
इंदौर। स्नेह नगर के श्री बेलेश्वर महादेव मंदिर में हुए हादसे में पाटीदार समाज के 11 लोगों का निधन हुआ है। समाज की धर्मशाला में 11 अर्थियां एक साथ बनीं। शुक्रवार शाम 4:00 बजे इन सभी का अंतिम संस्कार किया गया। पाटीदार समाज की धर्मशाला से सभी की शवयात्रा निकलीं तो माहौल गमगीन हो गया। इतनी बड़ी संख्या में समाज के लोगों के निधन पर समाज में आक्रोश है। इनका कहना है कि पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था ठीक होती तो इतनी बड़ी संख्या में मौतें नहीं होतीं।
घटना को लेकर पाटीदार समाज के लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि हादसा तो हो चुका था। लेकिन प्रशासन का सहयोग समय पर मिलता तो मौतों का आंकड़ा कम किया जा सकता था। पाटीदार समाज के उपाध्यक्ष कीर्ति भाई पटेल ने बताया कि घटना में हमारे समाज के कई लोग चपेट में आए थे। हमारे लोगों ने रेस्क्यू शुरू किया। कुछ लोगों को निकाल भी लिया था, लेकिन पुलिस ने हमें डंडे मारकर भगा दिया। मैं स्वयं पांच मिनट में पहुंच गया था। मैं रस्सी डालकर खड़ा था, जिसमें सात आदमी लटके थे। लेकिन प्रशासन ने हमें डंडे मारकर भगा दिया। इससे वे सभी बावड़ी में गिर गए। पटेल का कहना है कि प्रशासन हमें रेस्क्यू करने देता तो शायद हम अधिक लोगों को निकाल पाते।
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— Peoples Samachar (@psamachar1) March 31, 2023
पाटीदार समाज के इन लोगों की मौत
इस हादसे में पुष्पा बेन पटेल (50), कस्तूरबा बेन पटेल (70), रक्षाबेन पटेल (60), कनक (35), विनोद पटेल (58), गोमती बेन (80), प्रियंका पटेल (30), लक्ष्मी बेन पटेल (75), शारदाबेन (55), रतन बेन (75), ज्ञान बेन (72) का निधन हुआ है। इनकी अंतिम यात्रा एक साथ निकलेगी।
सीएम से बात नहीं करने दी
पाटीदार समाज के उपाध्यक्ष कीर्ति भाई पटेल का कहना है कि कल की घटना में जिला प्रशासन की पूरी लापरवाही रही। सीएम से हमने बात करने की कोशिश की, लेकिन वे राजनीति वाली बात कर रहे थे। उन्होंने सिर्फ आश्वासन दिया। लोगों ने जब अपनी बात रखने की कोशिश की तो वे निकल लिए। इसी वजह से लोगों ने नारेबाजी की।
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पुलिस के पास रस्से तक नहीं थे
बता दें कि रेस्क्यू करने पहुंची पुलिस के पास रस्से तक के इंतजाम नहीं थे। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी रोप लाइडर से नीचे उतरे। नगर निगम को बावड़ी का पानी खाली करने का इंतजाम करने में ही 4 घंटे से ज्यादा का समय लग गया। एनडीआरएफ को सात घंटे बाद बुलाया गया, जबकि इंदौर के ही महू में छावनी , लेकिन वहां से सेना बुलाने में प्रशासन को 11 घंटे से अधिक का समय लग गया। सेना के पहुंचने के पहले तक 14 लोगों के शव मिले थे, जबकि 24 लोग तब भी लापता थे। जवानों ने चंद घंटे में ही बाकी के शवों को भी निकाल लिया।
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