सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिसने लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे कला और क्रिएटिविटी का नाम दे रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स इसे बेजुबान जानवर के साथ क्रूरता बता रहे हैं। पूरा मामला विदेशी फोटोग्राफर जूलिया से जुड़ा है, जिन्होंने एक फोटोशूट के लिए एक हाथी को गुलाबी रंग में रंग दिया। खास बात यह है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट को “नो AI” यानी बिना किसी डिजिटल इफेक्ट के बनाया गया बताया, लेकिन असली विवाद यहीं से शुरू हो गया।
फोटोग्राफर का यह प्रोजेक्ट उनकी तथाकथित “पिंक सिटी” सीरीज का हिस्सा बताया जा रहा है। इस सीरीज में वे अलग-अलग जगहों पर जाकर लोकल लाइफ को अपने नजरिए से कैद करती हैं। इसी क्रम में उन्होंने एक हाथी को गुलाबी रंग में रंगकर फोटोशूट किया। तस्वीरों में हाथी पूरी तरह पिंक नजर आता है, जो देखने में तो अनोखा लगता है, लेकिन इसके पीछे की प्रक्रिया ने लोगों को नाराज कर दिया।
यह फोटोशूट नया नहीं है। जानकारी के मुताबिक यह तस्वीरें करीब तीन महीने पहले, दिसंबर में ली गई थीं। उस समय भी इस पर हल्की प्रतिक्रिया आई थी, लेकिन हाल ही में जब जूलिया ने 20 मार्च को इस शूट का बिहाइंड-द-सीन वीडियो शेयर किया, तो मामला फिर से गर्मा गया। वीडियो में साफ दिखता है कि हाथी पर गुलाबी रंग लगाया जा रहा है और उसे पूरी तरह एक आर्ट पीस में बदल दिया गया है। यही दृश्य सोशल मीडिया यूजर्स को सबसे ज्यादा खटक रहा है।
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वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूजर ने लिखा कि यह साफ तौर पर एनिमल एब्यूज है। दूसरे ने कहा, हाथी कोई कैनवास नहीं है, जिस पर आप अपनी कला दिखाएं। एक अन्य यूजर ने लिखा कि क्रिएटिविटी के नाम पर बेजुबान जानवरों को परेशान करना गलत है। इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि बड़ी संख्या में लोग इस काम को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच जूलिया ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर यह स्पष्ट किया है कि वे अपने काम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल नहीं करती हैं। उनका कहना है कि उनकी पिंक सिटी सीरीज पूरी तरह रियल और ऑर्गेनिक है, जिसमें किसी तरह का डिजिटल एडिट या AI इफेक्ट शामिल नहीं है। हालांकि, लोगों का सवाल यह है कि अगर AI का इस्तेमाल नहीं किया गया, तो क्या इसके लिए असली जानवर को इस तरह रंगना सही है?
फोटोग्राफर ने अपने बचाव में यह भी कहा कि हाथी पर जो रंग लगाया गया, वह ऑर्गेनिक है और स्थानीय स्तर पर तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के रंग होली जैसे त्योहारों में इस्तेमाल होते हैं, इसलिए इससे हाथी को कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स इस तर्क से संतुष्ट नहीं दिखे। उनका कहना है कि चाहे रंग ऑर्गेनिक हो या नहीं, किसी जानवर को इस तरह इस्तेमाल करना गलत है।
इस पूरे विवाद ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है- क्या क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर सब कुछ जायज है?
कई लोगों का मानना है कि कलाकारों को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी जरूर होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। “क्रिएटिव फ्रीडम का मतलब यह नहीं कि आप किसी को नुकसान पहुंचाएं,” एक यूजर ने लिखा। दूसरे ने कहा, यह कला नहीं, गैरजिम्मेदारी है। यह बहस अब सिर्फ एक फोटोशूट तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आर्ट और एथिक्स के बीच टकराव का उदाहरण बन गई है।
पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया यूजर्स जानवरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हुए हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां जानवरों के साथ गलत व्यवहार करने पर लोगों ने खुलकर विरोध किया है। यही कारण है कि यह मामला भी तेजी से वायरल हो गया और फोटोग्राफर को आलोचना का सामना करना पड़ा।