करीब एक महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का सीजफायर लागू हुआ है। भारत ने इसे सकारात्मक कदम बताया है और साफ किया है कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर युद्धविराम का स्वागत किया है। सरकार ने कहा कि यह कदम क्षेत्र में शांति बहाली की दिशा में अहम साबित हो सकता है। भारत ने उम्मीद जताई है कि यह अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी समाधान की ओर बढ़ेगा। भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह शांति और स्थिरता के पक्ष में खड़ा है। ऐसे में यह युद्धविराम आने वाले समय में पश्चिम एशिया में हालात को सामान्य बनाने में कितना कारगर साबित होगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि बातचीत और कूटनीति ही स्थायी शांति का रास्ता है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यही संदेश देता रहा है। बता दें कि 40 दिन बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम की सहमति बनी है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष ने पूरे मिडिल ईस्ट को तनाव में डाल दिया था। जवाबी हमलों के चलते हालात और बिगड़ते गए और कई देशों पर असर पड़ा। करीब 40 दिन बाद दोनों देशों ने दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति बनाई।
लंबे समय से चल रहे इस संघर्ष ने आम नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार नेटवर्क भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से तेल सप्लाई पर असर पड़ा है।