Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

भोपाल में GMC के बाद AIIMS में भी टॉक्सिक कल्चर, 36 घंटे की ड्यूटी और हफ्ते में 160 घंटे काम का दावा

भोपाल AIIMS के रेजिडेंट डॉक्टरों ने लंबे कार्य घंटों और कथित टॉक्सिक वर्क कल्चर को लेकर कार्यपालक निदेशक को पत्र भेजा है। RDA के सर्वे में औसतन 98 घंटे साप्ताहिक ड्यूटी और कुछ विभागों में 160 घंटे तक काम का दावा किया गया। 72% डॉक्टरों ने नियमित अवकाश नहीं मिलने की बात कही।  
भोपाल में GMC के बाद AIIMS में भी टॉक्सिक कल्चर, 36 घंटे की ड्यूटी और हफ्ते में 160 घंटे काम का दावा
फाइल फोटो

भोपाल। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल में रेजिडेंट डॉक्टरों ने लंबे कार्य घंटों और कथित टॉक्सिक वर्क कल्चर को लेकर कार्यपालक निदेशक (ED) को पत्र भेजा है। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) के पत्र के अनुसार विभिन्न विभागों में कराए गए ड्यूटी-आवर सर्वे में डॉक्टरों ने औसतन 98 घंटे प्रति सप्ताह काम करने की बात कही है, जबकि कुछ विभागों में यह कार्यभार 160 घंटे तक पहुंचने का दावा किया गया है।

72% ने कहा अवकाश नहीं मिल रहा

सर्वे में शामिल 47 रेजिडेंट्स में से 34 यानी 72% ने नियमित साप्ताहिक या पाक्षिक अवकाश नहीं मिलने की बात कही। पत्र में इमरजेंसी, नाइट ड्यूटी और एनेस्थीसियोलॉजी जैसे विभागों में लगातार 36 घंटे तक ड्यूटी करने के आरोप लगाए गए हैं। आरडीए ने लंबे कार्य घंटों को डॉक्टरों की नींद, मानसिक स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और मरीजों की सुरक्षा से जोड़ते हुए व्यवस्था में बदलाव की मांग की है। पत्र में स्वास्थ्य मंत्रालय की 1992 की रेजिडेंसी योजना तथा एम्स दिल्ली और जिपमर (जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान)की ड्यूटी व्यवस्था का भी हवाला दिया गया है।

आरडीए के पत्र में उठे सवाल 

आरडीए के अनुसार ड्यूटी-ऑवर सर्वे में 47 रेजिडेंट डॉक्टर शामिल हुए। इनमें 34 ने नियमित साप्ताहिक या पाक्षिक अवकाश नहीं मिलने की बात कही। पत्र में औसत साप्ताहिक कार्यभार 98 घंटे और कुछ विभागों में 160 घंटे तक होने का दावा किया गया है। इमरजेंसी, नाइट ड्यूटी और एनेस्थीसियोलॉजी में बिना पर्याप्त आराम के लगातार 36 घंटे तक ड्यूटी करने की बात भी कही गई है। एसोसिएशन ने लंबे कार्य घंटों से नींद की कमी, मानसिक तनाव और पढ़ाई प्रभावित होने का दावा किया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि शैक्षणिक मूल्यांकन प्रभावित होने के डर से कई रेजिडेंट अपनी शिकायतें खुलकर सामने नहीं रख पाते।

ये भी पढ़ें: हर सोमवार कलेक्टरों को देनी होगी जिले के कामकाज की रिपोर्ट, सीएम ने लॉन्च किया जन विश्वास अभियान पोर्टल

नियमों का हवाला, 48 घंटे साप्ताहिक ड्यूटी की मांग

आरडीए ने पत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की 5 जून 1992 की रेजिडेंसी योजना का हवाला दिया है। साथ ही एम्स नई दिल्ली और जिपमर के कार्यालय आदेशों का उल्लेख करते हुए रेजिडेंट डॉक्टरों के कार्य घंटे सीमित रखने की मांग की गई है। पत्र के अनुसार इन संस्थानों में 48 घंटे प्रति सप्ताह और लगातार अधिकतम 12 घंटे की ड्यूटी का हवाला दिया गया है। आरडीए ने एम्स भोपाल में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इन आरोपों पर एम्स भोपाल प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।

जीएमसी में भी उठ चुका है 36 घंटे की ड्यूटी का मुद्दा 

भोपाल में रेजिडेंट डॉक्टरों की लंबी ड्यूटी और टॉक्सिक वर्क कल्चर का मुद्दा पहले गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में भी उठ चुका है। 2023 में पीजी रेजिडेंट डॉ. बाला सरस्वती की मौत के बाद परिजनों और जूनियर डॉक्टरों ने काम के दबाव और 36 घंटे की ड्यूटी सहित कई आरोप लगाए थे। इसके बाद 2024 में जीएमसी के पांच रेजिडेंट डॉक्टरों के गुमनाम पत्र में 24 से 36 घंटे तक लगातार काम, छुट्टी नहीं मिलने और वरिष्ठों के कथित दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए थे। मामले के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे और 8 से 12 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

ये भी पढ़ें: हनीट्रैप पार्ट 2:वीडियो बनाने वाला कैमरा गायब, मिला सिर्फ चार्जर.. मोबाइल लापता और चार्जशीट तैयार

लंबी ड्यूटी से मरीजों की सुरक्षा का सवाल 

रेजिडेंट डॉक्टर अस्पतालों में इमरजेंसी, वार्ड, ऑपरेशन और नाइट ड्यूटी में लगातार मरीजों की देखभाल करते हैं। लंबे समय तक नींद और आराम की कमी से थकान बढ़ सकती है, जिससे ध्यान और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसलिए आरडीए ने ड्यूटी घंटों को केवल डॉक्टरों की सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा विषय भी बताया है। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

Latest Posts