बिजनेस डेस्क। देश के बड़े उद्योगपतियों में शामिल अनिल अंबानी एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह उनके और उनकी कंपनियों से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक लोन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि, यह कार्रवाई उन आरोपों की जांच का हिस्सा है जिनमें दावा किया गया है कि बैंकों से लिए गए हजारों करोड़ रुपए के लोन का इस्तेमाल तय उद्देश्यों के बजाय दूसरी जगहों पर किया गया।
ईडी की लगभग 15 अलग-अलग टीमों ने मुंबई और हैदराबाद में करीब 10 से 12 लोकेशनों पर छापेमारी की। इन जगहों में रिलायंस ग्रुप की कंपनियों से जुड़े कार्यालय, अधिकारियों के ठिकाने और कुछ अन्य संबंधित परिसरों को शामिल किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ED की टीम सुबह होने से पहले ही इन लोकेशनों पर पहुंच गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के परिसरों की तलाशी ली और कई अहम दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई मुख्य रूप से रिलायंस पावर और उससे जुड़ी कंपनियों के साथ-साथ रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित बताई जा रही है।
ED अधिकारियों का कहना है कि, छापेमारी के दौरान कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा की भी जांच की जा रही है। इन दस्तावेजों से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या बैंकों से लिए गए लोन का इस्तेमाल नियमों के अनुसार हुआ या नहीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अनिल अंबानी की कंपनियों पर देशी और विदेशी बैंकों का कुल करीब ₹40,185 करोड़ का कर्ज बकाया है। ED का आरोप है कि, इन कंपनियों ने बैंकों से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया था, लेकिन बाद में इन फंड्स का इस्तेमाल कथित तौर पर अलग-अलग कंपनियों के जरिए घुमाने या अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।
इस मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने पहले ही ₹2200 करोड़ से ज्यादा के बैंकिंग फ्रॉड का मामला दर्ज किया था। इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की।
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इस मामले में जांच एजेंसियां पहले भी अनिल अंबानी से पूछताछ कर चुकी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले हफ्ते ED ने उनसे करीब 9 से 10 घंटे तक पूछताछ की थी। यह पूछताछ दिल्ली स्थित ED मुख्यालय में की गई थी। पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने उनसे कई अहम सवाल पूछे, जिनमें शामिल थे-
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि, क्या इन कंपनियों ने विदेशों में फंड ट्रांसफर करने के लिए किसी जटिल वित्तीय संरचना का इस्तेमाल किया था।
अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर मुख्य आरोप यह है कि, बैंकों से लिए गए फंड्स को कथित तौर पर व्यवसायिक परियोजनाओं के बजाय अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया। सरल भाषा में समझें तो आरोप यह है कि, कंपनियों ने नई मशीनें खरीदने, टेलीकॉम टावर लगाने और इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं विकसित करने जैसे कामों के लिए बैंकों से भारी कर्ज लिया।
जांच एजेंसियों का दावा है कि, इन पैसों का बड़ा हिस्सा वास्तविक परियोजनाओं में लगाने के बजाय कई अलग-अलग कंपनियों और खातों के बीच ट्रांसफर किया गया। कुछ मामलों में यह भी आरोप है कि, पैसा शेल कंपनियों को लोन या पेमेंट के नाम पर भेजा गया, जिससे वास्तविक उपयोग को छिपाया जा सके।
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ED इस मामले में पहले भी बड़ी कार्रवाई कर चुकी है। जांच के दौरान एजेंसी ने अनिल अंबानी से जुड़ी कई संपत्तियों को प्रोविजनल तौर पर अटैच किया था। इनमें मुंबई में स्थित 17 मंजिला आलीशान घर ‘अबोड’, अन्य रियल एस्टेट संपत्तियां और कई कंपनियों से जुड़ी वित्तीय संपत्तियां शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक अटैच की गई संपत्तियों की कुल कीमत करीब ₹15,000 करोड़ तक पहुंच चुकी है। इनमें से एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमत अकेले लगभग ₹3,761 करोड़ बताई गई है।
ED की जांच केवल बैंकिंग फ्रॉड तक सीमित नहीं है। एजेंसी यस बैंक से जुड़े एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामले की भी जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में भी अनिल अंबानी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
हालांकि अधिकारियों के अनुसार, वह उस मामले में पूछताछ के लिए पेश नहीं हुए थे, जिसके बाद जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई और तेज कर दी।
दिलचस्प बात यह रही कि ED की छापेमारी की खबरों के बीच भी बाजार में अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली। रिलायंस पावर का शेयर लगभग 2% बढ़कर करीब ₹23 तक पहुंच गया। वहीं रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का शेयर 4% से ज्यादा उछलकर करीब ₹94.20 पर कारोबार करता नजर आया।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि, निवेशकों को उम्मीद है कि जांच के बावजूद कंपनियों का संचालन जारी रहेगा और भविष्य में वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है।
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रिलायंस पावर अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप की प्रमुख कंपनियों में से एक है। यह कंपनी बिजली उत्पादन और वितरण के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी के पोर्टफोलियो में कई तरह की ऊर्जा परियोजनाएं शामिल हैं-
देश के ऊर्जा क्षेत्र में यह कंपनी एक समय बड़ी भूमिका निभाती रही है, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसे भारी कर्ज और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
इस पूरे मामले की शुरुआत 2019 में दर्ज CBI की FIR से हुई थी। CBI ने आरोप लगाया था कि, रिलायंस कम्युनिकेशंस और उससे जुड़ी कंपनियों ने बैंकों से लिए गए कर्ज में कथित अनियमितताएं कीं।
इसी FIR के आधार पर ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की। तब से लेकर अब तक जांच एजेंसियां लगातार इस मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों और कंपनियों के नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि, ED की यह छापेमारी जांच का एक अहम चरण है। छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल डेटा के आधार पर एजेंसी आगे और पूछताछ कर सकती है, नए आरोप जोड़ सकती है और अतिरिक्त संपत्तियों को अटैच कर सकती है। अगर जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के ठोस सबूत मिलते हैं, तो भविष्य में इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने की संभावना भी बन सकती है।