पास में निर्माण कार्य के लिए करीब 12 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था। इस गड्ढे में पानी भर गया था, जिससे इमारत की नींव कमजोर हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण हो सकता है कि बिल्डिंग अचानक ढह गई। हालांकि अभी इस मामले की आधिकारिक जांच जारी है और प्रशासन पूरी रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है।
हादसे के बाद अब निर्माण कार्य और अनुमति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर पालिका अधिकारियों का कहना है कि इमारत और पास में चल रहे निर्माण कार्य के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या निर्माण कार्य नियमों के तहत किया जा रहा था या नहीं। अगर किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इमारत गिरने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। कई लोग अपने परिजनों की तलाश में इधर-उधर भटकते नजर आए। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी इमारत में दरारें देखी थीं लेकिन इस तरह का हादसा हो जाएगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
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रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय के खिलाफ लड़ाई है। हर बीतता मिनट मलबे में दबे लोगों के लिए खतरा बढ़ा रहा है। टीमें हर संभव कोशिश कर रही हैं कि जल्द से जल्द सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। इसके लिए आधुनिक उपकरणों और तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
निर्माण विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हादसे आमतौर पर लापरवाही के कारण होते हैं। अगर आसपास गहरी खुदाई की जा रही हो, तो इमारत की नींव को मजबूत करने के लिए विशेष सावधानी बरतनी जरूरी होती है। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो जमीन खिसकने या पानी भरने से इमारत अस्थिर हो सकती है, जैसा कि इस मामले में देखने को मिला।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की जांच अहम होगी। यह तय किया जाएगा कि हादसे के पीछे किसकी लापरवाही थी और किस स्तर पर गलती हुई। यदि निर्माण नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित ठेकेदार, बिल्डर या जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।