आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ चैट या कोडिंग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हेल्थकेयर सेक्टर में भी बड़ा बदलाव लाने की तैयारी कर चुका है। OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन की कंपनी ने नया AI मॉडल GPT-Rosalind लॉन्च किया है, जो खासतौर पर दवाओं की खोज यानी ड्रग डिस्कवरी के लिए तैयार किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह मॉडल वैज्ञानिक रिसर्च को तेजी से आगे बढ़ाएगा और उन बीमारियों के इलाज खोजने में मदद करेगा, जिन पर सालों से काम चल रहा है। GPT-Rosalind का लॉन्च ऐसे समय पर हुआ है जब दुनिया भर की टेक कंपनियां हेल्थकेयर में AI के इस्तेमाल को लेकर तेजी से काम कर रही हैं। इस नए मॉडल से उम्मीद है कि रिसर्च की लंबी और जटिल प्रक्रिया अब पहले से काफी कम समय में पूरी हो सकेगी।
GPT-Rosalind को बड़े डेटा सेट्स को समझने और उनसे जरूरी जानकारी निकालने के लिए डिजाइन किया गया है। यह मॉडल वैज्ञानिक स्टडीज, क्लिनिकल डेटा और रिसर्च पेपर्स को तेजी से एनालाइज कर सकता है और उन्हें ऐसे नतीजों में बदल सकता है, जो सीधे मरीजों के इलाज में काम आएं। इसका मकसद सिर्फ डेटा पढ़ना नहीं, बल्कि उसे उपयोगी मेडिकल सॉल्यूशन में बदलना है। यानी यह मॉडल लैब में चल रही रिसर्च को रियल-वर्ल्ड हेल्थकेयर एप्लिकेशन से जोड़ने का काम करेगा। फिलहाल इसका शुरुआती वर्जन रिसर्च प्रीव्यू के रूप में कुछ चुनिंदा बिजनेस ग्राहकों को दिया गया है।
GPT-Rosalind के शुरुआती यूजर्स में कई बड़ी कंपनियां और संस्थान शामिल हैं। इनमें Amgen Inc., Moderna Inc. और Allen Institute जैसे नाम प्रमुख हैं। ये सभी संस्थाएं इस AI मॉडल का इस्तेमाल नई दवाओं की खोज और रिसर्च को तेज करने के लिए कर रही हैं। इन कंपनियों के लिए यह मॉडल खास इसलिए है क्योंकि ड्रग डिस्कवरी एक लंबी, महंगी और जटिल प्रक्रिया होती है। AI के जरिए इसे आसान और किफायती बनाया जा सकता है।
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OpenAI में लाइफ साइंसेज प्रोडक्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे युनयुन वांग ने इस मॉडल को लेकर कहा कि कंपनी का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा संस्थाएं इसे सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल कर सकें। उनका मानना है कि GPT-Rosalind जैसे मॉडल रिसर्च और हेल्थकेयर के बीच की दूरी को कम करेंगे। कंपनी का फोकस सिर्फ टेक्नोलॉजी बनाना नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदारी के साथ लागू करना भी है, ताकि इसका फायदा सीधे मरीजों तक पहुंच सके।
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AI और हेल्थकेयर के इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में सिर्फ OpenAI ही नहीं, बल्कि कई और बड़ी कंपनियां भी काम कर रही हैं। Google और Anthropic जैसे नाम भी इस दौड़ में शामिल हैं। खासतौर पर Google DeepMind का AlphaFold सिस्टम पहले ही प्रोटीन स्ट्रक्चर की भविष्यवाणी करके बड़ा बदलाव ला चुका है। इसी काम के लिए 2024 में DeepMind के वैज्ञानिकों को केमिस्ट्री में नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है।