Andy Burnham:लेबर पार्टी की नई उम्मीद बने एंडी बर्नहैम, क्या ब्रिटेन को मिलने वाला है नया नेता?

लंदन। लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे बर्नहैम ने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। इस जीत के बाद पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता उन्हें लेबर पार्टी को नई दिशा देने वाला चेहरा मान रहे हैं। ऐसे समय में जब पार्टी को जनमत सर्वेक्षणों और चुनावों में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, बर्नहैम की लोकप्रियता तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।
उपचुनाव की जीत ने बढ़ाया कद
मेकरफील्ड सीट पर हुए उपचुनाव में एंडी बर्नहैम ने दक्षिणपंथी पार्टी रिफॉर्म यूके को पीछे छोड़ते हुए बड़ी जीत हासिल की। इस चुनाव में लेबर पार्टी का वोट प्रतिशत भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं बल्कि बर्नहैम की राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत वापसी का संकेत है। सांसद बनने के बाद अब उनके सामने पार्टी नेतृत्व की दौड़ में उतरने का रास्ता भी खुल गया है।
साधारण परिवार से राजनीति तक का सफर
1970 में लिवरपूल में जन्मे एंडी बर्नहैम का बचपन एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में बीता। उनके पिता इंजीनियर और मां रिसेप्शनिस्ट थीं। परिवार में राजनीति को लेकर जागरूक माहौल था, जिसका असर बचपन से ही उन पर पड़ा। किशोरावस्था में उन्होंने सामाजिक मुद्दों और बेरोजगारी पर आधारित एक टीवी कार्यक्रम देखा, जिसने उन्हें लेबर पार्टी की विचारधारा से जोड़ दिया।
खेल और संगीत रहे खास रुचियां
राजनीति के अलावा बर्नहैम की पहचान खेल और संगीत प्रेमी के रूप में भी रही है। वह फुटबॉल क्लब एवरटन के कट्टर समर्थक हैं और स्कूल स्तर पर क्रिकेट भी खेल चुके हैं। संगीत में उनकी खास दिलचस्पी रही है और कई प्रसिद्ध ब्रिटिश बैंड उनके पसंदीदा रहे हैं। बर्नहैम कई बार कह चुके हैं कि संगीत ने उन्हें अपनी पहचान बनाने में मदद की।
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पत्रकारिता से शुरू हुआ करियर
कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता में काम किया। कुछ वर्षों तक व्यापारिक पत्रिकाओं से जुड़े रहने के बाद उनका रुझान पूरी तरह राजनीति की ओर हो गया। उन्होंने लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ काम किया और धीरे धीरे पार्टी संगठन में अपनी जगह बनाई। वर्ष 2001 में वे पहली बार सांसद चुने गए और इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया।
मंत्री पद से मेयर बनने तक
ब्रिटेन की लेबर सरकारों में बर्नहैम ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने संस्कृति और स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे अहम विभागों में काम किया। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़कर ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर बनने का फैसला किया। यह निर्णय उनके करियर का अहम मोड़ साबित हुआ और उन्होंने बड़े अंतर से चुनाव जीता।
कोविड काल में बढ़ी राष्ट्रीय पहचान
कोविड महामारी के दौरान एंडी बर्नहैम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए। उन्होंने क्षेत्रीय लॉकडाउन नीतियों को लेकर तत्कालीन सरकार का खुलकर विरोध किया और उत्तरी इंग्लैंड के लोगों की आवाज बनने की कोशिश की। इसी दौर में उन्हें किंग ऑफ द नॉर्थ जैसे उपनाम भी मिले। इससे उनकी लोकप्रियता अपने क्षेत्र से निकलकर पूरे देश में बढ़ी।
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क्या नेतृत्व की दौड़ में उतरेंगे बर्नहैम?
हाल के महीनों में लेबर पार्टी के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में कई सांसद एंडी बर्नहैम को पार्टी के लिए मजबूत विकल्प मान रहे हैं। स्वयं बर्नहैम भी संकेत दे चुके हैं कि यदि अवसर मिला तो वे नेतृत्व की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। उपचुनाव में मिली जीत ने उनके आत्मविश्वास और राजनीतिक प्रभाव दोनों को बढ़ाया है।











