अमरवाड़ा के ‘चप्पल कांड’ में सभी आरोपी दोषमुक्त

छिंदवाड़ा। अमरवाड़ा का बहुचर्चित 'चप्पल कांड' एक बार फिर चर्चा में है। मामला पट्टा वितरण कार्यक्रम में पार्षदों को आमंत्रित नहीं किए जाने से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन और उसके बाद हुए विवाद से जुड़ा है। कार्यक्रम में निमंत्रण नहीं मिलने से नाराज पार्षदों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसी दौरान विवाद बढ़ा और तत्कालीन नगर पालिका मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) रोशन सिंह बाथम की शिकायत पर पार्षदों समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। मामले में भाजपा पार्षद दीपा मुकेश सूर्यवंशी, बहुजन समाज पार्टी की पार्षद संतोषी दुर्गा वंशकार सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। अब लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष सत्र न्यायालय, छिंदवाड़ा ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है।
पट्टा वितरण कार्यक्रम में निमंत्रण नहीं मिलने से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, अमरवाड़ा नगर में पट्टा वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में क्षेत्र के निर्वाचित पार्षदों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर नाराजगी सामने आई। इसके बाद पार्षद दीपा मुकेश सूर्यवंशी और संतोषी दुर्गा वंशकार के साथ बड़ी संख्या में नागरिकों ने कार्यक्रम को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। संबंधित पक्ष के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में करीब 1500 से 2000 नागरिक शामिल हुए थे। पार्षदों और नागरिकों ने कार्यक्रम की व्यवस्था तथा जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी।
विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस में पहुंचा मामला
विरोध प्रदर्शन के बाद विवाद ने कानूनी रूप ले लिया। मामले की पृष्ठभूमि में तत्कालीन नगर पालिका मुख्य नगर पालिका अधिकारी रोशन सिंह बाथम की ओर से की गई शिकायत का उल्लेख किया गया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित पार्षदों एवं अन्य लोगों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं के साथ एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी की और आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया।
आरोपियों का कहना था- विरोध को दिया गया अलग रूप
मामले में आरोपी बनाए गए पक्ष का कहना रहा कि उनका विरोध पट्टा वितरण कार्यक्रम में पार्षदों को आमंत्रित नहीं किए जाने को लेकर था। उनके अनुसार, प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल थे और इसका उद्देश्य कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की भूमिका तथा नागरिकों की सहभागिता को लेकर आपत्ति दर्ज कराना था। आरोपियों की ओर से यह भी कहा जाता रहा कि घटनाक्रम को बाद में अलग रूप देकर उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कराया गया। उनका कहना था कि उनके खिलाफ दर्ज प्रकरण उनके अनुसार तथ्यों के अनुरूप नहीं था और इसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।
विशेष सत्र न्यायालय में हुई सुनवाई
पुलिस की विवेचना के बाद मामला विशेष न्यायालय पहुंचा। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए गए। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से भी आरोपियों का पक्ष रखा गया। न्यायालय ने मामले से जुड़े साक्ष्यों, गवाहों और अन्य तथ्यों का परीक्षण किया। सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष सत्र न्यायालय ने आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं पाए।
सभी आरोपी दोषमुक्त
विशेष सत्र न्यायालय, छिंदवाड़ा में न्यायाधीश सुधीर मिश्रा की अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। फैसले के बाद मामले में आरोपी बनाए गए लोगों को कानूनी राहत मिली है। इस मामले में भाजपा पार्षद दीपा मुकेश सूर्यवंशी, बहुजन समाज पार्टी की पार्षद संतोषी दुर्गा वंशकार सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था।
दोनों पार्षदों ने न्यायालय का जताया आभार
फैसले के बाद दीपा मुकेश सूर्यवंशी और संतोषी दुर्गा वंशकार ने न्यायालय के प्रति आभार जताया। दोनों ने कहा कि उन्हें न्यायालय की प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था पर शुरू से विश्वास था। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मामले में कानून और न्यायालय का सम्मान करते हुए अपना पक्ष रखा और उन्हें विश्वास था कि सुनवाई के बाद तथ्य सामने आएंगे। दोनों पार्षदों ने दोषमुक्त किए जाने के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि वे आगे भी अपने वार्ड और नगर के नागरिकों से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देंगी।
विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ मामला पहुंचा अदालत तक
अमरवाड़ा का यह मामला पट्टा वितरण कार्यक्रम में पार्षदों को आमंत्रित नहीं किए जाने से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन के बाद कानूनी विवाद में बदल गया था। करीब 1500 से 2000 नागरिकों की मौजूदगी में हुए विरोध के बाद पुलिस में शिकायत हुई, मामला दर्ज किया गया और जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया गया। अब विशेष सत्र न्यायालय ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। इस फैसले के साथ लंबे समय से चल रहे अमरवाड़ा के बहुचर्चित ‘चप्पल कांड’ मामले में आरोपी बनाए गए लोगों को न्यायिक राहत मिली है।




















